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पावर बैंक क्यों हैं हवाई जहाजों के लिए बड़ा खतरा?

पिछले दिनों पावर बैंक के कारण एक इंडिगो प्लेन में लगने वाली आग तो जल्दी बुझा दी गई, लेकिन ऐसी घटनाएं हमेशा तब नहीं होतीं जब प्लेन लैंडिंग के बाद रनवे पर हो

सांकेतिक तस्वीर
सांकेतिक तस्वीर
अपडेटेड 14 मई , 2026

बीते दिनों नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) के जरिए पावर बैंक को लेकर लिया गया फैसला बिल्कुल सही था. अक्टूबर 2025 में दिल्ली-दिमापुर इंडिगो फ्लाइट में पावर बैंक में आग लगने के बाद उसी महीने DGCA ने फ्लाइट के अंदर पावर बैंक से चार्जिंग करना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया था.

DGCA ने निर्देश दिया था कि पावर बैंक हमेशा हैंड बैग (carry-on luggage) में ही रखे जाएं और उन्हें ऊपर वाले ओवरहेड कंपार्टमेंट में कभी न रखा जाए. यह नियम 5 मई को फिर चर्चा में आ गया, जब हैदराबाद से चंडीगढ़ आ रही इंडिगो फ्लाइट 6E-108 लैंडिंग के बाद रनवे पर थी. उसी समय विमान में बैठे एक यात्री के पावर बैंक में अचानक आग लग गई.

फिर केबिन भी आग की जद में आया लेकिन तुरंत इस पर काबू पा लिया गया. कुछ ही मिनटों में सभी 198 यात्री और छह चालक दल के सदस्य सुरक्षित बाहर निकल गए. अतीत की घटनाओं से लेकर इस मामले तक एक बात साफ है कि हवाई यात्रा में पावर बैंक का इस्तेमाल बार-बार जोखिम भरा साबित हुआ है.

हालांकि, विमान के केबिन में इन उपकरणों को अनुमति देने का कारण नियमों में कोई ढिलाई नहीं है; बल्कि यह एक सोच-समझकर लिया गया निर्णय है. दरअसल, यह फैसला सितंबर 2010 में दुबई के ऊपर हुई एक हवाई दुर्घटना से प्रेरित है. उस दुर्घटना में UPS एयरलाइंस के एक मालवाहक विमान के कार्गो में रखी लिथियम बैटरियों में आग लग गई थी, जिससे विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस घटना में चालक दल के दोनों सदस्यों की मौत हो गई थी.

आग लगने की जांच में यह बात सामने आई कि लिथियम बैटरियों के ज्यादा गर्म होने के कारण आग लगी थी. दरअसल, लिथियम बैटरी में थर्मल रनअवे की स्थिति पैदा हो गई. यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें बैटरी का तापमान एक सीमा से ऊपर जाने पर रासायनिक स्थिरता खो देता है. इसमें एक बैटरी गर्म होकर आस-पास की बैटरियों को भी आग लगा देती है.

इसके बाद ही अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) ने प्लेन के नीचे सामान वाले हिस्से (कार्गो) में खुली लिथियम बैटरियां ले जाने पर और ज्यादा सख्त नियम लगा दिए. ऐसा इसलिए क्योंकि कार्गो होल्ड में आग लगना जानलेवा और बेकाबू होता है, जबकि केबिन में ऐसी स्थिति का पता लगाकर उसे बुझाया जा सकता है. इसलिए, यात्रियों के लिए पावर बैंक साथ रखना अनिवार्य है.

इंडिगो की फ्लाइट 6E-108 में इस्तेमाल होने वाला एयरबस A321 विमान लगभग 222 यात्रियों को ले जा सकता है. ICAO और अंतर्राष्ट्रीय हवाई परिवहन संघ (IATA) दोनों ही यात्रियों के लिए हैंडबैग में दो पावर बैंक ले जाने की अनुमति देते हैं. नियम मुताबिक, पूरी तरह से भरी हुई फ्लाइट में केबिन में 444 लिथियम-आयन बैटरी हो सकती हैं.

हालांकि, पावर बैंक को लेकर जो नियम बनाए गए हैं, वे बंद और दबाव वाले वातावरण यानी एयरक्राफ्ट के केबिन में जमा होने वाले कुल थर्मल जोखिम (गर्मी का खतरा) को नजरअंदाज कर रहे हैं. 2009 में अमेरिका की फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने एयरलाइंस ऑपरेटर्स के लिए लिथियम बैटरी से आग लगने के खतरे की चेतावनी जारी की थी.

फिर 2019 में FAA ने यात्रियों के जरिए ले जाए जाने वाली लिथियम डिवाइसों के सभी जोखिमों का पता लगाया. 2022 में यूरोपीय संघ विमानन सुरक्षा एजेंसी (EASA) ने सीट के पास या सीट में लिथियम डिवाइस रखने के संबंध में अपनी सुरक्षा सूचना जारी की.

भारत के नियम वॉट और घंटा के हिसाब से बने हैं. 100 Wh तक के पावर बैंक को कैरी-ऑन बैग में बिना अनुमति के रखने की अनुमति हैं. 100 से 160 Wh तक के लिए एयरलाइंस से अनुमति लेनी पड़ती है. वहीं, 160 Wh से ऊपर वाले बिल्कुल नहीं ले जा सकते.

इतना ही नहीं, 100 Wh से कम वाले पावर बैंक भी फ्लाइट में इस्तेमाल और रखने के नियमों का पालन करना पड़ता है. मुख्य समस्या यह है कि Wh की संख्या सिर्फ डिवाइस पर लिखी होती है. सुरक्षा स्कैनर उसे नहीं पढ़ पाते. भारतीय एयरपोर्ट पर Wh चेक करने की कोई तय प्रक्रिया नहीं है. सब कुछ यात्री पर निर्भर है कि उन्हें खुद पढ़कर बताना होता है कि उनका पावर बैंक तय सीमा के अंदर है या नहीं.

कुछ एयरलाइंस साफ-साफ बताती हैं कि केबिन में पावर बैंक कहां रखना चाहिए. हांगकांग की एयरलाइन कैथे पैसिफिक, UAE की प्रमुख एयरलाइन एमिरेट्स और सिंगापुर एयरलाइंस ने यात्रियों को सलाह दी है कि पावर बैंक को सीट की जेब में न रखें, क्योंकि वहां की फोम कुशनिंग जलने वाली सामग्री से बनी होती है.

इंडिगो की स्टैंडर्ड सुरक्षा ब्रिफिंग में यह सलाह शामिल नहीं है. केवल DGCA ही बता सकता है कि क्या यह एयरलाइंस के लिए जरूरी था, क्योंकि DGCA ही एयरलाइंस के ऑपरेशन मैनुअल को मंजूरी देता है. 5 मई को इंडिगो के क्रू ने आग बुझाने वाले यंत्रों का इस्तेमाल करने के बाद इमरजेंसी स्लाइड्स निकालकर विमान से सभी यात्रियों को निकाल लिया, जिससे कई जिंदगियां बच गईं. समस्या यह है कि ऐसी घटनाएं हमेशा प्लेन के रनवे पर उतरने के बाद नहीं होती है.

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