देश में पहले की तुलना में महिलाएं अब ज्यादा कर्ज ले रही हैं. कर्ज लेने के मामले में महिलाओं ने पुरुषों को पीछे छोड़ दिया है. दिसंबर 2020 से दिसंबर 2025 के बीच कर्ज लेने वाली महिलाओं की संख्या 14.2 फीसद की वार्षिक औसत वृद्धि दर (CAGR) से बढ़कर 8.9 करोड़ तक पहुंच गई.
कर्ज लेने वाली महिलाओं की संख्या में यह वृद्धि पुरुषों की तुलना में काफी ज्यादा है. ऐसा इसलिए क्योंकि इन्हीं पांच सालों में कर्ज लेने वाले पुरुषों की संख्या 8.2 फीसद की दर से बढ़ी है. “द क्रेडिट गोज़ टू हर” नाम से जारी एक रिपोर्ट से यह जानकारी मिलती है.
यह रिपोर्ट दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों पर आधारित है और इसे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से अप्रूव्ड एक क्रेडिट ब्यूरो CRIF ने जारी किया है. 'पीयर-टू-पीयर' महिला-केंद्रित कर्ज देने वाली एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म है. इस प्लेटफॉर्म की संस्थापक नेहा जुनेजा कहती हैं कि इस रुझान की एक बड़ी वजह यह है कि आज पहले की तुलना में काफी ज्यादा महिलाओं के पास क्रेडिट स्कोर है, जिससे उन्हें कर्ज देना आसान हो गया है.
उनके मुताबिक, इसका बड़ा श्रेय माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री को जाता है, जिसने समाज के पिछड़े एवं कम आय वाली महिलाओं को वित्तीय सेवाएं प्रदान की हैं. इसके कारण महिलाओं का औपचारिक ऋण प्रणाली से जुड़ना आसान हो गया है.
माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री में यह मान्यता भी बढ़ रही है कि महिलाएं भरोसेमंद लोन लेने वाली होती हैं. ट्रांसयूनियन CIBL के आंकड़ों के मुताबिक, आमतौर पर महिलाओं का क्रेडिट स्कोर पुरुषों से बेहतर होता है. वे कर्ज लेने में ज्यादा सावधान रहती हैं और क्रेडिट का इस्तेमाल भी अधिक अनुशासन के साथ करती हैं.
पीयर-टू-पीयर की संस्थापक जुनेजा आगे बताती हैं कि वास्तव में, 2022 के बाद से कर्जदाताओं के जरिए जारी किए गए अधिकांश IPO गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) ने जारी किए हैं. इनमें कर्ज लेने वाली महिलाओं की संख्या अधिक है. इससे यह संकेत मिलता है कि अब महिला ग्राहकों को व्यावसायिक सफलता का महत्वपूर्ण कारक माना जाने लगा है. इसके उदाहरणों में क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण और मुथूट माइक्रोफिन जैसी कंपनियां शामिल हैं, जिन्होंने ग्रामीण भारत की महिलाओं को कर्ज देने में अहम भूमिका निभाई है.
इसी तरह सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक और उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक जैसे गैर-बैंकिंग वित्तीय संस्थान (NBFC) ने मुख्य रूप से देश की महिलाओं को कर्ज देने में अहम भूमिका निभाई. हालांकि, बाद में ये NBFC लघु वित्त बैंकों में परिवर्तित हो गए. जुनेजा कहते हैं, "माइक्रोफाइनेंस इंडस्ट्री में यह समझ बढ़ती जा रही है कि महिलाओं को सेवाएं प्रदान करने से ग्राहकों का आजीवन मूल्य बेहतर होता है. साथ ही अधिक वफादारी, अनुशासन और दीर्घकालिक संबंध भी बनते हैं."
इसमें कोई हैरानी नहीं कि नए क्रेडिट ग्राहकों (यानी पहली बार लोन लेने वालों) में भी महिलाओं की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है. दिसंबर 2023 में 33 फीसद से बढ़कर दिसंबर 2025 में 41 फीसद हो गई. इससे साफ पता चलता है कि ज्यादा महिलाएं अब औपचारिक क्रेडिट सिस्टम (बैंक/फाइनेंशियल संस्थानों से लोन) में शामिल हो रही हैं.
ये आंकड़े CRIF High Mark की रिपोर्ट से आए हैं. महिलाओं के पास कुल लोन राशि (पोर्टफोलियो आउटस्टैंडिंग) दिसंबर 2025 में साल-दर-साल 23.4 फीसद बढ़ी, जबकि पुरुषों में सिर्फ 16.7 फीसद की बढ़ोतरी हुई. महिलाओं के एक्टिव लोन (चालू लोन) की संख्या भी साल-दर-साल 14.8 फीसद बढ़ी, जो लोन लेने वाले पुरुषों की बढ़ोतरी से दोगुनी से ज्यादा है.
रिपोर्ट के मुताबिक, कुल रिटेल लोन पोर्टफोलियो (सुरक्षित और बिजनेस से जुड़े उत्पादों सहित) में अब महिलाओं की हिस्सेदारी 27.6 फीसद है. महिलाओं की सबसे ज्यादा हिस्सेदारी गोल्ड लोन में है, जो 43.5 फीसद है. उसके बाद एजुकेशन लोन में 36.7 फीसद और होम लोन में 32.2 फीसद है.
होम लोन में महिलाएं ओरिजिनेशन वैल्यू (नए लोन की कुल राशि) का 33.2 फीसद हिस्सा रखती हैं. उनका औसत लोन साइज (टिकट साइज) 33.9 लाख रुपए है, जो पुरुषों के 30.7 लाख रुपए से ज्यादा है. हालांकि, इसे सावधानी से देखना चाहिए, क्योंकि अक्सर टैक्स बचत के फायदे लेने के लिए लोन महिलाओं के नाम पर लिया जाता है.
महिलाओं के कुल लोन पोर्टफोलियो (आउटस्टैंडिंग) का 78.2 फीसद हिस्सा टॉप 10 राज्यों में है, जिनमें तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और केरल शामिल हैं. इससे साफ दिखता है कि दक्षिण भारत के राज्यों में महिलाएं लोन लेने में ज्यादा सक्रिय हैं.
महिलाएं अब बड़ी और बेहतर कारें खरीद रही हैं और उन्हें फाइनेंस (लोन) पर ले रही हैं. वे कुल ऑटो (कार) और टू-व्हीलर लोन में 18-19 फीसद हिस्सा रखती हैं. अप्रैल से दिसंबर FY26 (9 महीने) में ऑटो लोन की कुल राशि साल-दर-साल 10.1 फीसद बढ़ी और महिलाएं लगातार पुरुषों से औसतन ज्यादा लोन अमाउंट वाली कारें ले रही हैं.
महिलाएं कर्ज उतारने के मामले में पुरुषों से आगे हैं. महिलाओं में लोन डिफॉल्ट (देर से चुकाने या न चुकाने की दर, PAR 31-180) सिर्फ 2.8 फीसद है, जबकि पुरुषों में 3.3 फीसद है. एक चिंता यह थी कि महिलाएं बिजनेस लोन कम लेती हैं, लेकिन अब यह धारणा धीरे-धीरे बदल रही है. महिलाएं अब बिजनेस लोन की संख्या (वॉल्यूम) में 50.4 फीसद हिस्सा रखती हैं.
महिलाओं को सिक्योर्ड बिजनेस लोन देने के आंकड़े साल-दर-साल 61.1 फीसद बढ़े, जबकि अनसिक्योर्ड बिजनेस लोन में महिलाओं की हिस्सेदारी पिछले एक साल में 23.7 फीसद से बढ़कर 26.5 फीसद हो गई. हालांकि, महिलाओं का औसत लोन साइज अभी भी पुरुषों से कम है. महिलाओं का औसत लोन साइज 5.3 लाख रुपए, जबकि पुरुषों का 11.6 लाख रुपए है. इससे साफ है कि महिलाओं के जरिए चलाए जाने वाले बिजनेस में और विस्तार की गुंजाइश बची हुई है.

