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खेला होबे! सरकारी नियमों से गेमिंग इंडस्ट्री को कितनी राहत मिलेगी?

नए नियमों ने ऑनलाइन गेम्स की श्रेणियां तय कर अनिश्चितता खत्म कर दी है. अब सुरक्षित और स्पष्ट दायरे के साथ डिजिटल मैदान में सही मायने में गेमिंग चलेगी

सांकेतिक फोटो (Photo : AI)
अपडेटेड 26 अप्रैल , 2026

ऑनलाइन गेम्स पर अब सरकार की तरफ से स्पष्टता आ गई है. इसका निचोड़ यह है कि "खेला होबे" यानी कि खेल होगा. नए नियमों ने ऑनलाइन जुए और सट्टे वाले गेम्स को पहले की तरह प्रतिबंधों के दायरे में रखा है, लेकिन पार्टिसिपेशन फीस और इनाम वाले गेम्स को रजिस्ट्रेशन के दायरे में रखा गया है. 

यह इस बात का संकेत है कि सरकार ने पैसा शामिल करने वाले ऑनलाइन गेम्स को सीमित दायरे में अनुमति दी है. जाहिर है कि ये नियम गेमिंग के प्रमोटर, डेवलपर और प्लेयर, तीनों को राहत देते हैं. ये गेम्स 'ऑरेंज इकोनॉमी' के मुख्य घटक हैं और फिलहाल इनको लेकर सरकार का रुख उदार दिख रहा है. 

हालांकि, इन नियम-कानूनों का मकसद युवाओं को रियल मनी गेमिंग के आर्थिक नुकसान और मनोवैज्ञानिक प्रभावों से बचाना था. पाबंदी से पहले सैकड़ों लोग ऑनलाइन रियल मनी गेम्स में अपनी पूंजी गंवाकर बर्बाद हो गए और आत्महत्या के भी कई मामले सामने आए थे.

बहरहाल, ऑनलाइन गेम्स इंडस्ट्री का पूरा प्रशासनिक ढांचा तैयार हो गया है. केंद्र सरकार अगस्त 2025 में 'प्रमोशन एंड रेगुलेशन ऑफ ऑनलाइन गेमिंग एक्ट' लागू कर चुकी थी. अब इसके नियम आ चुके हैं, जो 1 मई से लागू हो जाएंगे. सरकार ने 'ऑनलाइन गेमिंग अथॉरिटी' भी बनाई है, जो ई-स्पोर्ट्स का रजिस्ट्रेशन करेगी और इस पूरी इंडस्ट्री को नियंत्रित करेगी. 

मुख्य रूप से तीन तरह के ऑनलाइन गेम्स हैं. सोशल और एजुकेशनल गेम्स, जिनमें किसी तरह का पैसा शामिल नहीं है, उनके लिए रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है. ई-स्पोर्ट्स को रजिस्ट्रेशन कराना होगा, क्योंकि इनमें पार्टिसिपेशन फीस और इनाम दिया जाता है. तीसरे यानी रियल मनी गेम्स पर पाबंदी रहेगी. नियमों के मुताबिक, सरकार तय करेगी कि आपका गेम किस कैटेगरी में आएगा. हालांकि इसमें एक विरोधाभास भी है. एक तरफ सरकार कहती है कि पैसे को बैन करेगी, लेकिन वह ई-स्पोर्ट्स को बढ़ावा देगी जहां पैसे का इस्तेमाल हो रहा है.

रजिस्ट्रेशन 10 साल के लिए होगा. प्रशासनिक ढांचे में अपील की व्यवस्था भी होगी और यूजर सेफ्टी का भी व्यापक प्रबंध किया गया है. ऑनलाइन सट्टे वाले खेलों पर पूरी तरह पाबंदी रहेगी. ड्रीम 11, माई 11 सर्किल और खेलो फैंटेसी लाइव जैसे गेम्स पहले रियल मनी गेम्स के प्लेटफॉर्म थे, जिन्होंने पाबंदी के बाद पैसे वाला हिस्सा हटा लिया है.

भारत में गेम्स पर पाबंदी पहले भी लगी थी. सरकार ने वर्ष 2020 में चीन से तनाव के बाद 100 से ज्यादा ऑनलाइन गेम्स को प्रतिबंधित कर दिया था. PUBG को भी प्रतिबंधित किया गया, लेकिन इसके दूसरे वर्जन आ गए.

गेम डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के बोर्ड मेंबर मनीष अग्रवाल ने बयान जारी कर कहा है, "ये नियम अहम सुधार दर्शाते हैं और इसका श्रेय मंत्रालय को जाता है. उसने अपवाद पर ध्यान देते हुए अधिकांश ऑनलाइन गेम्स को नियामकीय जांच से बाहर रखा है. हालांकि, अब भी कुछ सवाल अनसुलझे हैं. इनमें मंत्रालयों के बाहर के स्वतंत्र अपीलीय तंत्र का अभाव और किसी गेम की समीक्षा की समय सीमा तय न होना जैसे मसले शामिल हैं. इन मुद्दों को सुलझाने से डेवलपर्स को वह निश्चितता मिलेगी, जिसकी उन्हें निवेश, नवाचार और बड़े पैमाने पर निर्माण के लिए आवश्यकता है."

गेम डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक, देश में एक हजार से ज्यादा गेमिंग कंपनियां और 50 हजार से ज्यादा गेम डेवलपर्स हैं. गेमिंग उद्योग 2028 तक करीब 8 अरब डॉलर का राजस्व पैदा करेगा. पूरी दुनिया में ऑनलाइन गेमिंग 200 अरब डॉलर की इंडस्ट्री है और यह तेजी से बढ़ रही है. भारत खुद को गेमिंग हब बनाने का सपना देख रहा है, जिसके लिए अनुकूल माहौल बनाने की जरूरत है.

जहां तक रियल मनी गेमिंग पर पाबंदी का सवाल है, तो सरकार देश की कंपनियों पर रोक लगा सकती है, लेकिन विदेशी कंपनियां पाबंदी के बाद डोमेन नेम बदलकर मार्केट में आ जाती हैं. सरकार उन पर कुछ नहीं कर पाती. फिलहाल सरकार के नियमों के बीच सुप्रीम कोर्ट में भी गेमिंग कंपनियों के मुकदमे पहुंच गए हैं, जिन पर फैसला आना अभी बाकी है. सरकारी फ्रेमवर्क पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का असर पड़ सकता है. फिलहाल राहत की बात यह है कि ये खेल खेले जाते रहेंगे.

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