ईरान पर इजरायल के हमले से करीब 24 घंटे पहले की बात है. तब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खत्म करने और एक समझौते पर पहुंचने के लिए विएना में बातचीत का पहला दौर समाप्त हुआ था. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने देश के सरकारी टीवी को बताया कि बातचीत में बहुत अच्छी प्रगति हुई है और अगले हफ्ते दूसरे दौर की बातचीत होगी.
हालांकि, पश्चिम एशिया के इस देश का भ्रम कुछ ही घंटों में टूट गया, जब 28 फरवरी की सुबह नौ बजे के करीब राजधानी तेहरान और इफ्सहान सहित कुछ अहम शहरों पर इजरायल ने बम गिरा दिया. फिर जो आशंका थी, वह हकीकत बन गई. जवाबी कार्रवाई में ईरान ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिका के कम से कम 14 सैन्य बेसों को निशाना बनाने की बात कही है.
अभी तक बहरीन में यूएस नेवी के 5वीं फ्लीट का मुख्यालय, युक्त अरब अमीरात (UAE) का अल-धाफरा एयर बेस, कुवैत का अल-सलेम एयर बेस और कतर का अल-उदीद एयर बेस ईरानी हमले की पुष्टि हुई है. इन देशों की तरफ से अभी तक ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की कोई खबर नहीं है. हालांकि, सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने कड़े शब्दों में ईरान के मिसाइल हमलों को ईरानी आक्रमण और इन देशों की संप्रभुता का उल्लंघन बताया. मंत्रालय ने कहा कि अगर ये देश ईरान के खिलाफ कोई कार्रवाई करते हैं तो सऊदी अरब उसका समर्थन करेगा. यानी ईरान का यह सबसे बड़ा पड़ोसी उसके खिलाफ जाने से बस एक कदम दूर है.
भारत का रुख
पश्चिम एशिया के बाहर भी इस जंग ने अब गोलबंदी तेज कर दी है. इस मामले पर भारत ने अभी तक किसी खेमे की तरफ झुके होने का संकेत नहीं दिया है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है. भारत के विदेश मंत्रालय के बयान में कहा गया है, "ईरान और खाड़ी क्षेत्र में ताजा घटनाओं से भारत काफी चिंतित है. हम सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव न बढ़ाने और आम लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील करते हैं."
भारत ने यह भी कहा है कि तनाव कम करने और संबंधित मुद्दों को सुलझाने के लिए बातचीत और कूटनीति को आगे बढ़ाया जाना चाहिए. वहीं भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने X पर जानकारी दी कि उन्होंने 28 तारीख को शाम को इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से अलग-अलग बात की. अराघची से बातचीत में भारतीय विदेश मंत्री ने ईरान सहित इस क्षेत्र के घटनाक्रम पर चिंता जताई. वहीं, इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार से बातचीत में उन्होंने तनाव कम करने के लिए बातचीत और कूटनीति का सहारा लेने की बात कही.
पाकिस्तान ने ईरान पर हमले की निंदा की
पाकिस्तान ने हाल ही में अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों की कड़ी निंदा की है और सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान खोजने की अपील की है, ताकि मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ने से रोका जा सके.
प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने कहा कि यह स्थिति “बहुत गंभीर और खतरनाक” है. उन्होंने जोर देकर कहा, “पाकिस्तान पूरी तरह से सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के साथ खड़ा है. हम सभी पक्षों से अपील करते हैं कि वे ऐसे कदम न उठाएं जो संघर्ष को और बढ़ा दें.”
उन्होंने कहा कि पाकिस्तान तनाव कम करने और वार्ता के माध्यम से शांति स्थापित करने में मदद करने के लिए तैयार है. विदेश मंत्री सेनेटर मोहम्मद इशाक डार ने भी इन हमलों को “गैर-जरूरी और गलत” बताया और ईरान सहित सभी पक्षों से संवाद और शांतिपूर्ण समाधान की अपील की. पाकिस्तान ने ईरान के विदेश मंत्री अब्दुल्ला अराघची के साथ बातचीत कर शांति प्रयासों का समर्थन किया.
रूस और चीन ने क्या कहा
रूस और चीन ईरान पर हमलों को लेकर गहरी चिंता जताई है. दोनों देशों ने सभी पक्षों से लड़ाई रोकने और कूटनीतिक वार्ता शुरू करने की अपील की है.
रूसी विदेश मंत्रालय ने इन हमलों को “पूर्वनियोजित और बिना वजह का हमला” बताया. रूस ने कहा कि ये हमले क्षेत्र में मानवीय, आर्थिक और परमाणु खतरे पैदा कर सकते हैं. रूस ने अमेरिका और इज़राइल पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को बहाना बनाकर आक्रमण करने का आरोप लगाया और शांति वार्ता में मध्यस्थता करने की पेशकश की.
इधर, चीन ने कहा कि वह इन हमलों को लेकर “बहुत चिंतित” है और ईरान की सुरक्षा और संप्रभुता का सम्मान करने की अपील की. बीजिंग ने तुरंत सैन्य कार्रवाई रोकने और सभी पक्षों से संवाद और वार्ता की मांग की.
यूरोपीय देशों ने कूटनीतिक हल की पहल की
यूरोपीय नेता ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच बढ़ते संघर्ष पर सतर्क प्रतिक्रिया दे रहे हैं. उन्होंने संयम, कूटनीति और बातचीत के मार्ग पर लौटने की अपील की है, जबकि सीधे सैन्य दखल से दूरी बनाई है.
यूरोपीय यूनियन ने “गहरी चिंता” जताई. यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने “अधिकतम संयम” बरतने की अपील की और नागरिकों की सुरक्षा तथा अंतर्राष्ट्रीय कानून के पालन पर जोर दिया. EU की विदेश नीति प्रमुख कजा कलास ने स्थिति को “बेहद खतरनाक” बताया और कहा कि यूरोपीय संघ क्षेत्रीय साझेदारों के साथ काम कर रहा है ताकि तनाव और बढ़ने से रोका जा सके.
यूनाइटेड किंगडम में प्रधानमंत्री कीएर स्टार्मर ने साफ किया कि ब्रिटिश बलों ने अमेरिका-इज़राइल के हमलों में भाग नहीं लिया. हालांकि, उन्होंने कहा कि ब्रिटिश जंगी विमान क्षेत्र में रक्षात्मक हवाई गश्त पर हैं, ताकि ब्रिटिश कर्मियों और सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. स्टार्मर ने ईरान के जवाबी मिसाइल हमलों की निंदा की और तेहरान से परमाणु वार्ता में लौटने की अपील की.
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने चेतावनी दी कि यह संघर्ष पूरे मध्य पूर्व को अस्थिर कर सकता है. उन्होंने तत्काल कूटनीतिक प्रयास और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में चर्चा का समर्थन किया. जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिक मर्ज ने भी संघर्ष को कम करने और बातचीत के माध्यम से समाधान खोजने की वकालत की.
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने एकतरफा सैन्य कार्रवाई की आलोचना की और कहा कि सभी जवाब अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार होने चाहिए. कुल मिलाकर, यूरोपीय सरकारों ने सैन्य संचालन में शामिल होने से परहेज किया है और कूटनीति, क्षेत्रीय स्थिरता और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता के पुनरारंभ को प्राथमिकता दी है, जबकि नागरिकों और पड़ोसी देशों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले हमलों की कड़ी निंदा की है.

