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उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले गठबंधन की संभावनाओं और राजनीतिक मोलभाव की नई परत तब खुलती दिखी, जब 19 मई को कांग्रेस के दो वरिष्ठ दलित नेताओं ने बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती से मिलने की कोशिश की. हालांकि यह मुलाक़ात हो नहीं सकी क्योंकि BSP प्रमुख कथित तौर पर 'व्यस्त' थीं लेकिन इस असफल प्रयास ने प्रदेश की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया.
बाराबंकी से कांग्रेस सांसद तनुज पुनिया और पार्टी के अनुसूचित जाति विभाग के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेंद्र पाल गौतम का अचानक लखनऊ स्थित मायावती आवास पहुंचना, राजनीतिक गलियारों में सामान्य शिष्टाचार भेंट की तरह नहीं देखा गया. खासकर तब, जब कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को 2024 लोकसभा चुनाव के बाद स्वाभाविक सहयोगी माना जा रहा था और INDIA गठबंधन के साथ आगे बढ़ने की चर्चा लगातार हो रही थी.




























