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पर्यटन की मुख्यधारा में आ रहा है छिपा हुआ भारत

कम चर्चित पर्यटन स्थल, समुदाय आधारित पर्यटन और वन्यजीव सर्किट ‘इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे एंड अवॉर्ड्स 2026’ में चर्चा के केंद्र में रहे. इन्हें पर्यटन विकास के अगले बड़े अवसर के रूप में पेश किया गया

सत्र में बोलते हुए ओडिशा पर्यटन निदेशक दीपांकर महापात्र (फोटो : चंद्रदीप कुमार)
अपडेटेड 22 जून , 2026

भारत में घरेलू पर्यटन लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में ओडिशा, छत्तीसगढ़, केरल और महाराष्ट्र के पर्यटन अधिकारियों ने कम चर्चित पर्यटन स्थलों, जनजातीय अनुभवों और समुदाय आधारित पर्यटन को विकास का अगला बड़ा अवसर बताया. इस पर चर्चा का मंच बना गोवा में आयोजित इंडिया टुडे टूरिज्म सर्वे एंड अवॉर्ड्स 2026.

'हिडन इंडिया: हाउ इमर्जिंग डेस्टिनेशंस आर फ्यूलिंग डोमेस्टिक टूरिज्म ग्रोथ' (Hidden India: How emerging destinations are fuelling domestic tourism growth) सत्र में इस बात पर चर्चा हुई कि किस तरह राज्य स्थापित पर्यटन स्थलों से आगे बढ़कर दूसरे इलाकों तक पर्यटन का लाभ पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं.

चर्चा की शुरुआत करते हुए ओडिशा पर्यटन निदेशक दीपांकर महापात्र ने कहा कि राज्य अब पुरी, कोणार्क और भुवनेश्वर के पारंपरिक ‘गोल्डन ट्रायंगल’ से आगे बढ़ना चाहता है. ओडिशा अपनी 574 किलोमीटर लंबी तटरेखा, राष्ट्रीय उद्यानों, पहाड़ी पर्यटन स्थलों और रत्नागिरि, उदयगिरि व ललितगिरि जैसे बौद्ध विरासत स्थलों को बढ़ावा दे रहा है.

महापात्र ने राज्य की संशोधित पर्यटन नीति का भी जिक्र किया. इसके तहत होटल और पर्यटन ढांचे में निजी निवेश को प्रोत्साहन दिया जा रहा है. उन्होंने बौद्ध सर्किट को मजबूत करने और विरासत स्थलों तक बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने के प्रयासों पर भी जोर दिया.

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड के प्रबंध निदेशक विवेक आचार्य के मुताबिक सबसे बड़ा अवसर बस्तर की नई पहचान बनाने में है. खासकर क्षेत्र में वामपंथी उग्रवाद कम होने के बाद. आचार्य ने कहा कि छत्तीसगढ़ अब पर्यटन से जुड़ा बुनियादी ढांचा विकसित कर रहा है. जनजातीय युवाओं को गाइड के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है. साथ ही ग्लास ब्रिज, जल आधारित पर्यटन और इको-टूरिज्म सर्किट जैसे एडवेंचर पर्यटन उत्पाद विकसित किए जा रहे हैं.

पर्यटन को ‘कहानियां बेचने का कारोबार’ बताते हुए आचार्य ने कहा कि बस्तर के जंगल, झरने और जनजातीय संस्कृति बड़े पर्यटन आकर्षण बन सकते हैं. उन्होंने पर्यटकों के लिए प्रतिस्पर्धा करने के बजाय पड़ोसी राज्यों के साथ मिलकर बहु-राज्यीय पर्यटन सर्किट विकसित करने पर जोर दिया.

केरल के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) प्रमोद जी. कृष्णन ने राज्य के समुदाय आधारित वन्यजीव पर्यटन मॉडल को प्रस्तुत किया. उन्होंने बताया कि पूर्व शिकारी और जंगलों पर निर्भर समुदायों को संरक्षित क्षेत्रों के आसपास पर्यटन गतिविधियों से जोड़ा गया है. इससे उन्हें रोजगार मिला है और संरक्षण के प्रयास भी मजबूत हुए हैं.

कृष्णन के अनुसार, केरल के वन क्षेत्रों और उनके आसपास अब प्रकृति आधारित लगभग 80 पर्यटन स्थल संचालित हो रहे हैं. हालांकि उन्होंने आगाह किया कि जनजातीय इलाकों में पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ आने वाले सांस्कृतिक और सामाजिक बदलावों का भी पहले से आकलन करना होगा.

महाराष्ट्र का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्य के पर्यटन विभाग के महाप्रबंधक चंद्रशेखर जायसवाल ने कहा कि राज्य की पर्यटन कहानी सिर्फ प्रसिद्ध मराठा किलों तक सीमित नहीं है. उन्होंने नासिक के जनजातीय सांस्कृतिक संग्रहालयों, कम चर्चित गुफा समूहों, वन्यजीव पर्यटन स्थलों और स्वदेशी ज्ञान केंद्रों का उल्लेख किया. उनके मुताबिक ये आकर्षण मुख्यधारा के विरासत पर्यटन का अच्छा पूरक बन सकते हैं.

पूरे पैनल में एक बात पर सभी की सहमति रही. भारत के पर्यटन मानचित्र को अधिक विविध बनाना होगा. साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि स्थानीय समुदायों, खासकर जनजातीय आबादी को, बढ़ती पर्यटक संख्या का सीधा लाभ मिले. अधिकारियों का मानना था कि घरेलू यात्रा तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में भारत में पर्यटन का अगला बड़ा उछाल उन जगहों से आ सकता है जो अब तक मुख्यधारा के पर्यटन सर्किट से बाहर रही हैं.

पांच खास बातें :

  • भारत में पर्यटन की अगली बड़ी वृद्धि अब सिर्फ उत्तर प्रदेश, गोवा या केरल जैसे स्थापित पर्यटन स्थलों से नहीं, बल्कि उभरते हुए नए गंतव्यों से आएगी.
  • ओडिशा और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य बेहतर सुरक्षा, कनेक्टिविटी और नीतिगत प्रोत्साहनों के जरिए छिपे हुए सांस्कृतिक, जनजातीय और प्राकृतिक आकर्षणों को मुख्यधारा में ला रहे हैं.
  • समुदाय आधारित पर्यटन एक प्रमुख मॉडल बनकर उभर रहा है. इसमें स्थानीय और जनजातीय समुदायों को गाइड, मेजबान और संरक्षण साझेदार के रूप में पर्यटन व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है.
  • वन्यजीव, एडवेंचर और अनुभव आधारित पर्यटन, खासकर वन क्षेत्रों और अब तक कम खोजे गए इलाकों में, पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के बड़े माध्यम बन रहे हैं.
  • राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग और पर्यटन सर्किट का विकास जरूरी है. इससे पर्यटकों का बेहतर वितरण होगा और भारत की पूरी पर्यटन क्षमता का उपयोग किया जा सकेगा.
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