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इंडिया टुडे बेस्ट कॉलेज सर्वे 2026: बेमिसाल बनने की जद्दोजहद

इंडिया टुडे ग्रुप का बेस्ट कॉलेज सर्वे अपने 30वें संस्करण में पहुंचा. यहां पेश हैं देश के उच्च शिक्षा परिदृश्य को समझाने वाली इस व्यापक गाइड के अब तक के सफर से निकले 30 अहम निष्कर्ष

इलस्ट्रेशन: नीलांजन दास/एआइ
अपडेटेड 6 जुलाई , 2026

लाखों जवान हिंदुस्तानियों को कॉलेज सिर्फ डिग्री नहीं देता. यह बेहतर कमाई, व्यापक दायरा, पेशेवर नेटवर्क, सामाजिक आत्मविश्वास और इलाकों, उद्योगों तथा तबके की सीमाओं के पार जाने की क्षमता का दरवाजा खोलता है.

आबादी के फायदे के लिहाज से शिखर के करीब पहुंच रहे देश में उच्च शिक्षा खुद की और राष्ट्रीय आकांक्षा, दोनों के केंद्र में बनी हुई है. लेकिन कॉलेज की डिग्री का अर्थ बदल गया है.

नौकरी का बाजार कठिन हो गया है, तकनीक हुनर को नया आकार दे रही है और स्नातकों में बेरोजगारी चिंता का विषय बनी हुई है. आज डिग्री के संग पढ़ाने की ठोस पद्धति, प्रासंगिक पाठ्यक्रम, व्यावहारिक प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, भरोसेमंद मूल्यांकन और नियोक्ताओं से जुड़ाव भी जरूरी है.

इसीलिए सही कॉलेज चुनना अब सही कोर्स चुनने जितना ही खास हो गया है. यह फैसला किसी युवा की पेशेवर आकांक्षा को आकार दे सकता है. यह भी तय कर सकता है कि परिवार का आर्थिक निवेश फायदा देता है या पछतावा. सरकारी और निजी कॉलेज की फीस के बीच फर्क बहुत बड़ा हो सकता है, खासकर मेडिकल, इंजीनियरिंग, कानून, डिजाइन और आर्किटेक्चर जैसे क्षेत्रों में. ऐसे परिदृश्य में अपने तीसवें वर्ष में पहुंचा इंडिया टुडे ग्रुप का बेस्ट कॉलेज सर्वे मददगार बनकर सामने आता है.

नवाचार, एक्युरेसी और विश्वसनीयता पर आधारित यह सर्वे छात्रों, अभिभावकों, शिक्षकों और अन्य संबंधित पक्षों के लिए देश के कॉलेजों के माहौल का आकलन करने का भरोसेमंद पैमाना है. दिल्ली स्थित मार्केट रिसर्च एजेंसी एमडीआरए से कराए गए इस सर्वे में कॉलेज की प्रतिष्ठा से आगे जाकर फैकल्टी की गुणवत्ता, बुनियादी ढांचा, विविधता, फीस, फंडिंग, इंटर्नशिप, प्लेसमेंट, अकादमिक प्रगति और कैंपस माहौल जैसे पहलुओं को देखा जाता है. इससे परिवारों को विज्ञापन से अलग असली प्रदर्शन और संस्था की महत्वाकांक्षा को समझने में मदद मिलती है.

जब यह सर्वे शुरू हुआ था, तब देश में आज की तुलना में बहुत कम कॉलेज थे और उनकी तुलना करने का लगभग कोई स्वतंत्र तरीका नहीं था. आज देश में 50,000 से ज्यादा कॉलेज हैं. विकल्प इतने ज्यादा हैं कि भ्रम पैदा करते हैं और दांव भी बहुत ऊंचा है. पिछले 30 वर्षों में इस सर्वे ने अपना दायरा लगातार बढ़ाया और निखारा है. इसमें नए विषय जोड़े गए, ज्यादा निष्पक्ष तुलना के लिए सरकारी और निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों को अलग किया गया और छात्रों तथा अभिभावकों को व्यावहारिक फैसले लेने में मदद देने के लिए रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट रैंकिंग शुरू की गई.

अब यह सर्वे शहर और जोन के आधार पर उत्कृष्टता को मापता है, आर्ट्स और साइंस में विषयवार प्रदर्शन के आधार पर कॉलेजों को रैंक देता है और 2000 के बाद स्थापित उभरते संस्थानों की पहचान करता है, ताकि उनकी तुलना पुराने प्रतिष्ठित कैंपसों से निष्पक्ष तरीके से हो सके. हर साल की स्थिति में बदलाव को ट्रैक करके, एक साल में सबसे बड़ी छलांग लगाने वाले कॉलेजों को पहचानकर और हाल में पांच साल की अवधि में सबसे ज्यादा सुधार वाले कॉलेजों को सम्मानित करके यह सर्वे सिर्फ यह नहीं बताता कि संस्थान कहां खड़े हैं, बल्कि यह भी कि वे कितनी तेजी से ऊपर उठ रहे हैं.

हमारी रैंकिंग के इस तीसवें संस्करण में ये 30 खास बातें उभरकर सामने आती हैं:

1 शीर्ष पर नाम नहीं बदले हैं. हिंदू कॉलेज आर्ट्स और साइंस, दोनों में पहले स्थान पर है. एसआरसीसी कॉमर्स में सबसे आगे है. एम्स दिल्ली, आइआइटी दिल्ली और एनएलएसआइयू बेंगलूरू क्रमश: मेडिसिन, इंजीनियरिंग और लॉ में शीर्ष पर हैं.

2 असली ऑलराउंडर किसी एक क्षेत्र में नहीं, बल्कि कई क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हैं. हिंदू कॉलेज आर्ट्स और साइंस में आगे है और कॉमर्स में भी ऊंची रैंक पर है. क्राइस्ट कॉमर्स, साइंस, बीसीए और इंजीनियरिंग में जगह बनाता है. लोयोला, मद्रास क्रिश्चियन और एसवीकेएम्'स मीठीबाई कई विषय तालिकाओं में बार-बार दिखते हैं.

3 दिल्ली-एनसीआर अब भी उच्च शिक्षा का सबसे बड़ा केंद्र है. अलग-अलग स्ट्रीम्स में टॉप 10 रैंक में इस क्षेत्र के 44, टॉप 25 में 96 और टॉप 50 में चौंकाने वाले 143 हैं. यह दो शहरों को मिलाकर भी ज्यादा है.

4 लेकिन दक्षिण भारत देश की शांत ताकत है. बेंगलूरू और चेन्नै ने मिलकर टॉप 10 में 34 स्थान हासिल किए हैं. बेंगलूरू के क्राइस्ट, क्रिस्टु जयंती और सेंट जोसम्स कॉलेज उनकी जगह ले रहे हैं, जिनमें कभी पुराने प्रतिष्ठित नामों का कब्जा था.

5 बेंगलूरू नए भारत की शिक्षा राजधानी है. दिल्ली के पास विरासत है, तो बेंगलूरू के पास उभरते भारत का ताज. यह उभरते कॉलेजों की सूचियों में शीर्ष पर है.

6 लगभग हर कोर्स के लिए एक श्रेष्ठ शहर है. सर्वे में स्ट्रीम के आधार पर देश में बंटवारा इस प्रकार है: बीबीए और बीसीए के लिए बेंगलूरू, कॉमर्स के लिए मुंबई, साइंस और सोशल वर्क के लिए चेन्नै और कोयंबत्तूर, डेंटल के लिए मंगलूरू, लॉ और होटल मैनेजमेंट के लिए पुणे.

7 अच्छी शिक्षा महंगी होना जरूरी नहीं. सर्वे में तमिलनाडु के तूतीकोरिन (तूतुकुडी) स्थित ए.पी.सी. महालक्ष्मी कॉलेज फॉर विमेन में आर्ट्स और कॉमर्स की पूरे कोर्स की सबसे कम फीस 959 रुपए है. कई बेहतरीन कॉलेजों की तीन साल की फीस किसी महानगर में एक महीने की कोचिंग फीस से भी कम है.

8 निजी और सरकारी कॉलेजों की फीस में भारी फर्क है. अलीगढ़ के जाकिर हुसैन कॉलेज में सरकारी इंजीनियरिंग सीट का पूरे कोर्स का खर्च 43,633 रुपए है, जबकि निजी कॉलेजों में इंजीनियरिंग फीस कई लाख रुपए तक है.

9 रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (आरओआइ) अब अपने आप में एक रैंकिंग है. यह सर्वे की सबसे व्यावहारिक नई पहलकदमियों में से एक है. इसमें औसत वेतन को कुल कोर्स फीस से भाग देकर पैसे की वैल्यू का स्कोर निकाला जाता है. मुंबई का सिडेनहैम कॉलेज ऑफ कॉमर्स 26.75 के स्कोर के साथ कॉमर्स आरओआइ में शीर्ष पर है.

10 सबसे ज्यादा वेतन हमेशा सबसे अच्छा सौदा नहीं होता. आइआइआइटी हैदराबाद ने प्राइवेट इंजीनियरिंग में सर्वे का सबसे बड़ा पैकेज 37.4 लाख रुपए दर्ज किया. फिर भी फीस के मुकाबले रिटर्न के आधार पर कोल्लम का अपेक्षाकृत कम खर्च वाला टीकेएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग उससे आगे है.

11 सबसे सस्ता कॉलेज और सबसे महंगा कॉलेज, दोनों 'बेस्ट वैल्यू' वाले हो सकते हैं. आरओआइ स्कोरिंग का मतलब है कि 959 रुपए की आर्ट्स डिग्री और कई लाख रुपए का इंजीनियरिंग प्रोग्राम, दोनों अपनी-अपनी वैल्यू तालिका में शीर्ष पर आ सकते हैं.

12 इंजीनियरिंग में सरकारी कॉलेज अब भी फायदेमंद हैं. आइआइटी दिल्ली, डीटीयू या अलीगढ़ का जाकिर हुसैन कॉलेज, सरकारी इंजीनियरिंग संस्थान की आरओआइ निजी के मुकाबले ज्यादा है.

13 प्लेसमेंट रिकॉर्ड अनुमान पर नहीं, रिपोर्ट किए गए आंकड़ों पर आधारित हैं. लेडी श्रीराम कॉलेज कॉमर्स प्लेसमेंट में 11.9 लाख रुपए के औसत पैकेज के साथ आगे है. आइआइटी दिल्ली सरकारी इंजीनियरिंग में 27.8 लाख रुपए के औसत पैकेज के साथ शीर्ष पर है. ये कॉलेजों के सत्यापित आंकड़े हैं, जो ब्रोशर के दावों की हकीकत जांचते हैं.

14 जब तक सर्वे में देश में पढ़ाए जाने वाले सभी विषय नहीं आ गए, हम विषय जोड़ते रहे. शुरुआत में कुछ ही स्ट्रीम्स थीं. अब रैंकिंग 14 स्ट्रीम्स तक फैल चुकी है. देश की आकांक्षाएं विविध होने के साथ डेंटल और आर्किटेक्चर भी जोड़े गए.

15 निष्पक्ष तुलना के लिए हमने सरकारी और निजी इंजीनियरिंग कॉलेजों को अलग किया. सरकार से वित्तपोषित आइआइटी और स्व-वित्तपोषित निजी संस्थान एक ही मैदान में नहीं खेल रहे. उन्हें अलग-अलग रैंक करने से अभिभावक समान संस्थानों की तुलना कर पाते हैं: आइआइटी दिल्ली की आइआइटी कानपुर से, बिट्स पिलानी की आइआइआइटी हैदराबाद से.

16 हमने सिर्फ कॉलेजों की नहीं, विषयों की भी रैंकिंग शुरू की. 2023 से सर्वे अलग-अलग विषयों—फिजिक्स, केमिस्ट्री, इकोनॉमिक्स, हिस्ट्री, इंग्लिश, साइकोलॉजी, पॉलिटिकल साइंस, सोशियोलॉजी आदि—को रैंक करता है. जो छात्र इकोनॉमिक्स पढ़ना चाहता है, वह देख सकता है कि उसमें हिंदू कॉलेज आगे है, भले ही विषय दर विषय क्रम बदलता हो.

17 हमने 'उभरते कॉलेज' श्रेणी बनाई, ताकि नए संस्थानों को निष्पक्ष मौका मिले. 2000 या उसके बाद स्थापित कॉलेजों को आपस में आंका जाता है, न कि सदी पुराने संस्थानों से. इसी वजह से क्रिस्टु जयंती जैसे नाम सामने आते हैं.

18 हम हर साल की बढ़त को ट्रैक करते हैं और सबसे सुधार वालों को पहचानते हैं. सर्वे वर्तमान की ही नहीं, संस्थानों की दिशा भी देखता है. एनआइटी मेघालय इस साल इंजीनियरिंग में 11 स्थान चढ़कर 45वें स्थान पर पहुंचा. आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज ने साइंस में बढ़त दर्ज की.

19 हमने 'सबसे ज्यादा सुधार वाले कॉलेज' शुरू किया, ताकि 2022 से 2026 के बीच पांच साल की रैंकिंग वृद्धि को पकड़ा जा सके. इसे एक साल की छलांग नहीं, प्रतिशत सुधार के रूप में मापा गया, जिससे बदलाव वाले संस्थानों को सम्मान मिले.

20 सूची में नए कॉलेज यह साबित करते हैं कि रैंकिंग कोई बंद क्लब नहीं है. श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज, जीसस ऐंड मेरी कॉलेज और रामनारायण रुइया इस साल पहली बार आर्ट्स के टॉप 25 में आए. आरवी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने निजी इंजीनियरिंग टॉप 10 में जगह बनाई.

21 हम सिर्फ राष्ट्रीय स्तर पर नहीं, शहरों और जोन के आधार पर भी रैंक करते हैं. शहरवार टॉप-थ्री और चार जोन की क्षेत्रीय रैंकिंग का मतलब है कि पटना, कोच्चि या चंडीगढ़ का छात्र अपनी पहुंच के भीतर सबसे अच्छा विकल्प ढूंढ सकता है.

22 इसका तरीका खुद इस सर्वे का लंबे समय से चल रहा नवाचार है. 2018 से एमडीआरए के साथ किए जा रहे इस सर्वे में वेटेज स्थिर रखे गए हैं, ताकि साल-दर-साल ईमानदारी से तुलना हो सके. सर्वे की सबसे बड़ी उपलब्धि उसकी निरंतरता है.

23 हर रैंकिंग प्रति स्ट्रीम 112 से ज्यादा संकेतकों पर आधारित है. इनमें इनटेक क्वालिटी और गवर्नेंस, अकादमिक उत्कृष्टता, बुनियादी ढांचा और रहने का अनुभव, व्यक्तित्व तथा नेतृत्व विकास, करियर प्रगति और प्लेसमेंट शामिल हैं. मानकवार स्कोर दिखाते हैं कि कोई कॉलेज अपनी जगह पर क्यों डटा है.

24 एमडीआरए कॉलेजों का मूल्यांकन मौजूदा वर्ष के डेटा पर करता है, जमा किए गए विवरणों की दोबारा जांच करता है और छात्रों की संख्या के आधार पर उन्हें सामान्यीकृत करता है, ताकि कोई बड़ा कॉलेज सिर्फ संख्या के आधार पर बाकियों से आगे न निकल जाए.

25 प्रतिष्ठा को मापा जाता है लेकिन उसे उसकी जगह पर रखा जाता है. 27 शहरों के 1,889 जानकार उत्तरदाताओं—सीनियर फैकल्टी, रिक्रूटर्स, करियर काउंसलर्स और अंतिम वर्ष के छात्रों—के धारणा सर्वेक्षण को ठोस डेटा के साथ तौला जाता है. पेशेवर कोर्सों में अनुपात 60:40 और अकादमिक कोर्सों में 50:50 रखा गया है.

26 केवल गंभीर और स्थापित संस्थान ही सूची में आते हैं. किसी कॉलेज को विचार के लिए फुलटाइम, क्लासरूम आधारित कोर्स चलाना चाहिए और 2025 तक उसके कम से कम तीन बैच पास आउट हो चुके होने चाहिए.

27 आठ वर्षों में भागीदारी दोगुनी से ज्यादा हो गई है. 2018 में 988 कॉलेज थे, जो 2026 में बढ़कर 2,016 हो गए.

28 छोटे शहर चुपचाप टॉप-30 कॉलेज दे रहे हैं. कम खर्च वाली आर्ट्स शिक्षा के लिए तूतीकोरिन, टेक्नोलॉजी और डेंटल के लिए करकला और मंगलूरू इसके उदाहरण हैं.

29 जहां सबसे ज्यादा मायने रखता है, वहां महिला कॉलेजों का दबदबा है. मिरांडा हाउस, लेडी श्रीराम, दौलतराम, जीसस ऐंड मेरी, माउंट कार्मेल, स्टेला मैरिस—महिला संस्थान आर्ट्स, साइंस और साइकोलॉजी में शीर्ष रैंकों पर छाए हुए हैं.

30 कुछ ही कॉलेज सचमुच ऑलराउंडर हैं. हिंदू कॉलेज आर्ट्स और साइंस में शीर्ष पर है और कॉमर्स में भी ऊंची रैंक रखता है. क्राइस्ट कॉमर्स, साइंस, बीसीए और इंजीनियरिंग में बढ़त पर है.

52,243 संख्या है देश भर में कुल मान्यता प्राप्त कॉलेजों की

16,788 संख्या है विशेषज्ञ पाठ्यक्रम मुहैया कराने वाले स्टैंडअलोन या अपने में अलग संस्थानों की

सर्वेक्षण का तरीका

किस तरह से की गई कॉलेजों की रैंकिंग

आज देश में 50,000 से ज्यादा कॉलेज हैं. ऐसे में इंडिया टुडे ग्रुप की देश के कॉलेजों की रैंकिंग का तीसवां वार्षिक संस्करण समृद्ध जानकारी और डेटा के आधार पर छात्रों के लिए अहम करियर फैसले आसान बनाने का प्रयास है. इसने नियोक्ताओं, अभिभावकों, पूर्व छात्रों, नीति निर्माताओं, आम जनता और संस्थानों जैसे दूसरे संबंधित पक्षों के लिए खुद को गोल्ड स्टैंडर्ड के रूप में स्थापित किया है.

2018 से यह सर्वे दिल्ली स्थित प्रतिष्ठित मार्केट रिसर्च एजेंसी मार्केटिंग ऐंड डेवलपमेंट रिसर्च एसोसिएट्स (एमडीआरए) के साथ मिलकर किया जा रहा है और निरंतरता के लिए इसकी व्यापक सराहना हुई है. कॉलेजों को 14 स्ट्रीम या विषय—आर्ट्स, साइंस, कॉमर्स, मेडिकल, डेंटल, इंजीनियरिंग, आर्किटेक्चर, लॉ, मास कम्युनिकेशन, होटल मैनेजमेंट, बीबीए, बीसीए, सोशल वर्क और फैशन डिजाइन—में रैंक किया गया.

वस्तुनिष्ठ रैंकिंग के दौरान एमडीआरए ने हरेकविषय में 112 से ज्यादा प्रदर्शन संकेतकों को सावधानी से तय और संतुलित किया, ताकि कॉलेजों की व्यापक और संतुलित तुलना की जा सके. उन्हें पांच बड़े मानकों में रखा गया—'गुणवत्ता और गवर्नेंस', 'अकादमिक उत्कृष्टता', 'इन्फ्रास्ट्रक्चर और रहने का अनुभव', 'पर्सनैलिटी और लीडरशिप डेवलपमेंट' और 'करियर प्रोग्रेशन और प्लेसमेंट'.

इसके अलावा, ज्यादा वास्तविक, प्रासंगिक और सटीक जानकारी देने के लिए एमडीआरए ने कॉलेजों का मूल्यांकन मौजूदा वर्ष के डेटा के आधार पर किया. रैंकिंग तालिकाओं में मानकवार स्कोर भी दिए गए हैं, ताकि अलग-अलग संबंधित पक्षों को निर्णय लेने से जुड़े अहम पहलुओं पर गहरी समझ मिल सके. इसके साथ ही 2023 से सर्वे ने कॉलेजों की ओर से जमा किए गए वस्तुनिष्ठ डेटा के आधार पर प्रमुख विषयों में पहली बार कॉलेजों की रैंकिंग शुरू की है. इनमें इकोनॉमिक्स, हिस्ट्री, इंग्लिश, साइकोलॉजी, सोशियोलॉजी, पॉलिटिकल साइंस, फिजिक्स, केमिस्ट्री, बॉटनी, जूलॉजी, हिंदी और संस्कृत जैसे विषय शामिल हैं.

रैंकिंग कई चरणों में की गई
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हर स्ट्रीम में कॉलेजों की सूची तैयार करने के लिए एमडीआरए के डेटाबेस और सेकंडरी रिसर्च की व्यापक डेस्क समीक्षा की गई. केवल उन्हीं कॉलेजों पर विचार किया गया, जो फुल-टाइम, क्लासरूम आधारित कोर्स चलाते हैं और जिनके कम से कम तीन बैच 2025 तक पास आउट हो चुके हैं. 12 स्ट्रीम में अंडरग्रेजुएट कोर्सों की रैंकिंग की गई. मास कम्युनिकेशन और सोशल वर्क में पोस्टग्रेजुएट कोर्सों का मूल्यांकन किया गया.

> अलग-अलग स्ट्रीम के लिए मानक और उप-मानक तय करने में अपने-अपने क्षेत्रों का गहरा अनुभव रखने वाले विशेषज्ञों से सलाह ली गई. श्रेष्ठ कॉलेजों की पहचान के लिए अहम संकेतकों को सावधानी से तय किया गया और उनके सापेक्ष वेटेज अंतिम रूप दिए गए. साल-दर-साल निष्पक्ष तुलना के लिए मानकों के वेटेज पिछले दो वर्षों से अपरिवर्तित रखे गए हैं.

> इन संकेतकों को ध्यान में रखते हुए 14 स्ट्रीम में से हरेक के लिए व्यापक वस्तुनिष्ठ प्रश्नावली तैयार की गई और उन्हें सार्वजनिक डोमेन में रखा गया—इंडिया टुडे और एमडीआरए की वेबसाइटों पर. एमडीआरए ने पात्रता मानदंड पूरा करने वाले करीब 10,000 कॉलेजों से सीधे संपर्क किया और सत्यापन के लिए वस्तुनिष्ठ डेटा मांगा. सत्यापित सॉफ्ट कॉपी मांगी गईं. कुल 2,016 में से 1,973 मानक पर खरे उतरे कॉलेजों ने भाग लिया और उन्हें रैंक किया गया. जो कुछ कॉलेज खरे नहीं उतरे, उन्हें रैंक नहीं किया गया.

> हिस्सा लेने वाले कॉलेजों से वस्तुनिष्ठ डेटा मिलने के बाद एमडीआरए ने उनकी दी गई जानकारी का सत्यापन किया. जिन मामलों में डेटा अधूरा या गलत था, वहां संबंधित कॉलेजों से पूरी, सही और अपडेटेड जानकारी देने को कहा गया.

> इन कॉलेजों को लेकर 27 शहरों में चार जोन में बंटे 1,889 जानकार विशेषज्ञों के बीच धारणा सर्वेक्षण किया गया. इनमें 608 वरिष्ठ फैकल्टी सदस्य, 329 नियोक्ता/पेशेवर, 381 करियर एक्सेलरेटर और 571 अंतिम वर्ष के छात्र शामिल थे.

उत्तर: दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, लखनऊ, कोटा, अमृतसर, चंडीगढ़, लुधियाना और जालंधर

पूरब: कोलकाता, भुवनेश्वर, गुवाहाटी, पटना और रायपुर

पश्चिम: मुंबई, पुणे, अहमदाबाद, इंदौर, भोपाल और नागपुर

दक्षिण: चेन्नै, बेंगलूरू, हैदराबाद, कोच्चि और कोयंबत्तूर

> उनसे उनके अनुभव के संबंधित क्षेत्र में राष्ट्रीय और जोनल रैंकिंग ली गई. इन्हें क्रमश: 75 फीसद और 25 फीसद वेटेज दिया गया. संस्थानों को पांच मुख्य मानकों में से हरेक पर 10 अंकों के रेटिंग पैमाने पर भी आंका गया.

> वस्तुनिष्ठ स्कोर की गणना करते समय इस बात को आश्वस्त किया गया कि केवल एग्रीगेट डेटा का ही इस्तेमाल न हो. इसलिए निष्पक्ष तुलना के लिए डेटा को छात्रों की संख्या के आधार पर सामान्यीकृत किया गया. वस्तुनिष्ठ और धारणा सर्वेक्षण से मिले कुल स्कोर को 11 पेशेवर कोर्सों के लिए 60:40 के अनुपात में जोड़ा गया, जबकि अकादमिक कोर्सों—आर्ट्स, साइंस और कॉमर्स—के लिए 50:50 का अनुपात रखा गया. इसी से अंतिम संयुक्त स्कोर निकाला गया.

सबसे ज्यादा सुधार करने वाले कॉलेज
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पिछले साल से इंडिया टुडे-एमडीआरए बेस्ट कॉलेज सर्वे में 'सबसे ज्यादा सुधार वाले कॉलेज' रैंकिंग शुरू की गई है. इसमें उन संस्थानों को मापा जाता है, जिन्होंने समय के साथ सबसे ज्यादा प्रगति दिखाई है. यह रैंकिंग 14 स्ट्रीम में कॉलेजों की पांच साल की विकास यात्रा को लेकर है. इसके लिए 2022 से 2026 तक वार्षिक रैंकिंग में उनकी सापेक्ष स्थिति में बदलाव का विश्लेषण किया जाता है. इसमें रैंक में प्रतिशत सुधार पर ध्यान दिया जाता है, जिससे संस्थागत प्रदर्शन की स्थिर तस्वीर के बजाए गतिशील नजरिया मिलता है.

पांच साल की अवधि में जिस कॉलेज की रैंक में सबसे ज्यादा प्रतिशत बढ़त दर्ज होती है, उसे इस सूची में शीर्ष पर रखा जाता है. उसके बाद अन्य कॉलेज सुधार के घटते क्रम में आते हैं. यह नई श्रेणी शैक्षणिक संस्थानों की ओर से अपनी स्थिति और गुणवत्ता सुधारने के लिए किए गए परिवर्तनकारी प्रयासों का प्रमाण है. यह छात्रों, अभिभावकों, नियोक्ताओं और नीति-निर्माताओं को लगातार संस्थागत विकास का आकलन करने के लिए नया नजरिया देती है.

> इस सर्वेक्षण परियोजना के काम में शोधकर्ताओं, सांख्यिकीविदों और विश्लेषकों की एक अनुभवी और बड़ी टीम ने सक्रिय हिस्सेदारी की. इसमें कार्यकारी निदेशक अभिषेक अग्रवाल के नेतृत्व वाली एमडीआरए की मुख्य टीम में वरिष्ठ परियोजना निदेशक अबनीश झा, डिप्टी रिसर्च मैनेजर वैभव गुप्ता, रिसर्च एग्जीक्यूटिव रॉबिन सिंह और ऋषभ शर्मा, और असिस्टेंट मैनेजर ईडीपी मनवीर सिंह और महेश जोशी वगैरह शामिल थे.

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