दीपाली ढींगरा
दिल्ली कंटेम्परेरी आर्ट वीक का नौवां संस्करण शुरू हो गया है. इस बार इसमें दिल्ली की छह ऐसी गैलरियां शामिल हैं, जिनका नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं. इनमें ब्लूप्रिंट.12, एग्जिबिट 320, गैलरी एस्पेस, लैटिट्यूड 28, श्राइन एम्पायर गैलरी और वधेरा आर्ट गैलरी शामिल हैं.
इस शोकेस में दक्षिण एशिया के स्थापित और उभरते कलाकारों को एक साथ लाया गया है जो पर्यावरण, पहचान, स्मृति और कला की सामग्री जैसे विषयों पर काम कर रहे हैं. इनके साथ अद्वैत सिंह और एनालिसा मनसुखानी की दो क्यूरेटोरियल प्रदर्शनियां भी वर्तमान समय को अलग-अलग नजरिए से देखने की कोशिश कर रही हैं.
एलटीसी बिल्डिंग में लगाई गई अद्वैत सिंह की क्यूरेटोरियल प्रदर्शनी ‘बाय-बाय मॉनसून’ लेखक अमिताव घोष की किताब ‘द ग्रेट डिरेंजमेंट’ से प्रेरित है. यह बदलते मानसूनी पैटर्न और जलवायु में हो रहे ऐतिहासिक बदलावों को समझने की कोशिश करती है.
सिंह का कहना है कि इस प्रदर्शनी में अमिताव घोष के सवाल को आधार बनाया गया है और कलाकारों से ‘मौसम की घटनाओं को शब्दों, दृश्य और ध्वनियों में दर्ज करने’ को कहा गया है. इसमें बॉम्बे के मैंग्रोव इकोसिस्टम से लेकर दक्षिण एशिया और अफ्रीका में बारिश के बदलते पैटर्न तक कई मुद्दों को समझने की कोशिश की गई है.
मनसुखानी की ‘दिस एनिमेट अर्थ’ प्रदर्शनी पौधों की दुनिया को ज्ञान और राजनीतिक भूगोल के एक क्षेत्र के तौर पर देखती है. वे बताती हैं कि उनका उद्देश्य ‘पौधों को सिर्फ खूबसूरती और अस्थायीपन के प्रतीक के तौर पर देखने तक सीमित न रहना, बल्कि उनके बढ़ने की प्रक्रिया को गहराई से समझना’ था.
इस प्रदर्शनी में पौधों के इतिहास को ‘साम्राज्य, जाति के सामाजिक अनुभव, आदिवासी अधिकारों और विकास की उन धारणाओं से जोड़ा गया है जिनमें प्राकृतिक संसाधनों का दोहन शामिल है.’
एग्जिबिट 320 की डायरेक्टर रसिका कजारिया का मानना है कि दिल्ली कंटेम्परेरी आर्ट वीक का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि "यह दिखाता है कि जब गैलरियां समकालीन कला को समर्थन देने के साझा लक्ष्य के साथ एकजुट होती हैं तो क्या कुछ संभव हो सकता है."
(दिल्ली कंटेम्परेरी आर्ट वीक 31 अगस्त से 5 सितंबर तक नई दिल्ली के बीकानेर हाउस में चल रहा है)

