साल 2023-24 में आयोजित किया गया राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6) भारत के स्वास्थ्य की सबसे व्यापक तस्वीर पेश करता है. केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय की तरफ से मुंबई स्थित अंतरराष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (IIPS) को नोडल एजेंसी बनाकर यह सर्वे कराया गया. इस सर्वे से स्वास्थ्य और जनसांख्यिकीय यानी डेमोग्राफिक रुझानों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां पता चलती हैं.
NFHS-6 मातृ देखभाल, टीकाकरण और पोषण के क्षेत्र में भारत की प्रगति की पुष्टि करता है. यह साथ ही गैर-संक्रामक रोगों की ओर एक बड़े जनसांख्यिकीय और महामारी विज्ञान संबंधी बदलाव का संकेत भी देता है. इससे भविष्य में रोकथाम वाली स्वास्थ्य सेवाओं और जीवनशैली पर आधारित उपायों का महत्व और बढ़ जाएगा. नई दिल्ली के सी.के. बिड़ला अस्पताल की इंटरनल मेडिसन निदेशक डॉ. मनीषा अरोड़ा ने सर्वेक्षण के सबसे प्रमुख निष्कर्षों पर डॉक्टर का नजरिया साझा किया है.
मातृ और बाल स्वास्थ्य में मजबूत सुधार
सबसे उत्साहजनक निष्कर्षों में से एक मातृ और बाल स्वास्थ्य इंडिकेटर्स में सुधार है. अस्पतालों में डिलेवरी का प्रतिशत 88.6 से बढ़कर 90.6 हो गया. वहीं, चार या उससे अधिक प्रसवपूर्व देखभाल जांच प्राप्त करने वाली माताओं का प्रतिशत 58.5 से बढ़कर 65.2 हो गया. बच्चों के टीकाकरण ने भी नया स्तर हासिल किया है. 12-23 महीने आयु वर्ग के बच्चों में पूर्ण टीकाकरण कवरेज 83.8 से बढ़कर 87.1 प्रतिशत हो गया. खास बात यह है कि 95.6 प्रतिशत बच्चों को सरकारी संस्थानों के माध्यम से टीके लगाए गए.
बेहतर पोषण लेकिन आहार की गुणवत्ता चिंता का विषय
दीर्घकालिक पोषण इंडिकेटर्स में सुधार देखा गया. पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में अवरुद्ध वृद्धि यानी स्टंटिंग का प्रतिशत 35.5 से घटकर 29.3 हो गया. जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराने का प्रतिशत 41.8 से बढ़कर 50.1 हो गया. हालांकि कुछ चेतावनी देने वाले संकेत भी बने हुए हैं. छह महीने तक केवल स्तनपान कराने का प्रतिशत 63.7 से घटकर 55.8 हो गया. वहीं 6-23 महीने आयु वर्ग के केवल 15.1 प्रतिशत बच्चों को पर्याप्त आहार मिला.
प्रजनन दर स्थिर हुई
भारत की कुल प्रजनन दर (TFR) 2.0 पर स्थिर रही, जो 2.1 के प्रतिस्थापन स्तर या रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे है. वहीं, गर्भनिरोधक उपयोग दर 66.7 प्रतिशत से बढ़कर 69.1 प्रतिशत हो गई. यह फैमिली प्लानिंग और प्रजनन स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगातार प्रगति का संकेत है.
उभरती चुनौतियां
NFHS-6 गैर-संक्रामक रोगों के बढ़ते बोझ को भी रेखांकित करता है. 15-49 वर्ष आयु वर्ग की महिलाओं में अधिक वजन और मोटापे का प्रतिशत 24 से बढ़कर 30.7 हो गया. शहरी क्षेत्रों में यह 42.8 प्रतिशत तक पहुंच गया. पुरुषों में यह 22.9 से बढ़कर 27.9 प्रतिशत हो गया. ब्लड शुगर का स्तर भी बढ़ा है. यह 20.9 प्रतिशत पुरुषों और 17.8 प्रतिशत महिलाओं को प्रभावित कर रहा है. इसकी व्यापकता शहरी भारत में अधिक है.
गायब इंडिकेटर
NFHS-6 की फैक्ट शीट में रिपोर्ट किए गए इंडिकेटर्स की संख्या 131 से घटाकर 101 कर दी गई है. हटाए गए इंडिकेटर्स में एनीमिया, जन्म के समय लिंगानुपात, शिशु और बाल मृत्यु दर, स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन, स्वच्छता, HIV संबंधी जानकारी और परिवार नियोजन सेवाओं की गुणवत्ता शामिल हैं. एनीमिया को उंगली से रक्त की बूंद लेकर किए जाने वाले हीमोग्लोबिन परीक्षण की सटीकता को लेकर चिंताओं के कारण हटाया गया. हालांकि, कई अन्य महत्वपूर्ण इंडिकेटर्स की अनुपस्थिति ने सवाल खड़े कर दिए हैं.

