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ममता कालिया की बतकही में एक शहर-एक दौर
'जीते जी इलाहाबाद' को साल 2025 का साहित्य अकादेमी पुरस्कार मिला है. वरिष्ठ कथाकार ममता कालिया का यह संस्मरण हर उस लिखने-पढ़ने वाले व्यक्ति के लिए जरूरी पाठ है जिसे जीवंत अतीत आकर्षित करता है

कौन हैं IAS अधिकारी जितेंद्र सोनी जिनके कहानी संग्रह ‘भरखमा’ से चमका राजस्थानी साहित्य
आईएएस अधिकारी जितेंद्र कुमार सोनी के कहानी संग्रह 'भरखमा' को राजस्थानी भाषा में साहित्य अकादेमी पुरस्कार के लिए चुना गया है

ऑस्कर मिलते ही कैसे बदलता है फिल्मों का कारोबार?
ऑस्कर मिलने के बाद सिर्फ प्रतिष्ठा ही नहीं मिलती, बल्कि फिल्म के कारोबार का नया सफर भी शुरू होता है

बीता जीवन देख रहा है
बंगाल में मछली केवल भोजन नहीं है, वह संस्कृति है, जीवन है. अमिताव घोष इस प्रतीक को रोजमर्रा के अनुभवों में घोल देते हैं. सुंदरबन के संदर्भ आते हैं, पर्यावरणीय संकट की आहट मिलती है.

बर्फ के उस पार का महादेश
संयोगवश हैरर जब तिब्बत में दाखिल हुए, उन्हें अंदाजा भी न था कि वे यहां कुछ दिन या कुछ हफ्ते नहीं, बल्कि सात साल गुजारने वाले हैं. या कि इन वर्षों में उपजी किताब आने वाली पीढ़ियों के लिए तिब्बत को समझने का सबसे अहम और ऐतिहासिक दस्तावेज बन जाएगी.

जिससे है पहचान हमारी
नवतेज सरना अपनी किताब 'अ फ्लैग टू लिव ऐंड डाइ फॉर' में दिल्ली सल्तनत, मुगल और मराठा परंपराओं के उदाहरणों से बताते हैं कि भारत में ध्वज हमेशा से सत्ता, युद्ध और गौरव से जुड़े रहे हैं.

मां! जो कहीं नहीं जाती
बैचलर्स किचन पुस्तक एक स्मृति गाथा है, जिसमें मां की उपस्थिति-अनुपस्थिति को मार्मिक ढंग से याद किया गया है

समकालीन समाज की सोनोग्राफी
इस किताब की कहानी एक मध्यमवर्गीय हिंदू परिवार के लड़के बोस का मुसलमान निम्नवर्ग की लड़की दीबा से निकाह पढ़ने से पहले और बाद के जीवन के आसपास मंडराता है.

क्या 'सूबेदार' को 'नायक' की वापसी का बयान माना जा सकता है?
'सूबेदार' में एक नाकाम पिता, ग़ैरमौजूद पति और स्वार्थी लगने वाले दोस्त के किरदार में अनिल कपूर ने कमाल की अदाकारी दिखाई है

ये आत्महंता चूहामार!
चूहों के बहाने शॉर्ट फिल्म 'द रैट कैचर' हमें संभावनाओं और आशंकाओं के उस गर्भगृह में ला पटकती है, जहां प्रारब्ध और नियति दोनों ही निरर्थक हो जाती हैं.

मर्सिये की विरासत और मीर अनीस का मज़ार
मीर बबर अली ‘अनीस’ ने 19वीं सदी में मर्सिया लिखना शुरू किया और मर्सिये को उर्दू साहित्य में वह स्थान दिला दिया जो ग़ज़ल और मसनवी को हासिल था

मिथिला का फागुन और चैत की देहरी
सीमांत मिथिला में नेपाल की ओर से आती ठंडी हवा में हिमालय की स्मृति होती है, तो इधर की धरती में गंगा के मैदानों की उर्वरता. फागुन के दिनों में यह मिलन और स्पष्ट हो उठता है

BAFTA जीतकर इतिहास बनाने वाली मणिपुरी फिल्म 'बूंग' किस बारे में है और कहां देखने को मिलेगी?
'बूंग' को BAFTA की चिल्ड्रन एंड फैमिली फिल्म कैटेगरी में बेस्ट फिल्म का पुरस्कार मिला है

घमंड दरकने की खूबसूरती जाननी है तो देखिए 173 साल पुरानी कहानी पर बनी यह छोटी-सी फिल्म
Netflix पर आई महज 18 मिनट लंबी फिल्म The Singers आपको बिल्कुल नया इंसान बना देने की संभावना से लबालब भरी हुई है

खाकी नजर से दिखता जरूरी नजारा
उत्तर प्रदेश पुलिस के पूर्व डायरेक्टर जनरल ओ.पी. सिंह ने अपनी किताब 'थ्रू माय आइज़—स्केचेस फ्रॉम अ कॉप्स नोटबुक' में आधी रात को विमेन होस्टल में खड़े एक स्वयंभू छात्र नेता से लेकर पंजाब में मिलिटेंसी के फर्स्ट हैंड किस्सों तक को साझा किया है

‘अस्सी’ असहज तो करती है, लेकिन असरदार क्यों नहीं हो पाती?
निर्देशक अनुभव सिन्हा और तापसी पन्नू की मुख्य भूमिका वाली फिल्म 'अस्सी’ का सबसे कमजोर पहलू इसकी कहानी में मौजूद कई सब-प्लॉट हैं

भारत को गढ़ती पत्रकारिता का विराट संकलन
कागज और मुद्रण के इतिहास से आरंभ होकर भारतीय पत्रकारिता की यह यात्रा तीन खंडों में फैली है. साल 1780 से लेकर 1948 तक की लगभग 168 वर्षों की एक जीवंत, संघर्षशील और वैचारिक यात्रा.

भारत पढ़ता नहीं या पढ़ने का अर्थ बदल गया है! The Guardian की हेडलाइन से क्यों छिड़ी बहस?
भारत में लिखने-पढ़ने की संस्कृति पर ब्रिटेन के प्रतिष्ठित अख़बार द गार्डियन में प्रकाशित एक रिपोर्ट बनी देश के बौद्धिक तबके के बीच बहस का विषय

धोखे से गर्भाशय निकलवाने का आरोप! उदित नारायण की पहली शादी के विवाद की पूरी कहानी
मशहूर गायक उदित नारायण की पहली पत्नी रंजना झा ने उन पर धोखे से गर्भाशय निकलवा लेने का गंभीर आरोप लगाया है. 20 साल से हक की लड़ाई लड़ रही रंजना अब अपनी बीमारी और बेघर होने के दर्द के साथ इंसाफ के लिए दर-दर भटक रही हैं

Gen-Z भूत और नास्तिक पुजारी! ‘सर्वम माया’ क्यूं है हॉरर-कॉमेडी की सबसे अलहदा फिल्म?
जियो हॉटस्टार पर पहली बार Gen-Z भूत अपनी कहानी के साथ प्रकट हुआ है. मलयाली फिल्म ‘सर्वम माया’ ने कई मायनों में वे परिभाषाएं ध्वस्त कर दी हैं जो अब भी क्लासिक हॉरर कल्चर में बची हुई थीं
