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अमेरिकी टैरिफ और पश्चिम एशिया संकट के दौर में भारत-जापान के लिए बड़ा मौका!

कॉरपोरेट दिग्गजों ने India Today Indo-Japan Conclave के एक सेशन में इस बात पर जोर दिया कि भारत और जापान को नए भू-राजनीतिक हालात में एक दूसरे के साथ लंबी साझेदारी करनी चाहिए

India Today Indo-Japan Conclave के सत्र में कॉर्पोरेट दिग्गज (फोटो : अरुण कुमार)
अपडेटेड 26 मई , 2026

मई की 22 तारीख को India Today Indo-Japan Conclave के एक सेशन में उद्योग जगत के दिग्गजों ने इस बात पर सहमति जताई कि भारत वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग और ग्रोथ हब बन सकता है. साथ ही उन्होंने इस लक्ष्य को हासिल करने में जापान के सहयोग पर जोर दिया.

नई दिल्ली में आयोजित India Today Indo-Japan Conclave में बोलते हुए कॉरपोरेट दिग्गजों ने कहा कि हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप सरकार की तरफ से लगाए गए टैरिफ और पश्चिम एशिया में उथल-पुथल ऐसे कारक हैं जो भारत और जापान को अपनी ताकतों का फिर से आकलन करने और 20 साल या उससे अधिक की सफल साझेदारी के लिए मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करते हैं.

‘इन्फ्रास्ट्रक्चर: क्या भारत जापान का ग्लोबल प्रोडक्शन हब बन सकता है?’ सत्र की शुरुआत करते हुए हिताची इंडिया के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन भरत कौशल ने कहा, “जापानी कंपनियां भरोसेमंद हैं और उनकी तकनीक की मजबूती पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता.”

उनका आगे कहना था, “जापान-भारत आर्थिक संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए इससे बेहतर समय नहीं हो सकता. अभी भू-रणनीतिक अनिश्चितता बहुत ज्यादा है- टैरिफ, युद्ध जैसी स्थिति, कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा रही है.”

कौशल ने कहा कि पिछले एक दशक में देश में दो चीजों में क्रांतिकारी बदलाव आया है- कार्यान्वयन और गुणवत्ता. अब गुणवत्ता को महत्व दिया जा रहा है. यह सोच बदल रही है कि सबसे कम बोली लगाने वाला ही विजेता होना चाहिए. उन्होंने कहा, “अब कम लागत वाला ही प्राथमिकता नहीं है और इसी जगह जापान की एंट्री होती है.”

हिताची इंडिया के प्रमुख ने कहा कि AI अब खपत का नया पैमाना बन रहा है. उन्होंने कहा, “AI के कारण हो रहा बदलाव शायद इंटरनेट के आगमन या परमाणु शक्ति के आगमन से भी बड़ा है. यह दुनिया को नियम-आधारित माहौल से बिना नियम वाले माहौल की ओर ले जा रहा है.”

मित्सुई एंड कंपनी इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर सैयद फैसल अशरफ ने कहा, “2026 भारत और जापान के लिए एक महत्वपूर्ण साल है. यह पिछले 20 साल को देखकर अगले 20 साल की योजना बनाने और सहयोग करने का समय है.”

अशरफ ने कहा कि सफल साझेदारी के लिए सरकारी नीतियों में स्थिरता बहुत जरूरी है. उन्होंने बताया कि भारत के कुछ हवाई अड्डों पर डिजी यात्रा (Digi Yatra) सुविधा का पूरा आधारभूत ढांचा जापानी है.

जब उनसे पूछा गया कि भारत और जापान इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास में कैसे सहयोग कर सकते हैं, तो पैनासोनिक लाइफ सॉल्यूशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर योशियुकी काटो ने कहा, “ध्यान तकनीक और इन्फ्रास्ट्रक्चर के एकीकरण पर होना चाहिए.”

भारत की डिजिटल तकनीक में तेजी की सराहना करते हुए काटो ने कहा, “जापान का क्वालिटी मैनेजमेंट एक संयोजन देता है, जिससे भारत दुनिया के लिए जापान का मैन्युफैक्चरिंग गेटवे बन सकता है.”

डाइकिन एयरकंडीशनिंग इंडिया के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर कंवल जीत जावा ने मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी सरकार के दौरान जापान के आर्थिक साझेदार के रूप में भारत की स्थिति की तुलना की. उन्होंने कहा, “अब भारत का समय आ गया है.”

जावा ने कहा कि जापान के पास भारत जितना बड़ा बाजार और अवसर कहीं और नहीं है. उन्होंने कहा, “ऑटोमोबाइल उद्योग में हमने दिखाया है कि हम ग्लोबल हब बन सकते हैं. सुजुकी को ही देख लीजिए- उनके वैश्विक मुनाफे का 70 प्रतिशत भारत से आता है. इससे बेहतर उदाहरण क्या हो सकता है?”

उन्होंने कहा, “इससे मुकाबला कौन कर सकता है? भारत पैमाना, फैसले लेने और उन्हें लागू करने की गति और स्थिरता देता है. हाल के श्रम नीति सुधारों के साथ भारत में वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की क्षमता है. यह पहले से ही जापान के लिए एक रणनीतिक मैन्युफैक्चरिंग हब है.”

सत्र की खास बातें :

भरत कौशल, एग्जीक्यूटिव चेयरमैन, हिताची इंडिया

  •  “जापानी भरोसेमंद हैं और उनकी तकनीक की मजबूती पर कोई सवाल नहीं है.”
  •  “जापान-भारत आर्थिक संबंधों को अगले स्तर पर ले जाने के लिए इससे बेहतर समय नहीं है.”
  •  “अब गुणवत्ता को महत्व दिया जा रहा है, यह सोच नहीं कि सबसे कम बोली लगाने वाला ही जीते.”

सैयद फैसल अशरफ, मैनेजिंग डायरेक्टर, मित्सुई एंड कंपनी इंडिया

  •  “अमेरिकी टैरिफ और पश्चिम एशिया संघर्ष हमें मौजूदा स्थिति पर विचार करने को मजबूर करते हैं. यह अच्छा समय है कि हम देखें भारत और जापान अगले 20 साल में कैसे सहयोग कर सकते हैं.”
  •  “औद्योगिक और आर्थिक सहयोग और विकास के लिए सरकारी नीतियों में स्थिरता बहुत जरूरी है.”
  •  “हमें भारत की अल्पकालिक सोच को जापान की दीर्घकालिक सोच के साथ जोड़ना होगा, ताकि बेहतर परिणाम मिल सकें.”

योशियुकी काटो, मैनेजिंग डायरेक्टर, पैनासोनिक लाइफ सॉल्यूशंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड

  •  “ध्यान तकनीक और इन्फ्रास्ट्रक्चर के एकीकरण पर होना चाहिए.”
  •  “भारत की डिजिटल तकनीक में तेजी और जापान का क्वालिटी मैनेजमेंट एक (synergetic) संयोजन है.”

कंवल जीत जावा, चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर, डाइकिन एयरकंडीशनिंग इंडिया

  •  “हम बड़े सपने देखने की हिम्मत कर रहे थे, लेकिन अब हमारा समय आ गया है.”
  •  “मुझे नहीं लगता कि जापान के पास भारत जितना बड़ा बाजार और अवसर कहीं और है.”
  •  “भारत पैमाना, फैसले लेने और उन्हें लागू करने की गति और स्थिरता देता है. हाल के नीति सुधार भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने में मदद कर रहे हैं.”
     
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