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FCRA संशोधन विधेयक पर कैथोलिक बिशपों को क्यों है आपत्ति?

कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) ने अमित शाह से मुलाकात कर FCRA संशोधन विधेयक के कई प्रावधानों पर आपत्ति जताई. साथ ही मणिपुर हिंसा और ईसाई समुदाय से जुड़े अन्य मुद्दे भी उठाए

बिशपों ने FCRA पर नया विधेयक तैयार करने का अनुरोध किया है
अपडेटेड 16 जुलाई , 2026

कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ्रेंस ऑफ इंडिया (CBCI) के अध्यक्ष कार्डिनल पूला एंथनी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने 10 जुलाई को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की. प्रतिनिधिमंडल ने ईसाई समुदाय से जुड़े मुद्दे उठाए और विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 के विरोध में उन्हें एक ज्ञापन सौंपा.

प्रतिनिधिमंडल में CBCI के महासचिव आर्चबिशप अनिल जोसेफ थॉमस कूटो, उप महासचिव रेव. डॉ. मैथ्यू कोयिक्कल और अन्य सदस्य शामिल थे. उन्होंने मणिपुर में जातीय हिंसा का मुद्दा भी उठाया और शाह से राज्य में शांति सुनिश्चित करने की अपील की. साथ ही उन्होंने ईसाई धर्म अपनाने वाले कुछ समुदायों की संवैधानिक स्थिति का मुद्दा भी उठाया.

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक के संबंध में प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित संशोधन गरीबों के हितों के खिलाफ हैं. ज्ञापन में कहा गया है कि विधेयक के प्रावधान समाज के बड़े वर्गों के कल्याण के लिए काम करने वाले संगठनों पर प्रतिकूल असर डालेंगे.

CBCI ने अनुरोध किया कि नया विधेयक तैयार किया जाए और उसे केवल भविष्य के मामलों पर लागू किया जाए. संगठन ने कहा कि नए कानून के तहत निर्णय लेने के लिए नियुक्त अधिकारी न्यायिक अधिकारी होना चाहिए ताकि उसकी स्वतंत्रता और निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके. संपत्तियों का निपटान, हस्तांतरण या अधिग्रहण तभी किया जाना चाहिए जब सभी अपीलों की प्रक्रिया पूरी हो जाए. छोटी और बड़ी चूकों में अंतर किया जाना चाहिए और मामूली चूकों पर कठोर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए.

CBCI ने मांग की कि विधेयक से 'प्रोसिलिटाइजेशन' (धर्मांतरण के लिए प्रेरित करना) शब्द हटाया जाए, क्योंकि इसके दुरुपयोग की आशंका है. संगठन ने कहा, "इस तरह की सभी मानवीय और परोपकारी गतिविधियां केवल राष्ट्र निर्माण और जनकल्याण के लिए होती हैं. इन्हें धार्मिक धर्मांतरण के प्रयास के रूप में नहीं समझा जाना चाहिए." संगठन ने यह भी कहा कि विधेयक के पूर्व प्रभाव से लागू होने वाले और खुले प्रावधान परोपकारी गतिविधियों के लिए मिलने वाली वैध विदेशी फंडिंग को हतोत्साहित कर सकते हैं. इससे भारत के विकास क्षेत्र पर असर पड़ेगा और इसका बोझ समाज के वंचित वर्गों पर भी पड़ेगा.

CBCI ने विभिन्न राज्यों में 'धर्मांतरण विरोधी' कानूनों के तहत ईसाइयों पर हमलों और उनके खिलाफ दर्ज मामलों का मुद्दा भी उठाया. संगठन ने कहा कि संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश, 1950 के तहत अनुसूचित जाति समुदायों के जो सदस्य ईसाई धर्म अपना लेते हैं, वे अपनी अनुसूचित जाति की मान्यता खो देते हैं. इस प्रावधान को 2004 से सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. संगठन ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए कि इस मामले की जल्द सुनवाई हो और फैसला आए.

CBCI ने शाह से मणिपुर में स्थाई शांति सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करने की अपील की. संगठन ने कहा कि हिंसा के कारण कई लोग बेघर हो गए हैं और अनेक लोगों को अपनी जमीन छोड़कर दिल्ली सहित अन्य राज्यों में पलायन करना पड़ा है. ज्ञापन में कहा गया, "अंत में, हम भारत के संविधान के दायरे में राष्ट्र निर्माण के लिए भारत सरकार के सभी प्रयासों के साथ मजबूती से खड़े रहने का संकल्प लेते हैं."

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