हाल ही में 'India AI Impact Summit' खत्म हुई है. इस समिट की सबसे बड़ी कामयाबी तो यह रही कि अमेरिका और यूके समेत 91 देशों ने 'New Delhi Declaration on AI Impact' का समर्थन किया. लेकिन इसके अलावा भी कुछ बड़े नतीजे सामने आए.
इलेक्ट्रॉनिक्स और IT मंत्रालय के एडिशनल सेक्रेटरी और IndiaAI मिशन के CEO अभिषेक सिंह के मुताबिक, इस समिट के जरिए भारत ने दुनिया को दिखाया कि उसे AI सर्विसेज की कितनी ज्यादा भूख है. साथ ही, देश के उभरते हुए AI इकोसिस्टम में बड़े इन्वेस्टमेंट्स को खींचने में भी कामयाबी मिली है.
25 फरवरी को नई दिल्ली में 'इंडिया टुडे इंफ्रास्ट्रक्चर कॉन्क्लेव' में बोलते हुए अभिषेक सिंह ने कहा, "अगर आप अमेरिका और चीन से हमारी तुलना करें, तो हम तीसरे नंबर पर हैं. अभी हमारे और उनके बीच काफी फासला है. लेकिन हम इस गैप को तेजी से भर रहे हैं और आने वाले वक्त में लंबी छलांग लगाकर उनसे आगे निकलने की कोशिश में हैं."
सिंह ने बताया कि पांच लेयर वाले 'AI स्टैक' या टेक इकोसिस्टम के जरूरी हिस्से भारत में पहले से ही मौजूद हैं. ये पांच लेयर हैं - एनर्जी, डेटा सेंटर्स और नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर, कंप्यूट पावर, AI मॉडल्स और AI एप्लीकेशंस.
उन्होंने कहा, "अपने AI मिशन के जरिए हमने 'कंप्यूट' को सबकी पहुंच में ला दिया है. हमारे पास दुनिया में सबसे सस्ती कीमत पर 38,000 GPU मौजूद हैं - सिर्फ 65 रुपये प्रति GPU प्रति घंटा. इसके अलावा, हम 24,000 GPU और जोड़ रहे हैं. इसलिए, कंप्यूट पावर की दिक्कत तो काफी हद तक सुलझ जाएगी."
भारत में डेटा-सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी इन्वेस्टमेंट आ रहा है. इसके साथ ही, 'Sarvam AI' जैसी स्वदेशी कंपनियों द्वारा बनाए जा रहे 'फाउंडेशनल AI मॉडल्स' यह दिखाते हैं कि हमारे पास कोर AI रिसर्च और सॉल्यूशंस बनाने की पूरी क्षमता है. अभिषेक सिंह ने कहा, "AI स्टैक की पांच लेयर में से चार में हम मजबूती से खड़े हैं. बस 'चिप' (Chip) वाली लेयर में थोड़ा वक्त लगेगा."
सिंह के मुताबिक, असली मकसद भारत को दुनिया का सबसे बड़ा 'AI सर्विस प्रोवाइडर' बनाना है. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए 2026 के केंद्रीय बजट में भारत से क्लाउड सर्विसेज में इन्वेस्ट करने वाली विदेशी कंपनियों के लिए 'टैक्स हॉलिडे' का ऐलान किया गया है. सिंह ने समझाया, "भारत की मौजूदा डेटा सेंटर कैपेसिटी करीब 1 गीगावॉट (GW) है. हमारे देश के साइज को देखते हुए, हम दुनिया की 'इंफरेंसिंग' राजधानी बन सकते हैं."
बता दें कि 'इंफरेंसिंग' का मतलब है- ट्रेंड AI मॉडल्स को फैसले लेने के काम में लगाना. सिंह ने कहा, "अगर हमें दुनिया भर का 'AI वर्कलोड' भारत लाना है, तो हमें अपनी डेटा सेंटर कैपेसिटी को कई गुना बढ़ाना होगा. हमारे पास इसे 10 GW तक ले जाने की क्षमता है."
IndiaAI मिशन के CEO के अनुसार, अगला कदम कैपेबिलिटी सेंटर्स की संख्या बढ़ाना और फिर 'AI एप्लीकेशन डेवलपमेंट' पर फोकस करना होगा. उन्होंने कहा, "अगर भारत को वैल्यू चेन में ऊपर उठना है, तो हम शुरुआत भले ही डेटा सेंटर्स से करें, जो कि कोर इंफ्रास्ट्रक्चर है. लेकिन बहुत जल्द, हम पूरी दुनिया को 'इंफरेंसिंग सर्विसेज' देने लगेंगे और आखिरकार 'एजेंटिक AI' और AI सर्विसेज के मामले में टॉप पर होंगे."

