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AI समिट के दौरान यूथ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर संसदीय समिति में कैसे हुई बहस?

AI समिट में यूथ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन को लेकर संसद की एक स्थाई समिति ने निंदा प्रस्ताव पारित किया है. इससे पहले बैठक में क्या-क्या हुआ, इसकी इनसाइड स्टोरी

AI समिट के दौरान यूथ कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन
अपडेटेड 25 फ़रवरी , 2026

कल यानी फरवरी की 24 तारीख को संचार और सूचना प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थाई समिति की बैठक थी. यह बैठक आज भी चल रही है. भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद निशिकांत दुबे इसके अध्यक्ष हैं. इस बैठक का एजेंडा था संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के लिए बजट मांगों पर चर्चा करना.

लेकिन इस मीटिंग में कल एक प्रस्ताव पारित हुआ. इस प्रस्ताव में AI समिट के आयोजन के लिए सरकार की सराहना की गई और यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने टी-शर्ट उतारकर जो विरोध प्रदर्शन किया था, उसके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया. इस प्रस्ताव में 20 फरवरी को भारत मंडपम में हुए युवा कांग्रेस के 'शर्टलेस' विरोध को 'दुर्भाग्यपूर्ण घटना' करार दिया गया.

इस प्रस्ताव को पारित कराने के लिए समिति में बाकायदा वोटिंग करानी पड़ी. इस संसदीय समिति के एक सदस्य इस बारे में बताते हैं, ''जिस समय वोटिंग हुई, उस समय कुल 14 सांसद मौजूद थे. इनमें से आठ ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया और छह ने विरोध में.'' पक्ष में मतदान करने वाले सारे सांसद BJP के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के हैं. वहीं विरोध करने वाले सांसद कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी), समाजवादी पार्टी और डीएमके के हैं.

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पहले अपने एक सार्वजनिक बयान में यूथ कांग्रेस के विरोध करने के तरीके पर सवाल उठाया था. लेकिन जब इसी विषय पर संसदीय समिति में वोटिंग की बारी आई तो उनकी पार्टी के सांसद देवेश शाक्य ने अखिलेश यादव से अलग लाइन ली और उन्होंने निंदा प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया.

इस समिति के सदस्यों के मुताबिक समिति की बैठक मंगलवार को सुबह करीब 11 बजे शुरू हुई. एजेंडा बजट मांगों पर चर्चा का था. लेकिन जैसे ही बैठक शुरू हुई, BJP के राज्यसभा सांसद और उत्तर प्रदेश BJP के महासचिव अमरपाल मौर्य ने एक प्रस्ताव पेश कर दिया. प्रस्ताव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 16 से 20 फरवरी तक हुई इंडिया AI इम्पैक्ट समिट की 'शानदार सफलता” की सराहना की गई. इसमें कहा गया कि 91 देशों और प्रमुख कंपनियों ने समावेशी AI विकास पर नई दिल्ली घोषणापत्र अपनाया. कंपनियों ने भारत में 200 अरब डॉलर से ज्यादा AI निवेश की घोषणा की. गूगल ने बड़ा डेटा सेंटर लगाने और भारत-अमेरिका के बीच सीधा समुद्री केबल बिछाने का वादा किया.

यह प्रस्ताव सिर्फ उपलब्धियों तक सीमित नहीं रहा. बल्कि इसमें 20 फरवरी को समिट के आयोजन स्थल पर हुई 'दुर्भाग्यपूर्ण घटना' की निंदा की बात भी कही गई. इस प्रस्ताव में यूथ कांग्रेस का नाम नहीं लिया गया. लेकिन सदस्यों के बीच यह बात साफ थी कि इसका संदर्भ यूथ कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन से ही है.

जब यह प्रस्ताव पेश किया गया तो विपक्षी सदस्यों ने तुरंत आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि समिति राजनीतिक मंच नहीं है. कांग्रेस सांसद शफी परांबिल ने पूछा कि क्या यह औपचारिक प्रस्ताव है? तृणमूल कांग्रेस के सांसद सकेत गोखले, शिवसेना (यूबीटी) की प्रियंका चतुर्वेदी और समाजवादी पार्टी के देवेश शाक्य ने कहा कि अगर विरोध की निंदा करनी है तो समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी की तरफ से चीन के रोबोट को खुद का बताने वाली घटना का भी जिक्र होना चाहिए.

इस निंदा प्रस्ताव को पारित कराने के लिए वोटिंग कराने में भी काफी मशक्कत हुई. जब यह प्रस्ताव आया तो उस समय मौजूद सदस्यों के बीच BJP के पास पर्याप्त संख्या नहीं थी. इसलिए प्रस्ताव पर वोटिंग टल गई. बाद में और BJP सांसद पहुंच गए. इसके बाद समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने प्रस्ताव पर वोटिंग कराई. इसमें 8-6 से निंदा प्रस्ताव पारित हुआ. कुछ विपक्षी सदस्यों ने असहमति का नोट भी सौंपा.

विपक्षी पार्टियों के सदस्यों की तरफ से सत्ता पक्ष के सांसदों पर यह आरोप लगाया गया कि वे संसद की स्थाई समिति का राजनीतिकरण कर रहे हैं. संसदीय नियमों के जानकार यह बता रहे हैं कि टेक्नीकली स्टैंडिंग कमेटी चर्चा के लिए कोई भी मुद्दा ले सकती है, बशर्ते वह उसके विषय से संबंधित हो और 'सेंस ऑफ दि हाउस' उसके पक्ष में हो. इसलिए यह विषय लेना तकनीकी तौर पर कमेटी के मैंडेंट के खिलाफ नहीं है. एक दलील यह भी दी जा रही है कि AI इंपैक्ट समि​ट संचार और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने ही आयोजित कराई थी और यह समिति इसी विषय की है.

24 फरवरी की बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष निशिकांत दुबे ने ट्विटर पर प्रस्ताव की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा- हम गुंडागर्दी के खिलाफ हैं. दुबे इस बारे में कहते हैं, ''जब सत्र शुरू हुआ, BJP के एक वरिष्ठ सदस्य ने कहा कि पहले इस पर चर्चा होनी चाहिए… हमने पीएम की तारीफ की, गूगल के 200 अरब डॉलर के निवेश की सराहना की और जो शोर मचाने वाले थे, उनकी निंदा की.''

इस प्रस्ताव को पेश करने वाले BJP सांसद अमरपाल मौर्य कहते हैं, ''प्रस्ताव उस घटना की निंदा करने के लिए था जिसने देश की छवि खराब करने की कोशिश की और यह किसी पार्टी के खिलाफ नहीं था. सभी को इसका समर्थन करना चाहिए था. असल में, जिन्होंने समर्थन नहीं किया वे इस विषय पर राजनीति कर रहे थे.''

विपक्षी शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी इस विषय पर कहती हैं, ''हम AI समिट की पूरी सराहना करते हैं लेकिन स्थाई समिति का मंच ऐसी असहमतियों को हवा देने के लिए नहीं है. यह समन्वय का मंच है, टकराव का नहीं.''

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