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बंगाल के ज्यादातर घरों की उस चिर-परिचित शाम- जहां चाय के दौर चलते हैं और टीवी पर बहसें गरमाती हैं- उसी बीच, फेसबुक रील्स के ज़रिए एक अलग ही किस्म की राजनीति ने दबे पांव दस्तक दी है. कान उन आवाजों को पहचान रहे थे और धुन भी जैसे विरासत में घुली हुई थी. कहीं घुमक्कड़ गायकों की एक जोड़ी सत्ता की विसंगतियों पर चुटकी ले रही थी, तो कहीं एक जासूस खामोशी से कड़ियों को जोड़ता दिख रहा था.
यह सब नया नहीं था, फिर भी इसमें आज के दौर की झलक साफ़ थी. बंगाल BJP की सोशल मीडिया टीम ने आने वाले चुनावों के लिए जो दांव चला है, वह कोई ट्रेडिशनल तरीका नहीं है. दरअसल, यह बंगाल के लोगों की यादों या कहें सांस्कृतिक स्मृति से जुड़ने की एक कोशिश है. AI से तैयार ये वीडियो, सत्यजीत रे की कालजयी फिल्मों 'गुपी गाइन बाघा बाइन' और 'हीरक राजार देशे' की दुनिया से उधार लिए गए हैं.






























