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डार्क मोड

लगातार ऊंचे मुकाम पर

एम्स दिल्ली पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों को विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और तरह-तरह के अनुभव मुहैया करवाने के साथ पढ़ाई के नए क्षेत्र खोल रहा और पुराने क्षेत्रों को भी अपडेट कर रहा

एम्स दिल्ली की एक क्लास की तस्वीर
एम्स दिल्ली की एक क्लास की तस्वीर
अपडेटेड 11 अगस्त , 2026

भारतीय डॉक्टरों की कई-कई पीढ़ियों के लिए अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) नई दिल्ली में पोस्टग्रेजुएट सीट हासिल करना मेडिकल की पढ़ाई का सबसे ऊंचा शिखर रहा है.

संस्थान में दाखिले की प्रतिस्पर्धा का बेहद कठिन होना तो वैसे भी मशहूर है लेकिन जो बात एम्स को अलग और खास बनाती है, वह केवल इसकी प्रतिष्ठा नहीं बल्कि अनूठा ईकोसिस्टम है, जहां मरीजों की देखभाल, शोध और अनुसंधान, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता का रोज एक प्लेटफॉर्म पर मिलन होता है.

एम्स दिल्ली देश में पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम के सबसे विस्तृत पोर्टफोलियो की पेशकश करता है, जिनमें एमडी, एमएस, एमडीएस, डीएम, एमसीएच, अस्पताल प्रशासन में एमडी, नर्सिंग में एमएससी, बायोटेक्नोलॉजी में मास्टर्स और पीएचडी कोर्स, और इनके अलावा डॉक्टरल और फेलोशिप प्रोग्राम शामिल हैं.

इतना ही अहम यह भी कि हेल्थकेयर की बदलती जरूरतों और चिकित्सा में हो रही प्रगति के साथ कदमताल करने के लिए पाठ्यक्रम को लगातार सुधारा जाता है, जिससे रेजिडेंट छात्र बंधी-बंधाई पाठ्यपुस्तकों पर निर्भर रहने के बजाए रोगों के निदान के एकदम ताजातरीन तौर-तरीके सीखते हैं.

संस्थान की सबसे बड़ी ताकत शायद वह क्लिनिकल अनुभव है जिसका कोई मुकाबला नहीं. इसके ऐक्टिंग डायरेक्टर डॉ. निखिल टंडन कहते हैं, “देश के सबसे व्यस्त टर्शियरी केयर केंद्रों में से एक होने के नाते एम्स में हर राज्य के मरीज आते हैं, जिनमें से कई ऐसी दुर्लभ, जटिल और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त होते हैं जिनके इलाज का मौका रेजिडेंट्स को कहीं और शायद ही मिले.”

इसकी बदौलत पोस्टग्रेजुएट छात्रों को असाधारण रूप से बहुत सारे रोगों और स्थितियों के इलाज का अनुभव मिलता है. इनमें आम ढर्रे की बीमारियों से लेकर अत्याधुनियक प्रत्यारोपण चिकित्सा की जरूरत वाली बीमारियां, आँकोलॉजी या कैंसर के उन्नत मामले, जेनेटिक या आनुवांशिक विकार और बहुत ही खास तरह की सर्जिकल प्रक्रियाएं शामिल हैं.

डॉ. टंडन कहते हैं, “पोस्टग्रेजुएट जीवन में रिसर्च भी उतनी ही अहम है.” कई दूसरे मेडिकल कॉलेजों मे रिसर्च ज्यादातर थीसिस के हिसाब से होती है. इसके उलट एम्स रेजिडेंट को बहुत-से विषयों की रिसर्च टीम, क्लिनिकल ट्रायल, ट्रांसलेशनल मेडिसिन और प्रयोगशाला विज्ञान के साथ जुड़ने के लिए प्रोत्साहित करता है.

विभागों में उन्नत डायग्नोस्टिक और रिसर्च सुविधाएं हैं. छात्र अपने अनुसंधान नियमित रूप से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में पेश करते हैं और इस तरह करिअर की शुरुआत में ही अकादमिक  साख बनाते हैं.

एक और अहम खासियत संस्थान में सुपर-स्पेशलाइजेशन की जबरदस्त संस्कृति है. छात्र सही मायनों में हर विषय के राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त विशेषज्ञों के साथ सीखते हैं और रेजिडेंसी के बाद भी कायम रहने वाली मेंटोरशिप के अवसरों का निर्माण करते हैं.

एम्स दिल्ली में डीएम एंडोक्राइनोलॉजी डॉ. आकांक्षा कुमारी कहती हैं, “अकादमिक माहौल ऐसा है जो विभागों के बीच साथ मिलकर काम करने को बढ़ावा देता है, जिससे फिजिशियन, सर्जन, रेडियोलॉजिस्ट, पैथोलॉजिस्ट, जेनेटिसिस्ट और बेसिक साइंटिस्ट मरीजों की देखभाल और रिसर्च पर एक दूसरे के साथ काम   कर पाते हैं.”

एम्स अपने पोस्टग्रेजुएट प्रोग्राम को चिकित्सा के बदलते स्वरूप के अनुरूप अपडेट करता रहा है. इस साल यहां एमएससी नर्सिंग प्रोग्राम में तीन नए स्पेशलाइजेशन शुरू किए गए हैं. क्लिनिकल कामकाज में डायबिटीज और मेटाबॉलिक बीमारियों की बढ़ती अहमियत को स्वीकार करके संस्थान ने अपने डीएम एंडोक्राइनोलॉजी कोर्स का नाम बदलकर डीएम एंडोक्राइनोलॉजी, मेटाबॉलिज्म और डायबिटीज रखा है.
 

इन बदलावों के साथ-साथ सीखने के तौर-तरीके भी विकसित हो रहे हैं. अपने स्पेशलाइजेशन के हिसाब से रेजिडेंट आज एडवांस्ड इमेजिंग, मिनिमली इनवेसिव ऐंड रोबोटिक सर्जरी, मॉलीक्युलर डायग्नोस्टिक्स, प्रिसिजन मेडिसिन और डिजिटल हेल्थ टेक्नोलॉजी के साथ काम कर रहे हैं, जो लगातार ज्यादा से ज्यादा मरीजों की देखभाल का आम हिस्सा बनती जा रही हैं.

एम्स का कम्युनिटी मेडिसिन विभाग पाठ्यक्रम का एक और बहुत खास हिस्सा है. यह पोस्टग्रेजुएट छात्रों को सिखाता है कि टर्शियरी केयर केंद्र के दायरे के बाहर जाकर स्वास्थ्य को कैसे समझना चाहिए.

अलबत्ता जो बात एम्स को दूसरों से अलग करती है, वह है यहां का सीखने-सिखाने का जोश और उत्साह से भर देने वाला माहौल. देश के कुछ अग्रणी क्लिनिशियन और रिसर्चर के साथ सीखते  हुए रेजिडेंट असाधारण रूप से अलग-अलग    तरह के मरीजों को देखने-समझने का अनुभव हासिल करते हैं.

एम्स में जिंदगी का दायरा रेजिडेंसी से आगे तक फैला हुआ है. कैंपस में भारत के सबसे मशहूर इंटरमेडिकल फेस्टिवल में से एक पल्स का आयोजन किया जाता है. इसमें छात्र सांस्कृतिक, साहित्यिक, खेल और शोध आयोजनों में एक साथ भाग लेते हैं. रेजिडेंट के लिए 24 घंटे खुली रहने वाली सेंट्रल लाइब्रेरी, मॉडर्न सिम्युलेशन ऐंड स्किल लैबोरेटरी, खेल सुविधाएं, हॉस्टल और संगीत, रंगमंच, वाद-विवाद, फोटोग्राफी और सामुदायिक सेवा तक फैली सक्रिय छात्र सोसाइटी हैं.

एम्स दिल्ली 2016 में एनआइआरएफ (नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क) की मेडिकल रैंकिंग शुरू होने के बाद से ही इसमें हर साल शीर्ष पर आता रहा है और लगातार दसवें साल भारत के सबसे ऊंचे पायदान का चिकित्सा संस्थान बना हुआ है.

संस्थान मेडिकल की पढ़ाई-लिखाई में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लगातार ज्यादा से ज्यादा शामिल कर रहा है. उसने हाल ही इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर एआइ इन हेल्थ लॉन्च किया जिसमें अनुसंधान, क्लिनिकल इनोवेशन और चिकित्सा प्रशिक्षण एक साथ शामिल हैं. 

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