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मोदी कैबिनेट में फेरबदल की अटकलें क्यों लग रहीं?

प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में 21 मई को हुई केंद्रीय मंत्रिपरिषद की मैराथन बैठक के बाद मंत्रिमंडल में फेरबदल को लेकर नए सिरे से कयास लगने लगे हैं

PM Modi cabinet meeting
प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई यह कैबिनेट मीटिंग 3 घंटे से ज्यादा चली
अपडेटेड 22 मई , 2026

विदेश यात्रा से लौटने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 21 मई को केंद्रीय मंत्रिपरिषद की एक अहम बैठक की है. यह बैठक आम कैबिनेट बैठक के मुकाबले लंबी चली. नए प्रधानमंत्री कार्यालय, सेवा तीर्थ में हुई इस बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के पिछले दो वर्षों के कामकाज की समीक्षा की गई. प्रधानमंत्री के स्तर पर हुई इस प्रक्रिया के बाद यह चर्चा तेज है कि प्रधानमंत्री मोदी अपने तीसरे कार्यकाल में मंत्रिमंडल में फेरबदल करने वाले हैं.

यह बैठक साढ़े तीन से साढ़े चार घंटे तक चली. इस दौरान मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने से ठीक पहले विभिन्न मंत्रालयों ने पीएम के सामने पिछले दो वर्षों में किए गए सुधारों, योजनाओं के क्रियान्वयन और विस्तृत प्रजेंटेशन दिया.

इस बैठक में शामिल दो केंद्रीय मंत्रियों के मुताबिक, कुल नौ मंत्रालयों के प्रजेंटेशन प्रधानमंत्री के सामने हुए. इनमें कृषि एवं किसान कल्याण, वाणिज्य एवं उद्योग, ऊर्जा, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, श्रम एवं रोजगार, पर्यावरण-वन एवं जलवायु परिवर्तन, कॉरपोरेट मामलों और विदेश मंत्रालय शामिल रहे. कैबिनेट सचिव टीवी सोमनाथन ने भी सरकार के समग्र सुधारों पर एक प्रजेंटेशन दिया.

सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में 'ईज ऑफ लिविंग' और 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' को केंद्र में रखा गया. प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों और अधिकारियों से कहा कि सरकार का रवैया लोगों के जीवन में अनावश्यक दखलंदाजी का नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर मदद करने का होना चाहिए. उन्होंने नियमों के अनावश्यक अनुपालन को कम करने, प्रक्रियाओं को सरल बनाने और तेज निर्णय लेने पर जोर दिया.

सूत्रों के अनुसार, बेहतर प्रदर्शन करने वाले पांच मंत्रालयों और अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन करने वाले पांच मंत्रालयों का भी जिक्र किया गया. इसके लिए कुछ संकेतकों के आधार पर मंत्रालयों की रैंकिंग की गई. हालांकि आधिकारिक रूप से इन मंत्रालयों के नाम सार्वजनिक नहीं किए गए हैं. सूत्रों की मानें तो शीर्ष प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों में श्रम, कृषि, रेलवे, वित्त और ऊर्जा शामिल रहे. साथ ही, कुछ मंत्रालयों में सुधार की धीमी गति को लेकर प्रधानमंत्री ने नाराजगी भी जताई.

प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों से कहा कि अब 'कम समय में ज्यादा काम' का मंत्र अपनाना होगा. उन्होंने विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अगले चरण के सुधारों की रूपरेखा तैयार करने का निर्देश भी दिया.

भाजपा और केंद्र सरकार के स्तर पर चर्चा है कि इस बैठक में हुई समीक्षा के आधार पर कुछ मंत्रियों की जिम्मेदारियां बदली जा सकती हैं. वहीं अच्छा प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों को और मजबूत भूमिका मिल सकती है.

दरअसल यह बैठक भले ही 21 मई को हुई हो लेकिन इसकी पटकथा बीते 24 फरवरी को ही लिख दी गई थी. नए प्रधानमंत्री कार्यालय यानी सेवा तीर्थ में पहली बार कैबिनेट की बैठक 24 फरवरी को हुई थी. उस बैठक में प्रधानमंत्री ने सभी केंद्रीय मंत्रियों को 2024 से अब तक हुए सुधारों पर रिपोर्ट बनाने के लिए कहा था. इस रिपोर्ट का संक्षिप्त सारांश सभी मंत्रियों को 2 मार्च तक कैबिनेट सचिवालय को देना था.

24 फरवरी की कैबिनेट बैठक के एजेंडे में कुछ विशेष नहीं था. कुछ ऐसे विषय थे, जिन पर ज्यादा चर्चा की जरूरत नहीं थी. इसलिए मंत्रियों को उम्मीद थी कि यह बैठक एक घंटे से भी कम समय में समाप्त हो जाएगी. लेकिन यह बैठक करीब तीन घंटे चली. एजेंडे को निपटाने के बाद प्रधानमंत्री ने विभिन्न मंत्रालयों में सुधारों पर लंबी चर्चा की. भले ही यह रिपोर्ट औपचारिक रूप से मांगी गई थी लेकिन मंत्रियों के लिए साफ संकेत था कि यह एक प्रकार का रिपोर्ट कार्ड ही है.

प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद सभी मंत्रियों ने संक्षिप्त रिपोर्ट कैबिनेट सचिवालय को भेजी थी. इसके बाद सभी मंत्रालयों में विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई. इसके लिए कैबिनेट मंत्रियों के साथ-साथ मंत्रालयों के सचिव और वरिष्ठ अधिकारियों ने मिलकर काम किया.

कैबिनेट सचिवालय ने इस रिपोर्ट के लिए एक मानक टेम्पलेट जारी किया था. इसके तहत हर मंत्रालय को चार श्रेणियों में सुधारों का विवरण देना था- विधायी, नियमावली, नीतिगत और प्रशासनिक सुधार. हर सुधार के साथ उसका प्रभाव बताना अनिवार्य किया गया था, जैसे कि कितने लोगों को लाभ मिला, काम पूरा करने में कितना समय कम लगा, कितना खर्च घटा और 'ईज ऑफ लिविंग' तथा 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' में कितना सुधार हुआ.

अभी चर्चा यह भी है कि 21 मई की बैठक के बाद प्रधानमंत्री एक-एक मंत्री से अलग-अलग मिलकर उनके कामकाज की समीक्षा करेंगे. आम तौर पर हर कैबिनेट मंत्री को 45 से 60 मिनट का समय दिया जाएगा और उसी आधार पर उनके मंत्रालय के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाएगा. हालांकि कुछ सूत्रों का यह भी कहना है कि शेष मंत्रालयों की समीक्षा किसी आगामी मंत्रिपरिषद बैठक में भी की जा सकती है.
दरअसल इसी तरह की कवायद 2021 में भी की गई थी. उस समय प्रधानमंत्री मोदी के दूसरे कार्यकाल के दो वर्ष पूरे होने के बाद सभी मंत्रियों से रिपोर्ट कार्ड मांगा गया था. इसके बाद जुलाई 2021 में मंत्रिमंडल में फेरबदल किया गया था, जिसमें कई मंत्रियों को बाहर भी किया गया था.

इस बार भी यह समीक्षा ऐसे समय पर हो रही है जब मोदी सरकार अपने तीसरे कार्यकाल के दो वर्ष पूरे करने के करीब है. 9 जून को सरकार के दो वर्ष पूरे होंगे इसलिए राजनीतिक हलकों में अटकलें हैं कि इस मूल्यांकन के आधार पर मंत्रिमंडल में फेरबदल पर निर्णय लिया जा सकता है.

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