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उत्तर प्रदेश में जून का आखिरी सप्ताह शुरू होने को है लेकिन आसमान अब भी प्रदेश के बड़े हिस्से पर मेहरबान नहीं हुआ है. खेतों में धान की पौध तैयार खड़ी है, लेकिन रोपाई के लिए पानी नहीं है. तालाब सिकुड़ रहे हैं, नहरों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा और किसान हर सुबह आसमान की ओर उम्मीद से देखते हैं.
दूसरी तरफ मौसम विभाग के आंकड़े एक ऐसे संकट की चेतावनी दे रहे हैं जिसे अक्सर लोग तब तक गंभीरता से नहीं लेते जब तक उसके असर घरों, खेतों और बाजारों तक न पहुंच जाएं. यह संकट है सूखे का. हैरानीभरी और चिंताजनक बात यह है कि उत्तर प्रदेश में इस समय सूखे का खतरा ऐसे दौर में दिखाई दे रहा है जब राज्य के कुछ जिलों में सामान्य से डेढ़ से दो गुना तक बारिश दर्ज हुई है.




























