सहमति को आम तौर पर एक खास पल में बोले गए सिर्फ एक शब्द के रूप में देखा जाता है. सर्वे का यह हिस्सा एक ज्यादा गहरा पहलू सामने लाता है—सहमति सिर्फ एक बार 'हां’ कहना भर नहीं बल्कि अपनी मर्जी लगातार जाहिर करते रहने का नाम है. इसमें असहमत होने का अधिकार, अपनी इच्छा जताने का अधिकार और फैसला बदलने का अधिकार शामिल है.
सर्वे के नतीजे एक ऐसे देश की तस्वीर सामने रखते हैं जो कागजों पर दर्ज नियमों को अच्छी तरह समझता तो है लेकिन उन्हें अमल में लाने के मामले में संघर्ष कर रहा है. करीब 79 फीसद महिलाएं इस बात से सहमत हैं कि हर परिस्थिति में 'ना का मतलब ना’ ही होता है.
लेकिन केवल 56 फीसद महिलाओं का कहना है कि वे किसी अनचाही चीज के लिए सीधे मना कर पाती हैं; वहीं 41 फीसद महिलाएं घुमा-फिराकर अपने इनकार को थोड़ा नरम तरीके से सामने रखती हैं या फिर न चाहते हुए भी मान जाती हैं.
यह सर्वे जितना ज्यादा रिश्तों की गहराई में उतरता है, अंतर उतना ही बड़ा दिखता है. केवल 36 फीसद महिलाएं ही मानती हैं कि करीबी पलों में सहमति को साफ शब्दों में जाहिर किया जाना चाहिए; बाकी इशारों, आदत या विरोध न करने के सहारे रहती हैं. महिलाएं जब शारीरिक संबंध नहीं चाहतीं, तो 51 फीसद साफ तौर पर 'ना’ कह देती हैं, जबकि बाकी महिलाएं बहानों, असहजता या बाद में पछतावे जैसे बीच के रास्ते में उलझी रह जाती हैं.
इनकार के रास्ते में जोर-जबरदस्ती बहुत कम आड़े आती है. असल रुकावट महिला के 'ना’ के पीछे जुड़े जज्बाती पहलू होते हैं. 79 फीसद महिलाओं को लगा कि कभी-कभी उन्हें अपने इनकार की वजह बतानी पड़ी और उसे सही साबित करना पड़ा.
असहज होने के बावजूद महिलाएं चुप रह गईं तो उसकी सबसे बड़ी वजह—43 फीसद की राय—रिश्ते में शांति बनाए रखना था. तीन-चौथाई महिलाओं का कहना है कि अपनी बात खुलकर रखने वाली महिलाओं पर समाज झगड़ालू, घमंडी या 'ज्यादा मॉडर्न’ होने का ठप्पा लगा देता है.
दोहरे मापदंड इस जाल को पूरी तरह उलझा देते हैं. 61 फीसद का कहना है कि जो महिला अपनी शारीरिक इच्छाओं को खुलकर जाहिर करती है, उनके 'चरित्र को अच्छा नहीं’ माना जाता. जब 'ना’ कहना नाराजगी का कारण बनता हो और 'हां’ कहने पर चरित्र पर सवाल उठाए जा रहे हों तो ऐसे में दोनों तरफ से महिलाएं ही हारती हैं.
इस हिस्से से सर्वे की केंद्रीय अंतर्दृष्टि स्थापित होती है: सहमति शब्द और उसकी समझ तो भारत में आ चुकी है लेकिन उसके मुताबिक जीने की सामाजिक मंजूरी अभी दूर की कौड़ी है.

