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निवेश की रेस में आंध्र प्रदेश कैसे बढ़ा रहा अपनी रफ्तार?

इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ में आंध्र प्रदेश के उद्योग मंत्री टी.जी. भरत ने बताया कि मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के तेज फैसले लेने की शैली से राज्य को कैसे फायदा हुआ

आंध्र प्रदेश के उद्योग मंत्री टी.जी. भरत
अपडेटेड 1 अक्टूबर , 2026

आंध्र प्रदेश के उद्योग, वाणिज्य और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री टी.जी. भरत के मुताबिक, निवेश आकर्षित करने में चंद्रबाबू नायडू सरकार का तेजी से फैसले लेना राज्य की सबसे बड़ी ताकत है. भरत ने 29 सितंबर को कोच्चि में आयोजित इंडिया टुडे कॉन्क्लेव साउथ में यह बात कही.

‘स्पीड ऑफ डूइंग बिजनेस: हाउ एपी बिकेम एन इन्वेस्टमेंट मैग्नेट’ सत्र में शामिल हुए भरत ने कहा कि मुख्यमंत्री नायडू ने तय समयसीमा के भीतर फैसले लेने पर खास जोर दिया है. इसी वजह से पिछले दो साल में कैबिनेट 14 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दे पाई है. उन्होंने कहा कि करीब 50 लाख करोड़ रुपए के एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए गए हैं जो कैबिनेट से मंजूर निवेश प्रस्तावों की राशि से भी ज्यादा है.

तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के नेता ने कहा कि आंध्र प्रदेश औद्योगिकीकरण के लिए क्लस्टर आधारित मॉडल अपना रहा है, जिसमें कुछ उद्योगों को खास जगहों पर विकसित किया जा रहा है. नायडू ने ई-ऑफिस जैसी प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी शुरू की हैं जिसमें अधिकारियों की ओर से फैसले लेने में लगने वाले समय की निगरानी की जाती है. 

सरकार उद्योगों को प्रोत्साहन राशि जारी करने के लिए एस्क्रो आधारित मॉडल भी लागू करने जा रही है. भरत के मुताबिक इन उपायों से भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम होती है.

आंध्र प्रदेश में उद्योगों के लिए जमीन आवंटित करने की प्रक्रिया भी तेज है. मंत्री ने कहा कि आवंटित जमीन पहले एक समझौते के तहत दी जाती है और निवेश तथा रोजगार सृजन से जुड़ी सभी शर्तें पूरी होने के बाद ही उसका हस्तांतरण किया जाता है. उनके मुताबिक इससे गंभीरता से निवेश नहीं करने वाले लोगों को छांटने में मदद मिलती है.

भरत ने एक ‘अर्ली बर्ड’ योजना के बारे में भी बताया जिसके तहत निवेशकों को अपनी परियोजनाओं के लिए अतिरिक्त लाभ मिल सकते हैं. उन्होंने कहा कि नायडू अन्य उपायों के साथ बड़े स्तर पर वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने की कोशिश कर रहे हैं. सरकार ग्रामीण इलाकों में ब्रॉडबैंड इंटरनेट कनेक्टिविटी बढ़ाने पर भी ध्यान दे रही है.

सत्र की खास बातें

टी.जी. भरत : 

  • “दुबई के एक उद्यमी ने अमरावती के विकास के लिए 100 करोड़ रुपए देने की प्रतिबद्धता जताई. इसकी वजह CBN (चंद्रबाबू नायडू) का ब्रांड था.”
  • “पिछली सरकार (2019-24) ऐसी नीतियां लेकर आई थी, जिनमें कोई दिशा-निर्देश नहीं थे. यह ऐसा था जैसे आपके पास कार हो, लेकिन उसकी चाबी न हो. हमने दूसरे राज्यों की नीतियों से तुलना करने के बाद दिशा-निर्देशों के साथ नीतियां तैयार कीं.”
  • “आमतौर पर कैबिनेट की बैठक महीने में दो बार होती है और निवेश प्रोत्साहन बोर्ड और समिति की बैठक महीने में एक बार होती है. अगर हमें ऐसा निवेश हासिल करना हो, जिसके लिए दूसरे राज्य भी कोशिश कर रहे हों, तो मुख्यमंत्री प्रस्तावों को मंजूरी देने के लिए वर्चुअल बैठक करते हैं. आंध्र प्रदेश में कारोबार करने की यही रफ्तार है.”
  • “कैबिनेट 14 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दे चुकी है. हमने 20 लाख नौकरियां पैदा करने का वादा किया है. हमने जनता से जो वादा किया है, उसे पूरा करने के लिए हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं.”
  • “मुख्यमंत्री निवेश के लिए एस्क्रो मॉडल लागू करना चाहते हैं. इसके तहत सरकार की ओर से परियोजनाओं को मिलने वाले प्रोत्साहन आधारित भुगतान एक तय समयसीमा में जारी किए जाएंगे. इससे नौकरशाही पर निर्भरता कम होगी. परियोजनाओं में देरी होने पर मामला सामने लाया जाएगा. ई-फाइलिंग सिस्टम के जरिए अधिकारियों की फाइलों को मंजूरी देने में लगने वाले समय की निगरानी की जा रही है.”
     
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