कई लोग तब परेशान हो जाते हैं जब उनकी नींद लगातार कई रातों तक 3 बजे खुल जाती है. सोशल मीडिया पर इसके कई तरह के कारण बताए जाते हैं. इनमें ‘आध्यात्मिक जागरण’ से लेकर हार्मोन असंतुलन और ‘रहस्यमय ऊर्जा’ का बदलाव तक शामिल हैं. लेकिन जैसा कि मुंबई के सर एच.एन. रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल की क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट मेहेजाबिन दोरदी कहती हैं- सच्चाई अक्सर सीधी-सपाट होती है.
स्लीप एक्सपर्ट बताते हैं कि रात में थोड़ी देर के लिए नींद खुलना पूरी तरह सामान्य बात है. वास्तव में ज्यादातर लोगों की रात में कई बार नींद खुलती है लेकिन उन्हें अगली सुबह याद नहीं रहता. हालांकि अगर आपकी नींद हर रात लगभग एक ही समय पर खुलती है और फिर दोबारा सोने में दिक्कत होती है तो यह संकेत हो सकता है कि कोई चीज आपकी नींद में बाधा डाल रही है.
इसका एक संभावित कारण तनाव हो सकता है. शरीर का ‘स्ट्रेस हार्मोन’ कहलाने वाला कॉर्टिसोल सुबह के शुरुआती घंटों में स्वाभाविक रूप से बढ़ता है ताकि शरीर को जागने के लिए तैयार किया जा सके. जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक तनाव, चिंता, भावनात्मक दबाव या बर्नआउट का सामना कर रहा होता है तो यह प्रणाली अधिक संवेदनशील हो सकती है. इसका नतीजा यह होता है कि शरीर रात में ज्यादा सतर्क हो जाता है. इससे नींद खुलना आसान और दोबारा सो पाना मुश्किल हो सकता है.
हालांकि यह मान लेना सही नहीं होगा कि हर बार 3 बजे नींद खुलने की वजह कॉर्टिसोल ही है. नींद कई अन्य कारणों से भी प्रभावित हो सकती है. चिंता और अवसाद इसके आम कारण हैं. इसके अलावा स्लीप एपनिया, लंबे समय तक रहने वाला दर्द, एसिड रिफ्लक्स और हार्मोन में बदलाव जैसी मेडिकल कंडीशन भी नींद में बाधा डाल सकती हैं.
कुछ दवाएं भी नींद को प्रभावित कर सकती हैं. वहीं देर से कैफीन पीना, सोने से पहले लैपटॉप-मोबाइल स्क्रीन देखना, शाम को ड्रिंक करना या सोने-जागने का अनियमित समय रखना जैसी रोजमर्रा की आदतें भी रात में बीच में नींद खुलने की संभावना बढ़ा सकती हैं.
कई लोगों को सबसे ज्यादा बेचैन करने वाली बात नींद खुलने के बाद की होती है. अचानक दिमाग में विचारों की दौड़ शुरू हो जाती है. जो समस्याएं दिन में छोटी लगती थीं वे रात के बीच में बहुत बड़ी महसूस होने लगती हैं. काम, रिश्तों, पैसों या स्वास्थ्य से जुड़ी छोटी-छोटी चिंताएं भी अचानक वास्तविकता से कहीं ज्यादा गंभीर लग सकती हैं.
इसका यह मतलब नहीं है कि कोई गंभीर समस्या है. रात के समय जब ध्यान भटकाने वाली चीजें कम होती हैं और आप अपने विचारों के साथ अकेले होते हैं तब चिंताएं ज्यादा दबाव डालत सकती हैं. अगर आपका शरीर पहले से ही तनाव के कारण कुछ हद तक सक्रिय है तो आपका दिमाग तुरंत ऐसी चीजें तलाशने लग सकता है जिनके बारे में सोचा जाए या जिनका समाधान निकाला जाए.
सिर्फ इस बात पर ध्यान देने के बजाय कि आपकी नींद 3 बजे खुली, इस बात पर गौर करें कि नींद खुलने के बाद क्या होता है. क्या आप काम के बारे में सोच रहे हैं? क्या आपको कोई चिंता हो रही है? क्या आपको असहजता, दर्द, ज्यादा गर्मी, सांस लेने में परेशानी या हॉट फ्लैशेज जैसे लक्षण महसूस हो रहे हैं? ये संकेत अक्सर घड़ी में दिख रहे समय से ज्यादा उपयोगी जानकारी देते हैं.
ज्यादातर मामलों में, रात 3 बजे नींद खुलना आपके शरीर की ओर से कोई छिपा हुआ संदेश नहीं होता. यह केवल इस बात का संकेत है कि कोई चीज आपकी आरामदायक नींद में बाधा डाल रही है. यह तनाव, जीवनशैली से जुड़ी आदतें या कोई मेडिकल इश्यू हो सकता है. अगर यह समस्या कई हफ्तों तक बनी रहती है, आपकी दिनचर्या को प्रभावित करती है या आपको लगातार थकान महसूस होती है तो जवाब खोजने के लिए ऑनलाइन सॉल्यूशन पर भरोसा करने के बजाय डॉक्टर से बात करना बेहतर होगा.

