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साहित्य-कला

युद्ध की कथा से आगे

5 अक्टूबर 2026

महाकाव्य एवं राष्ट्र हमें सोचने के लिए बाध्य करती है कि कोई समाज अपने अतीत को कैसे याद करता है और उस स्मृति के आधार पर अपनी सामूहिक पहचान को किस तरह गढ़ता है

एआइ के दौर में इंसान बने रहने के गुर

5 अक्टूबर 2026

यह किताब संभावनाओं की किताब है. नितिन मानते हैं कि नौकरियों पर खतरे के बावजूद 2040 तक दस से बीस करोड़ नए काम पैदा होंगे. स्किल ही नौकरी बचाएगा. बस हमें अपने भीतर के टिके रहने और विकास करने की मूल प्रवृत्ति को फिर से खोजने की जरूरत है

निवाले स्वाद और सियासत के

29 सितंबर 2026

किसी देश की संस्कृति को जानने के लिए उसका खाना खाना जरूरी है. पीएम मोदी वैसे सादा खाने के लिए ही जाने जाते हैं, खासकर खिचड़ी

आजादी के अर्थ की तलाश में

13 सितंबर 2026

यह किताब भारत के विचार को राजनीतिक सिद्धांतों, बॉम्बे सिनेमा और उर्दू की प्रगतिशील कविता में खोजने की कोशिश है जहां पाठक जान पाता है कि हम क्या पा चुके हैं और क्या बाकी है

जब सारंगी ने नबील ख़ां को चुना

9 सितंबर 2026

चार सौ साल की विरासत से टाइम्स स्क्वायर तक, एक ऐसे युवा कलाकार की कहानी जो सारंगी को संगत से निकाल दुनिया के बड़े मंच पर एकल आवाज देना चाहता है

मॉनसून, पर्यावरण और पहचान, दिल्ली कंटेम्परेरी आर्ट वीक में कला के कई रंग

2 सितंबर 2026

दिल्ली कंटेम्परेरी आर्ट वीक के नौवें संस्करण में छह गैलरियां शामिल हैं, जिनकी कमान महिलाओं के हाथ में है. यहां दक्षिण एशिया के स्थापित और उभरते कलाकार पर्यावरण, पहचान, स्मृति और जलवायु जैसे मुद्दों को अपनी कला के जरिए सामने ला रहे हैं

एक बिंदु से अनंत तक : यायोई कुसामा की कला-यात्रा

31 अगस्त 2026

जापानी कलाकार यायोई कुसामा का पिछले दिनों देहावसान हो गया. उन्होंने बिंदु, जाल, दर्पण, कद्दू और पुनरावृत्ति जैसे अत्यंत सरल दिखाई देने वाले दृश्य तत्वों को वैचारिक शक्ति प्रदान की

‘‘अच्छी सीरीज, अच्छी किताब दो अलग बातें’’

31 अगस्त 2026

शब्दों में रचे प्रेम को पर्दे पर सांस लेते देखना मुसाफिर कैफे के लेखक दिव्य प्रकाश दुबे के लिए सिर्फ कहानी का रूपांतरण नहीं, हिंदी लेखन की बढ़ती स्वीकार्यता भी

साझा समय, स्मृति और संवेदना की धीमी महक

24 अगस्त 2026

इस संग्रह में ‘साझा’ केवल दो व्यक्तियों के बीच का संबंध नहीं है. वह मनुष्य और प्रकृति, अतीत और वर्तमान, प्रेम और वियोग, यथार्थ और स्वप्न, भाषा और मौन के बीच की वह सूक्ष्म जगह है जहां कविता जन्म लेती है

लोकतंत्र पर आंबेडकर के चार दशकों का संवाद

22 अगस्त 2026

आनंद तेलतुंबड़े की प्रस्तावना इस तथ्य को रेखांकित करती है कि आंबेडकर उन विरले व्यक्तित्वों में थे जिन्होंने एक साथ गंभीर चिंतक और जननेता दोनों भूमिकाएं निभाईं.

अलास्का : जहां पृथ्वी अपनी आदिम लय में सांस लेती है

20 अगस्त 2026

बादलों से ढके पहाड़, समुद्र में टूटकर गिरता ग्लेशियर और अचानक पानी से उभरती एक विराट देह. अलास्का में प्रकृति दृश्य नहीं, एक ऐसी अनुभूति है जहां से लौटकर भी लौटना संभव नहीं. पढ़िए समुद्र के बीच घटे अद्भुत अनुभवों का वृत्तांत

नई ऊंचाइयों की ओर

6 अगस्त 2026

'सा लद्दाख बिएनेल' का पहला संस्करण लेह से लेकर करगिल तक फैले आठ स्थलों पर आयोजित होने जा रहा

बीती काशी की तलाश में

2 अगस्त 2026

‘काशीस्थ’ अर्थात काशी में रहने वाला या काशी में लीन. दिलचस्प यह है कि जो काशी से बाहर है और काशी होकर आया है वह भी काशीस्थ हो जाता है. हर व्यक्ति की अपनी काशी है.

पंडवानी के प्रबल स्वर का प्रस्थान

31 जुलाई 2026

तीजन का अंश अनेक कलाकारों ने अपनाने की कोशिश की है पर वह संघर्ष, वह आग और महाभारत को कहने वाला निश्छल मन कितनों के पास होगा. तीजन जैसा दूजा नहीं

आदित्य धर कैसे बने नेशनल फिल्म अवॉर्ड के 'गोल्डन बॉय'

22 जुलाई 2026

देशभक्ति से जुड़ी कहानियों को तकनीकी बारीकियों के साथ पर्दे पर पेश करने का आदित्य धर का फॉर्मूला सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर ही हिट नहीं है

मासूम हिंद गूंजती सदा

16 जुलाई 2026

गजा में हिंसा का शिकार एक नन्हीं जान की असल आवाज को केंद्र में रख कौसर बेन हानिया ने रची हमारी अंतरात्मा को हिला देने वाली 'द वॉएस ऑफ हिंद रजब'.

समृद्ध इतिहास की पुनर्खोज

6 जुलाई 2026

भारत की सांस्कृतिक धरोहरों की अनछुई पर्यटन क्षमता और इस क्षेत्र में दूसरे देशों से आगे बढ़ने पर आर्किटेक्ट आभा नारायण लांबा ने क्या कुछ कहा इंडिया टुडे हिंदी पर पढ़िए

तीजन बाई : पंडवानी से दुनिया जीतने वाली विद्रोही आवाज

6 जुलाई 2026

तीजन बाई के पहले पंडवानी में पुरुषों का वर्चस्व था लेकिन उनके आने के बाद वे इस कला का दूसरा नाम बन गईं

हॉकी के लिए उम्मीद की किरण

5 जुलाई 2026

मिडफील्डर हार्दिक सिंह को आगामी विश्वकप और एशियाई खेलों में भारतीय हॉकी टीम के बहुत अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद.

राग और रागिनियों का उत्सवधर्मी मन

2 जुलाई 2026

संगीत का अनुरागी, जब संगीत का साहित्य रचने लगे तो वह साहित्यकार नहीं रह जाता, स्वयं राग, लय, छंद बन जाता है. यतीन्द्र सिर्फ संगीत के अनुरागी नहीं, संगीत के गहन जानकार हैं.

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