प्रधानमंत्री ने सभी केंद्रीय मंत्रियों को उनके मंत्रालयों में 2024 से लेकर अब तक हुए सुधारों पर एक रिपोर्ट बनाने के लिए कहा है. इस रिपोर्ट का संक्षिप्त सारांश (Brief Summary) सभी मंत्रियों को 2 मार्च तक कैबिनेट सचिवालय को दे देना है. दरअसल, नए प्रधानमंत्री कार्यालय यानी 'सेवा तीर्थ' में 24 फरवरी को पहली बार कैबिनेट मीटिंग हुई थी.
इस मीटिंग का कोई सीधा या खास एजेंडा नहीं था. कुछ ऐसे विषय थे जिनमें बहुत ज्यादा बातचीत की आवश्यकता नहीं थी, इसलिए मंत्रियों को उम्मीद थी कि यह बैठक एक घंटे से भी कम समय में समाप्त हो जाएगी. हालांकि, सूत्र बताते हैं कि यह बैठक तकरीबन तीन घंटे तक चली.
कैबिनेट एजेंडे को निपटाने के बाद प्रधानमंत्री ने सरकार के विभिन्न मंत्रालयों में सुधारों पर लंबी बातचीत की. भले ही प्रधानमंत्री ने मंत्रियों से यह रिपोर्ट सुधारों के बारे में मांगी हो, लेकिन केंद्रीय मंत्रियों को लग रहा है कि एक तरीके से यह उनका रिपोर्ट कार्ड होगा. प्रधानमंत्री के इस निर्देश के बाद मंत्रियों के बीच एक बार फिर यह अटकल तेज हो गई है कि इस रिपोर्ट के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल हो सकता है. पहले से भी यह कयास लगाए जा रहे हैं कि फेरबदल मई या जून में होगा.
दरअसल, कुछ ऐसी ही कवायद 2021 में भी की गई थी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूसरे कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने के बाद सभी मंत्रियों से रिपोर्ट कार्ड मांगा गया था. प्रधानमंत्री ने हर मंत्री के साथ बैठकर रिपोर्ट कार्ड की समीक्षा की थी. इसके बाद जुलाई 2021 में मंत्रिमंडल में फेरबदल किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में मंत्रियों को मंत्रिमंडल से बाहर का रास्ता दिखाया गया था.
इस बार भी यह रिपोर्ट कार्ड उस समय मांगा गया है जब मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल के दो वर्ष पूरे करने के करीब है. इसलिए इस बार भी अटकलें लगाई जा रही हैं कि इसके आधार पर ही मंत्रियों के कामकाज का मूल्यांकन होगा और मंत्रिमंडल में फेरबदल से संबंधित निर्णय लिया जाएगा.
इस बार कैबिनेट सचिवालय ने सभी मंत्रालयों को 2 मार्च तक संक्षिप्त सारांश जमा करने को कहा है. सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट बैठक के बाद कई मंत्रियों ने तुरंत अपने अधिकारियों को बुलाकर रिपोर्ट तैयार करने का काम शुरू कर दिया है. कैबिनेट सचिवालय ने इस रिपोर्ट के लिए एक स्टैंडर्ड टेम्प्लेट जारी किया है. इसके तहत हर मंत्रालय को चार श्रेणियों में सुधारों का ब्योरा देना है, जिनमें विधायी सुधार, नियमावली सुधार, नीतिगत सुधार और प्रशासनिक सुधार शामिल हैं.
हर सुधार के साथ उसका प्रभाव बताना अनिवार्य है. मसलन, यह बताना होगा कि कितने लोगों को फायदा हुआ, किसी काम को पूरा करने में अब कितना कम समय लगता है, कितना खर्च बचा और ईज ऑफ लिविंग या ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में कितना सुधार हुआ आदि.
24 फरवरी की बैठक के बारे में एक सूत्र ने बताया कि कैबिनेट बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई और दोपहर दो बजे के करीब खत्म हुई. शुरू में कुछ नियमित प्रस्ताव पास हुए, फिर पीएम मोदी ने ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ को और तेज करने पर जोर दिया. उन्होंने मंत्रियों से कहा कि आपने दो सालों में क्या रिफॉर्म किए हैं और अगले कुछ महीनों में कौन-कौन से सुधार करने वाले हैं, उनका पूरा ब्योरा दीजिए.
इस कैबिनेट बैठक में ‘सेवा संकल्प प्रस्ताव’ भी पढ़ा गया, जिसे सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पढ़ा. इसमें कहा गया, "सेवा तीर्थ में हर फैसला 140 करोड़ नागरिकों की सेवा की भावना से प्रेरित होगा. यह सत्ता का प्रदर्शन नहीं बल्कि सशक्तिकरण का केंद्र बनेगा." प्रस्ताव में संविधान की मूल भावना, पारदर्शिता और जवाबदेही पर जोर दिया गया.

