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डार्क मोड

नई ऊंचाइयों की ओर

'सा लद्दाख बिएनेल' का पहला संस्करण लेह से लेकर करगिल तक फैले आठ स्थलों पर आयोजित होने जा रहा

Leisure:art
लैंडस्केप आर्ट सा लद्दाख 2023 में अंशु ‌सिंह की ‘रिवर ऑफ स्वेट’
अपडेटेड 6 अगस्त , 2026

सुकांत दीपक

राकी निकाहेतिया उन क्यूरेटरों जैसे नहीं जो पहले से कोई तय विचार लेकर आते हैं और कला-कृतियों को ढाल देते  हैं. लद्दाख के पहले कला महोत्सव सा लद्दाख बिएनेल के सह-संस्थापक के रूप में उन्होंने ठीक उलटा किया. उन्होंने पहले लद्दाख और वहां के लोगों को समझने-सुनने की कोशिश की.

श्रीलंका में जन्मे, ऑस्ट्रिया में पले-बढ़े और दुनिया के कई शहरों में काम कर रहे राकी को लद्दाख ने प्रभाविक किया. वे कहते हैं, ‘‘इस जगह ने मेरी सोच की दिशा ही बदल दी.’’ 
हालांकि, कलाकार विशाल के. डार की ओर से क्यूरेट किया गया पहला संस्करण सिग्नल्स फ्रॉम अनदर स्टार 1-10 अगस्त तक आयोजित होगा.

निकाहेतिया बताते हैं कि उन्होंने और उनके सह-संस्थापकों सागरदीप सिंह और तेनजिंग जमयांग का उद्देश्य बिएनेल शुरू करना कभी नहीं था. उनका कहना है, “हमें कुछ स्थापित करने की महत्वाकांक्षा नहीं बल्कि जिज्ञासा खींच लाई.”

लद्दाखी में ‘मिट्टी’ को ‘सा’ कहते हैं. साल 2023 और 2024 में लेह में सालाना रीजनरेटिव लैंड आर्ट एग्जिबिशन के रूप में सा का आयोजन हुआ था. अब 2026 में पहली बार बिएनेल (द्विवार्षिक) के रूप में आयोजित हो रहा है.  

लेह-करगिल के 230 किमी लंबे कॉरिडोर पर आठ जगहों - लेह, लिकिर, नुरला, बसगो, लामायुरू, हेनास्कु, मुलबेख और करगिल में यह आयोजित होगा. 

साल 2023 में सा के प्रथम आयोजन से पहले, कई वर्षों तक टीम ने स्थानीय समुदायों को सुना और देसी-विदेशी कलाकारों और शोधकर्ताओं से संवाद किया. राकी की खुद की जिंदगी कई संस्कृतियों के बीच गुजरी है और जिससे वे कला प्रोजेक्टों के प्रति सतर्क बने और जाना कि निष्कर्ष पहले से तय नहीं होते. लद्दाख ने उन्हें यह एहसास कराया कि स्मृतियां लोगों के भीतर ही नहीं बल्कि हिमनदों, बौद्ध मठों और मौखिक परंपराओं में भी सुरक्षित रहती हैं.

अगले दस साल में सा  के भविष्य पर वे कहते हैं कि इसकी पहचान इस बात से बनेगी कि यह अपने पीछे क्या छोड़कर जाता है. राकी कहते हैं, ‘‘मैं विरासत के बजाए निरंतरता में विश्वास करता हूं.”    

बिएनेल 1-10 अगस्त तक है.

 

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