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जिससे है पहचान हमारी

नवतेज सरना अपनी किताब 'अ फ्लैग टू लिव ऐंड डाइ फॉर' में दिल्ली सल्तनत, मुगल और मराठा परंपराओं के उदाहरणों से बताते हैं कि भारत में ध्वज हमेशा से सत्ता, युद्ध और गौरव से जुड़े रहे हैं.

नवतेज सरना की किताब 'अ फ्लैग टू लिव ऐंड डाइ फॉर'
नवतेज सरना की किताब 'अ फ्लैग टू लिव ऐंड डाइ फॉर'
अपडेटेड 11 मार्च , 2026

नवतेज सरना की पुस्तक अ फ्लैग टू लिव ऐंड डाइ फॉर एक राष्ट्र की भावनात्मक संरचना की सूक्ष्म कथा है. यह समझने का प्रयास कि तिरंगा हमारे लिए एक चिह्न भर नहीं बल्कि स्मृति, पीड़ा, संघर्ष और उम्मीद से रचा गया एक जीवित अनुभव है.

नवतेज के अनुसार तिरंगा उस साझी सांस्कृतिक अनुभूति का बयान है जो स्वतंत्रता दिवस की सुबह या शहीद को विदाई देते समय या किसी खेल के मैदान में राष्ट्रगान के साथ ध्वज फहराते हुए हमें भीतर तक स्पर्श करता है.

लेखक राष्ट्र भावना को सत्ता की भाषा से अलग कर स्मृति, नागरिक चेतना और नैतिक स्वीकृति के तौर पर स्थापित करते हैं.

इतिहास के स्तर पर नवतेज हमें प्राचीन भारत के ध्वज, केतु और पताका परंपराओं के अलावा महाभारत, कौटिल्य के अर्थशास्त्र से होते राजाओं, योद्धाओं और साम्राज्यों के प्रतीकों तक ले जाते हैं. दिल्ली सल्तनत, मुगल और मराठा परंपराओं के  उदाहरणों से वे बताते हैं कि भारत में ध्वज हमेशा से सत्ता, युद्ध और गौरव से जुड़े रहे हैं.

लेकिन आधुनिक तिरंगे की प्रकृति इन सबसे अलग है. यह किसी राजा का नहीं, बल्कि जनता का ध्वज है. पुस्तक की शुरुआत 1948 के ओलंपिक हॉकी फाइनल से होती है और अंत लेखक के चार दशक के डिप्लोमैट करियर और तिरंगे से उनके लगाव और एहसास से. बीच में हम पढ़ते हैं पिंगली वैंकय्या से लेकर नागपुर ध्वज सत्याग्रह, पूर्ण स्वराज की घोषणा, नमक सत्याग्रह और संविधान सभा में ध्वज के महत्व और उससे जुड़ी नागरिक आकांक्षाओं की कहानी.

एक पूर्व राजनयिक के रूप में लेखक का निजी अनुभव इस पुस्तक को अतिरिक्त गहराई देता है. वे दिखाते हैं कि प्रतीक कैसे अनुशासन, मर्यादा और विनम्रता की संस्कृति गढ़ते हैं.

पुस्तक की भाषा सधी हुई है. न कहीं अतिरंजना, न कहीं आक्रामकता. यह हमें भावुक करती है, विवेकशील बनाती है और सोचने पर विवश करती है कि ध्वज को केवल देखा नहीं जाता बल्कि उसके साथ अपने इतिहास, अपने घावों और अपने स्वप्नों को भी पढ़ा जाता है.

पुस्तक का नाम: अ फ्लैग टू लिव ऐंड डाइ फॉर
लेखक का नाम: नवतेज सरना
प्रकाशन: एलेफ बुक कंपनी
कीमत: 499 रुपए.

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