
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हुए एयर वॉर ने एक ऐसी सच्चाई को सामने ला खड़ा किया जिसे लंबे समय से नजरअंदाज किया जा रहा था. भारतीय डिफेंस लाइन को 'बैटल हार्डेन' (जंग में परखी जा चुकी) माना जाता है.
लेकिन, इस हवाई जंग ने यह भी साबित किया कि युद्ध सिर्फ साहस और रणनीति से नहीं बल्कि स्टॉक और सप्लाई से भी जीता जाता है. अब जबकि इस संघर्ष को एक साल पूरा हो चुका है यह जानना और भी जरूरी हो जाता है कि इस एक साल में भारतीय रक्षा प्रणाली में क्या-क्या बदलाव हुए? कितनी तेजी से फैसले लिए गए? और जमीन पर क्या सुधार दिखे?
चिंता का सबब
एयर वॉर के दौरान भारत के सबसे भरोसेमंद हथियारों में से एक रूसी एयर डिफेंस सिस्टम S-400 था. यह सिस्टम दुश्मन के मिसाइल और फाइटर जेट्स को दूर से ही नष्ट करने की क्षमता रखता है. लेकिन इसकी सीमित यूनिट्स एक बड़ी चिंता का सबब बनकर सामने आईं. साफ था कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता तो भारत को स्टॉक और सप्लाई की चुनौती का सामना करना पड़ सकता था.
सिर्फ S-400 ही नहीं, कई अहम रक्षा सौदे जैसे कि अपाचे हेलीकॉप्टर और फाइटर जेट्स या तो अधर में थे या उनकी डिलीवरी में देरी हो रही थी. इस अनुभव ने यह स्पष्ट कर दिया कि आधुनिक युद्ध में सिर्फ ताकतवर हथियार होना काफी नहीं बल्कि उनका पर्याप्त और लगातार उपलब्ध रहना भी उतना ही जरूरी है.

एक साल में क्या-क्या बदला?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बीते एक साल में भारत ने अपने वेपन सिस्टम को अभूतपूर्व तरीके से मजबूत किया. इमरजेंसी खरीद और डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल की मंजूरियों के जरिए 15 से 20 नई श्रेणियों के हथियार सिस्टम शामिल किए गए. इनमें पिनाका रॉकेट रेजिमेंट, अपाचे अटैक हेलीकॉप्टर, 97 तेजस Mk-1A फाइटर जेट, लगभग 850 ड्रोन और S-400 जैसी एयर डिफेंस क्षमताएं प्रमुख हैं.
इसके साथ ही 8 से 10 पुराने और पहले से तैनात सिस्टम्स को भी अपग्रेड या मॉडिफाई किया गया. इनमें Su-30MKI फाइटर जेट, T-90 टैंक और S-400 जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं. इन मॉडिफिकेशन का मकसद केवल क्षमता बढ़ाना नहीं बल्कि उन्हें बदलती युद्ध तकनीकों के अनुरूप ढालना था.
ऑपरेशन के दौरान ब्रह्मोस, स्कैल्प और हैमर जैसी मिसाइलों के साथ स्वदेशी ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम ने जिस तरह प्रदर्शन किया उसने यह भी दिखा दिया कि भारत के पास मजबूत आधार मौजूद है, जिसे और विस्तार देने की जरूरत है.
इमरजेंसी पावर का असर
इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह रही इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट पावर का इस्तेमाल. सरकार ने करीब ढाई दशक बाद इस विशेष प्रावधान को सक्रिय किया, जिससे खरीद प्रक्रिया को तेज किया जा सके. डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने हजारों करोड़ रुपए के प्रस्तावों को मंजूरी दी और बड़ी संख्या में डील्स को तेजी से क्लोज किया गया.
इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के तहत 40,000 करोड़ रुपए से ज्यादा के हथियार सीधे खरीदे गए. इसके अलावा जुलाई 2025 में ही करीब 1.05 लाख करोड़ रुपए के 10 बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई. इनमें आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, सरफेस-टू-एयर मिसाइल और ट्राई-सर्विस इन्वेंटरी मैनेजमेंट सिस्टम जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट शामिल थे.

दिसंबर 2025 तक करीब 8.78 बिलियन डॉलर यानी लगभग 73,000 करोड़ रुपए के अतिरिक्त प्रस्ताव भी पास किए जा चुके थे. यह साफ संकेत था कि भारत अब रक्षा तैयारियों को लेकर किसी भी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है.
बदलती युद्ध रणनीति की झलक
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान एक और अहम बात सामने आई. पाकिस्तान के चीनी मूल के एयर डिफेंस सिस्टम को भारतीय हथियारों ने प्रभावी तरीके से निष्क्रिय कर दिया. इसीलिए इस एक साल में ड्रोन, लंबी दूरी की मिसाइल, एयर डिफेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर पर विशेष जोर दिया गया.
सर्विलांस से लेकर अटैक तक, ड्रोन की भूमिका को बढ़ाया गया जबकि एंटी-ड्रोन सिस्टम पर भी तेजी से निवेश हुआ. कम्युनिकेशन और डेटा नेटवर्क को भी मजबूत किया गया ताकि युद्ध के दौरान सूचना की गति में किसी तरह की कोई बाधा ना आए.

रणनीतिक सोच में बदलाव
इस पूरे घटनाक्रम ने भारत की रक्षा नीति में एक स्पष्ट बदलाव दिखाया है. अब फोकस केवल भविष्य की योजनाओं पर नहीं बल्कि वर्तमान की तैयारी पर भी है. जहां पहले रक्षा सौदों में सालों लग जाते थे अब वही काम महीनों और हफ्तों में पूरा करने की कोशिशें सरकार की तरफ से दिखाई दे रही हैं.
रक्षा सौदों में तेजी से एक बदलाव यह भी दिखाई दे रहा है कि भारतीय रक्षा प्रणाली अपेक्षाकृत अधिक लचीली हुई है और अपनी जरूरत के अनुसार तेजी से निर्णय लिए जा रहे हैं. हालांकि, इस प्रक्रिया के साथ कुछ जोखिम भी जुड़े हैं जैसे पारदर्शिता में कमी या सीमित मोलभाव का अवसर. लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि गति और तत्परता को प्राथमिकता दी जाएगी.

आगे की राह
ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद की यह तस्वीर बताती है कि भारत ने अपने अनुभवों से सीखते हुए रक्षा तैयारियों को तेज किया है. अब रणनीति दो स्तरों पर काम कर रही है, एक तरफ इमरजेंसी खरीद के जरिए तत्काल जरूरतों को पूरा किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देकर ऐसी मजबूती सुनिश्चित की जा रही है जिसका दूर तक और देर तक असर दिखाई दे.
भारत पाकिस्तान के बीच हुए हवाई हमलों के बाद भारत की तरफ से रक्षा सौदों को तेजी से पूरा करने और स्वदेशी रक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के बाद आने वाले समय में भारत किसी भी बाहरी खतरे से निबटने में अधिक समर्थ दिखाई देगा.

