कंपनियां अपने यहां Gen-AI यानी जेनरेटिव आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (ऐसी AI तकनीक जो टेक्स्ट, तस्वीरें, कोड और दूसरा मटेरियल खुद तैयार कर सकती है) को लागू करने के अलग-अलग चरणों में हैं. कुछ अभी भी प्रयोग के चरण में हैं जबकि कई अन्य कंपनियां संगठन-स्तर पर इसे लागू करने का ऐलान कर चुकी हैं. इससे Gen-AI टैलेंट की मांग में तेज उछाल आया है. यानी ऐसे कर्मचारियों की मांग जो Gen-AI तकनीक को विकसित करने, लागू करने या उसके साथ काम करने में बेहतर हैं.
ऐसे में यह हैरानी की बात नहीं है कि आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस (AI) स्किल्स जॉब मार्केट में सबसे ज्यादा मांग वाली और सबसे अधिक वेतन देने वाली स्किल्स में शामिल हो गई हैं. इसलिए कुल मिलाकर जॉब मार्केट भले ही सुस्त हो लेकिन Gen-AI टैलेंट को काफी ज्यादा प्रीमियम मिल रहा है. वहीं मौजूदा कर्मचारियों से मामूली अप्रेजल की उम्मीद रखने को कहा जा रहा है.
देशभर में 1,267 नियोक्ताओं और 2,541 कर्मचारियों के बीच किए गए एक सर्वे से इसकी तस्वीर साफ होती है. इनडीड AI एट वर्क ट्रैकर 2026 (Indeed AI at Work Tracker 2026) के मुताबिक, 66 फीसदी नियोक्ताओं का कहना है कि वे AI स्किल्स वाली भूमिकाओं के लिए ज्यादा वेतन देते हैं. वहीं AI से प्रभावित भूमिकाओं में काम करने वाले 54 फीसदी कर्मचारियों का वेतन पिछले एक साल में या तो स्थिर रहा है या घट गया है.
इनडीड की रिपोर्ट के मुताबिक, 40 फीसदी संगठन AI स्किल्ड कर्मचारियो के लिए Non-AI कर्मचारियों की तुलना में 11-30 फीसदी अधिक वेतन देते हैं. वहीं 26 फीसदी संगठन 31-50 फीसदी तक ज्यादा वेतन देते हैं. इससे बाहरी AI टैलेंट के लिए नियोक्ता जितना वेतन देने को तैयार हैं और अपने मौजूदा कर्मचारियों को जितना भुगतान कर रहे हैं, उसके बीच का अंतर बढ़ गया है.
टेक्नोलॉजी से जुड़ी भूमिकाओं में भी यह अंतर साफ दिखाई देता है. जॉब-स्पीक के मुताबिक, जून में AI से जुड़े रोल के लिए हायरिंग सालाना आधार पर 16 फीसदी बढ़ी जबकि IT में कुल हायरिंग 3 फीसदी घट गई. जॉब-स्पीक जॉब पोर्टल नौकरी की एक रिपोर्ट है, जिसमें 1,50,000 कंपनियों की जॉब लिस्टिंग का विश्लेषण किया गया है. रिपोर्ट में कहा गया है कि 14 सेक्टरों में AI और मशीन लर्निंग से जुड़ी नौकरियां 25 फीसदी बढ़ीं.
यह अंतर बताता है कि कंपनियां AI टैलेंट को हायर करने के लिए अतिरिक्त प्रयास कर रही हैं, लेकिन ऐसा वे अपने मौजूदा कर्मचारियों की कीमत पर कर सकती हैं. इनडीड इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर शशि कुमार का कहना है कि बाहरी तौर पर AI टैलेंट हासिल करना फॉर्मूले का सिर्फ एक हिस्सा है. आंतरिक रूप से नई स्किल्स सीखने वाले कर्मचारियों को बनाए रखना और उन्हें प्रेरित करना दूसरा हिस्सा है. दोनों को साथ-साथ चलना चाहिए.
Gen-AI को सीखा जा सकता है. मौजूदा कर्मचारियों को बिजनेस के संदर्भ की बेहतर समझ होती है. इसलिए उन्हें नई AI स्किल्स से लैस करना महत्वपूर्ण है. वे कहते हैं, “वरना यह असंतुलन संगठनों के लिए दोहरी कमजोरी पैदा करेगा. इससे नौकरी की असुरक्षा बढ़ेगी और लंबे समय से संगठन में मौजूद अनुभवी टैलेंट के नौकरी छोड़ने की रफ्तार भी तेज हो सकती है.” यह अहम है क्योंकि बिजनेस का संदर्भ और किसी खास क्षेत्र की विशेषज्ञता बड़े पैमाने पर विकसित नहीं की जा सकती लेकिन टेक्नोलॉजी का ज्ञान विकसित किया जा सकता है.
रैंडस्टैड में प्रोफेशनल टैलेंट सॉल्यूशंस के चीफ कमर्शियल ऑफिसर शिव नाथ घोष का मानना है कि Gen-AI अब सिर्फ टेक्नोलॉजी टीमों तक सीमित नहीं है. इसका इस्तेमाल HR, वित्त, कानूनी और प्रशासन समेत हर बिजनेस फंक्शन में तेजी से हो रहा है. उनके मुताबिक, नौकरी पैदा होने के अगले चरण का असली अवसर यहीं है. आने वाले समय में हर जॉब डिस्क्रिप्शन में AI स्किल्स की जरूरत होगी.
नतीजतन, गैर-टेक प्रोफेशनल्स और कंपनियों, दोनों को अपने मौजूदा कर्मचारियों को AI में अपस्किल करने के लिए कई पहल करनी होंगी. कंपनियां और कर्मचारी पहले ही बता रहे हैं कि औपचारिक शैक्षणिक योग्यता की तुलना में AI स्किल्स और सर्टिफिकेशन को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है.

