फीचर

परंपरा की सतह के नीचे
भारतीय ज्ञान परंपरा की आलोचनात्मक समझ इस बात पर निर्भर करती है कि हम उसमें केवल सातत्य और संवर्धन की प्रक्रियाओं को देखते हैं या उसके भीतर सक्रिय सामाजिक अंतर्विरोधों, वर्चस्व और प्रतिरोध को भी पहचानते हैं

लंबा जी रहे पर हांफते हुए
विश्व स्वास्थ्य संगठन के ताजा ग्लोबल हेल्थ एस्टिमेट्स में भारत में दो समानांतर बदलाव दिख रहे: लोग दीर्घायु हो रहे, दूसरी ओर मौत की वजह में उन गंभीर बीमारियों की हिस्सेदारी काफी बढ़ गई है जो लंबी खिंचती हैं

रविंद्र किशोर सिन्हा: पत्रकार से अरबपति कारोबारी बने लेकिन कभी अपनी जड़ें नहीं भूले
पटना के एक गैराज से देश की सबसे बड़ी सुरक्षा एजेंसियों में से एक खड़ी करने वाले उद्यमी, बीजेपी के वफादार नेता और समाजसेवी रविंद्र किशोर सिन्हा को भविष्य की असाधारण समझ थी

कामकाज और नींद पर भारी पड़ रही रील्स की लत छूटती क्यों नहीं?
PGIMER चंडीगढ़ की रिसर्च बताती है कि ऑटोप्ले, लगातार स्क्रॉलिंग और पसंद के मुताबिक कंटेंट दिखाने वाले एल्गोरिदम युवाओं को रील्स में उलझाए रखते हैं, जिससे उनकी पढ़ाई और नींद प्रभावित हो रही है

साड़ी में 106 पुल-अप्स कर संयुक्ता ने छेड़ी महिलाओं की फिटनेस पर बहस
फिटनेस एक्सपर्ट्स का कहना है कि स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को सिर्फ पुरुषों और बॉडीबिल्डिंग से जोड़कर देखने के कारण महिलाएं इसके कई फायदों से वंचित रह सकती हैं

प्रखर मेधा का पथिक
जाहिर तौर पर जीवनी लेखन में व्यक्ति को नायक के तौर पर दर्शाए जाने की परंपरा रही है जिससे कई व्यक्तियों की जीवनियां व्यक्तिपूजा में बदल जाती हैं

जोगेन चौधरी : बंगाल शैली का उत्तर राग
भारतीय आधुनिक कला के विशिष्ट चित्रकार जोगेन चौधरी का 25 अक्टूबर को निधन हो गया. उनकी आकृतियां अपने समय, स्थान और पहचान से मुक्त होकर भी अपने भीतर समय की बेचैनी और दबाव को दर्ज करती हैं

विधाओं की बेमानी सीमाएं
ऐन कार्सन को साल 2026 का साहित्य का नोबेल दिए जाने की घोषणा हुई है. उनकी खूबी है कि उन्होंने कविता, उपन्यास, आलोचना, रंगमंच, निबंध और सहोदर कलाओं के बीच की लकीरों को मिटा दिया

रामलीला की रंगभाषा का नया आयाम
प्रयागराज में रंगकर्मी एवं लोककला शोधकर्ता अतुल यदुवंशी लोकनाट्य परंपरा, साहित्यिक विरासत, मौलिक संगीत और आधुनिक मंच-तकनीक के समन्वय से रामलीला को नई पीढ़ी के लिए बना रहे आकर्षक

डॉक्टरों के विज्ञापन कैसे बढ़ा रहे मरीजों की बीमारी!
सोशल मीडिया पर इलाज के बढ़ा-चढ़ाकर किए जाने वाले दावों और AI से तैयार फर्जी मेडिकल कंटेंट के बीच मरीजों के लिए सही सलाह पहचानना मुश्किल हो रहा है. ऐसे में राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) की नई पाबंदियां डॉक्टरों के प्रचार और मरीजों के भरोसे के बीच संतुलन बनाने की कोशिश हैं

सहज हुए अब महीने के वे दिन
भारत में माहवारी के दौरान साफ-सफाई के मोर्चे पर पिछले कुछ वर्षों में बड़ा सुधार हुआ है. जागरूकता अभियान और नए प्रॉडक्ट इससे जुड़ी झिझक तोड़कर महिलाओं के लिए महीने के वे दिन ज्यादा सहज बना रहे

12 साल पहले ‘गायब’ हुई मूर्ति मिलने पर क्यों जश्न मना रहा कोलकाता?
शानू लाहिड़ी की बनाई विशाल मूर्ति ‘परोमा’ 12 साल पहले कोलकाता के एक प्रमुख चौराहे से हटा दी गई थी. अब इसके फिर मिलने से दुर्गा पूजा के जरिए कलाकार की कला और विरासत को याद करने का मौका मिला है

कार्डियो के बाद कचौड़ी! फिटनेस का यह कैसा ट्रेंड?
बीकानेर में कचौड़ी रन, बेंगलुरु में बेकरी-हॉप रन और मुंबई में गणेश उत्सव के दौरान मोदक रन जैसे आयोजन हो रहे हैं

अस्पतालों की दवाओं पर भारी मुनाफे का खेल, सुप्रीम कोर्ट लगा पाएगा लगाम?
कैंसर की दवाओं पर 10 गुना तक मार्जिन को लेकर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद अस्पतालों में दवाओं की कीमत, मुनाफे और मरीजों की मजबूरी पर बहस तेज हो गई है

युद्ध की कथा से आगे
महाकाव्य एवं राष्ट्र हमें सोचने के लिए बाध्य करती है कि कोई समाज अपने अतीत को कैसे याद करता है और उस स्मृति के आधार पर अपनी सामूहिक पहचान को किस तरह गढ़ता है

एआइ के दौर में इंसान बने रहने के गुर
यह किताब संभावनाओं की किताब है. नितिन मानते हैं कि नौकरियों पर खतरे के बावजूद 2040 तक दस से बीस करोड़ नए काम पैदा होंगे. स्किल ही नौकरी बचाएगा. बस हमें अपने भीतर के टिके रहने और विकास करने की मूल प्रवृत्ति को फिर से खोजने की जरूरत है

अब 100 साल की उम्र में भी सर्जरी मुमकिन, कैसे बदल रहा मेडिकल साइंस?
उम्र बढ़ने के साथ बड़ी सर्जरी का जोखिम बढ़ता है लेकिन आधुनिक तकनीक ने तस्वीर बदली है. अब डॉक्टर उम्र से ज्यादा मरीज की कुल सेहत पर ध्यान देते हैं

निवाले स्वाद और सियासत के
किसी देश की संस्कृति को जानने के लिए उसका खाना खाना जरूरी है. पीएम मोदी वैसे सादा खाने के लिए ही जाने जाते हैं, खासकर खिचड़ी

काम से ब्रेक के बाद भी दिमाग से काम न छूटे तो क्या किया जाए?
काम का समय खत्म होने के बाद भी ईमेल, घर की जिम्मेदारियां और अधूरे काम दिमाग में चलते रहते हैं. आराम के वक्त भी काम को लेकर बेचैनी और अपराधबोध की इस स्थिति को 'स्ट्रेसलैक्सिंग' नाम दिया गया है

भावनात्मक सहारा ढूंढ़ रहे युवाओं के लिए AI कितना मददगार?
अकेलेपन और एंजायटी से जूझ रहे कई युवा दोस्तों या परिवार के बजाय AI से अपनी निजी बातें साझा कर रहे हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक AI शुरुआती भावनात्मक सहारा दे सकता है लेकिन इंसानी रिश्तों का विकल्प नहीं बन सकता
