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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 12 अप्रैल को जब पश्चिमी बंगाल के चुनावी रण में कदम रखा, तो यह सिर्फ एक और स्टार प्रचारक की एंट्री नहीं थी; यह एक ऐसी राजनीतिक रणनीति का प्रदर्शन था, जिसने कुछ ही हफ्तों में चुनावी नैरेटिव बदलने का दावा पेश कर दिया.
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के भीतर उन्हें लंबे समय से एक आक्रामक, स्पष्ट और वैचारिक तौर पर मुखर नेता के रूप में पेश किया जाता रहा है, लेकिन बंगाल में उनका अभियान एक अलग ही पैमाने पर परखा गया. आंकड़े इस दावे को मजबूती देते हैं कि जिन 22 सीटों पर योगी ने रैलियां या रोडशो किए, उनमें से 19 पर BJP की जीत हुई.




























