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अप्रैल की तीन तारीख. तड़के सुबह, कानपुर-लखनऊ हाईवे पर दरोगाखेड़ा के पास चल रही एक सामान्य चेकिंग ने ऐसा राज खोला, जिसने यूपी के टोल प्लाजा सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए. सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी (प्रवर्तन) आलोक कुमार यादव की टीम ने जब एक ट्रक को रोका, तो सब कुछ सामान्य लग रहा था. ट्रक का नंबर था UP32ZN8925 और चालक ने कागज भी पूरे दिखाए. 

लेकिन जैसे ही टोल पर्ची देखी गई, कहानी पलट गई. पर्ची पर दर्ज वाहन संख्या थी MA34S9455. यह नंबर न किसी राज्य कोड से मेल खाता था और न ही किसी सरकारी डेटाबेस में मौजूद था. ऑनलाइन जांच में जब इस नंबर का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला, तो अधिकारियों को साफ हो गया कि मामला महज एक गलती नहीं, बल्कि बड़े फर्जीवाड़े का हिस्सा है. 

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