- हृजयदास कानूनगो
भारत में सामाजिक कलंक और व्यवस्थागत नाइंसाफी मिगुएल दास क्वेह को हमेशा परेशान करती थी. इस युवा स्नातक को 2008 में इसका जवाब एक सवाल में मिला जो उनसे एक बातचीत के दौरान तब के राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने पूछा था. जब वे अपने चारों तरफ हो रही कई गड़बड़ियों के बारे में गुस्सा होकर शिकायत कर रहे थे तो कलाम ने पूछा, ''इसे ठीक करने के लिए तुम क्या कर सकते हो? क्या तुम्हारे पास कोई योजना है?'' मिगुएल के पास ऐसी कोई योजना नहीं थी. कलाम ने सलाह दी—''बाहर निकलो और काम करो. तुम खुद ही समझ जाओगे''—और यही सलाह उन्हें रास्ता दिखाने वाली रोशनी बन गई.
मिगुएल की शुरुआती योजना दिल्ली में युवाओं के मुद्दों पर ध्यान देने वाला एनजीओ शुरू करने की थी. लेकिन गुवाहाटी के एक ओल्ड एज होम में मशहूर साहित्यकार मामोनी रायसोम गोस्वामी से मुलाकात के बाद उनका इरादा बदल गया. उन्होंने उनसे पूछा कि तुम दिल्ली में क्या कर रहे हो? उनके शब्द—''अगर तुम अपना आंगन साफ नहीं कर सकते तो तुम दुनिया की सफाई नहीं कर सकते''—उनके मन में बस गए.
मिगुएल ने अपने ही आंगन यानी गुवाहाटी में अपने घर के नजदीक झुग्गी बस्ती हाफिज नगर से शुरुआत की. वहां के बाशिंदों से बात करके उन्हें पता चला कि बड़े लोग तो बदसुलूकी, कम मेहनताने और दुश्वारियों के बारे में बात करते थे, लेकिन बच्चे ज्यादातर चुप थे. उनके मन में खलबली मच गई. वे खुद बचपन में यौन बदसुलूकी का शिकार हो चुके थे. मिगुएल को एहसास हुआ कि बच्चों के पास अपनी परेशानियां बयान करने के लिए अक्सर भाषा, जगह और सुरक्षा नहीं होती. उन्हें अपना मकसद अंतत: मिल ही गया, और वह था बच्चों का कल्याण, सुरक्षा और सशक्तीकरण.
यही 'उत्साह' बन गया, जिसका असमिया में अर्थ होता है प्रेरणा. 2011 में मिगुएल ने इसका विधिवत पंजीकरण करवाया. उत्साह ने शुरुआत औपचारिक शिक्षा सत्रों और सफाई अभियानों से की और फिर सुव्यवस्थित कानूनी हस्तक्षेप का रुख किया. तभी मार्च 2013 में होली के दौरान उसने अपना पहला बाल यौन शोषण का मामला संभाला. यह इस इलाके में पोक्सो कानून के तहत अभियोजन के बिल्कुल शुरुआती मामलों में था. इसमें 2014 में दोषसिद्धि के बाद उत्साह असम के बाल संरक्षण ढांचे के केंद्र में आ गया.
उत्साह और असम पुलिस ने मिलकर 2017 में बच्चों के अनुकूल पुलिस व्यवस्था बनाने का सुव्यवस्थित कार्यक्रम तैयार किया. असम पुलिस शिशु मित्र कार्यक्रम औपचारिक रूप से 2019 में लॉन्च किया गया, जिसके मूल में सहानुभूति को रखा गया. इसमें पुलिसकर्मियों को वर्दी पहने बिना बच्चों के साथ बातचीत करने, बाल कल्याण समितियों के सामने समय से पेश होने, सही दस्तावेज तैयार करने, सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल बिठाने और इंसाफ कायम करने का प्रशिक्षण दिया जाता है.
सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में बाल सुरक्षा पर हितधारकों के साथ सालाना सलाह-मशविरे में शिशु मित्र और उत्साह के संस्थापक को उज्ज्वल उदाहरण कहकर सराहा. मिगुएल के लिए पीड़ित बच्चों की आवाज बनने और उन्हें राहत दिलाने के प्रयास की इससे बेहतर मुहर कुछ और नहीं हो सकती थी.
पीड़िता की राय
उत्साह से मदद लेने वाली एक पीड़िता की मां ने कहा, ''मेरी बेटी जब मात्र 12 साल की थी तभी गुवाहाटी के एक प्रभावशाली हृदयरोग विशेषज्ञ ने उस पर यौन हमला किया था. मामले को उठाने पर उसने हमें धमकी दी. उत्साह ने हमें उससे लड़ने की हिम्मत दी.''
आखिर क्यों है यह एक रत्न
> साल 2013 से बाल यौन शोषण के शिकार 300 बच्चों को एफआइआर दर्ज कराने से लेकर जांच और मुकदमे तक पूरी सहायता दी गई.
> पोक्सो के 300 मामलों में कानूनी सहायता दी गई, जिससे सभी मामलों में गिरफ्तारियां हुईं और 50 मामलों में दोष सिद्ध हुआ.
> असम पुलिस शिशु मित्र कार्यक्रम में 3,000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों को बच्चों से जुड़े कानूनों, बच्चों के अनुकूल प्रक्रियाओं और जांच के नियम-कायदों का प्रशिक्षण दिया गया.

