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अंडर-19 विश्व कप : वैभव सूर्यवंशी के अलावा ये चेहरे बन सकते हैं भारतीय क्रिकेट का भविष्य

अंडर-19 विश्व कप की खास बात यह रही कि इस पूरे टूर्नामेंट में भारत एक भी मैच नहीं हारा और हर मैच में अलग-अलग खिलाड़ी मैच विनर बने

वैभव सूर्यवंशी (बाएं) के साथ आयुष महात्रे (दाएं)
अपडेटेड 7 फ़रवरी , 2026

अंडर-19 क्रिकेट की नई सनसनी वैभव सूर्यवंशी का कहना है कि भारत के विश्व विजेता बनने के बाद फाइनल वाले दिन सुबह साढ़े चार बजे तक उन्हें नींद नहीं आई थी. आती भी कैसे. इसके पहली वाली शाम को जब वैभव ने अपने पिता को बिहार के समस्तीपुर में फोन किया तो उन्होंने इस बात पर चिंता जाहिर कि हर दौरे पर शतक बना लेकिन विश्व कप में अच्छी शुरुआत के बावजूद वे आउट हो जा रहे हैं. इसके बाद उनके पिता ने सलाह दी कि तुम अच्छा खेल रहे हो और शतक को लेकर चिंतित होने की बात नहीं है.

कुछ इसी तरह की बात टीम के साथ अतिरिक्त कोच के तौर पर मौजूद भारत के महान बल्लेबाजों में एक रहे वीवीएस लक्ष्मण ने भी वैभव से कही. उन्होंने कहा कि तुम अपना खेल खेलो, शतक के पीछे मत भागो. और अगली सुबह वैभव ने जो किया उससे न सिर्फ उन्होंने बल्कि पूरी भारतीय टीम ने एक इतिहास बना दिया.

क्रिकेट अंडर-19 विश्व कप 2026 के फाइनल में आयुष महात्रे की कप्तानी वाली भारतीय टीम ने इंग्लैंड को 100 रनों से हराकर रिकॉर्ड छठवीं बार खिताब अपने नाम किया. पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 50 ओवर में 9 विकेट पर 411 रन बनाए और इंग्लैंड को 40.2 ओवर में 311 पर रोक दिया.

इस पूरे टूर्नामेंट में भारत ने अपनी बल्लेबाजी और गेंदबाजी के दम पर अजेय रहते हुए खिताब जीता. इस टूर्नामेंट की खास बात यह रही कि करीब—करीब हर मैच में अलग-अलग खिलाड़ी मैच विनर बने. इस नाते इनमें से सिर्फ पांच खिलाड़ियों को चुनना मुश्किल काम है. लेकिन इस विश्व कप में वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक बल्लेबाजी, आयुष महात्रे की संयमित कप्तानी समेत मौके पर अच्छी बल्लेबाजी, अभिज्ञान कुंडू की लगातार उपयोगी पारियां, विहान मल्होत्रा का गेंद और बल्ले से बेहतरीन प्रदर्शन और हेनिल पटेल की मध्य ओवरों में कसी हुई गेंदबाजी ने खास तौर पर प्रभाव डाला. ये पांच नाम भविष्य में सीनियर भारतीय टीम में जगह बनाने के मजबूत दावेदार नजर आ रहे हैं. 

वैभव सूर्यवंशी : टूर्नामेंट का सबसे बड़ा स्टार

वैभव सूर्यवंशी ने अंडर-19 विश्व कप 2026 में ऐसा धमाल मचाया कि क्रिकेट जगत में उनका नाम अब पहले से कहीं ज्यादा गूंज रहा है. बिहार के समस्तीपुर के एक छोटे से गांव से आने वाले इस 14 साल के बल्लेबाज ने 7 मैचों में कुल 439 रन बनाए. इनका औसत 62.71 और स्ट्राइक रेट 169.50 का रहा. वैभव ने फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 175 रन की तूफानी पारी सिर्फ 80 गेंदों में खेली. इसमें 15 चौके और 15 छक्के शामिल थे. वैभव ने 175 की पारी खेलकर अंडर-19 विश्व कप फाइनल का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर का भी रिकॉर्ड बनाया.

वैभव ने टूर्नामेंट में कुल 41 चौके और 30 छक्के लगाए. यह किसी भी खिलाड़ी से ज्यादा हैं. सेमीफाइनल में भी उन्होंने एक तूफानी पारी खेली थी. बेहतरीन प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट और फाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच घोषित किया गया. क्रिकेट विशेषज्ञों समेत क्रिकेट के प्रशंसकों को भी लगता है कि वैभव अब सीनियर टीम में शामिल होने के लिए तैयार दिख रहे हैं. क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वे दबाव झेलने की कला और जरूरत पड़ने पर परिस्थितियों के हिसाब से खेलना सीख लेते हैं तो टी-20 और एकदिवसीय मैचों में भारत के अगले विस्फोटक ओपनर बन सकते हैं.

आयुष महात्रे: कप्तान का संयम और बल्लेबाजी का दम

आयुष महात्रे ने विश्व कप के दौरान न सिर्फ कप्तानी में कमाल दिखाया बल्कि बल्लेबाजी से भी टीम को मजबूत आधार दिया. महाराष्ट्र के इस 18 साल के बल्लेबाज ने फाइनल में 51 गेंदों पर 53 रन की पारी खेलकर वैभव सूर्यवंशी के साथ एक महत्वपूर्ण साझेदारी की. इसी साझेदारी ने मैच का रुख बदल दिया.

आयुष की खासियत है उनका संयम. वे शुरुआत में विकेट बचाते हैं और बाद में आक्रमण करते हैं. रोहित शर्मा को अपना आदर्श मानने वाले महात्रे भी आक्रामक बल्लेबाज हैं. भविष्य में वे मध्य क्रम में सीनियर टीम के लिए मजबूत दावेदार हो सकते हैं.

अभिज्ञान कुंडू: मध्य क्रम का सहारा

विकेटकीपर बल्लेबाज अभिज्ञान कुंडू ने टूर्नामेंट में मध्यक्रम को मजबूती दी और कई बार मुश्किल हालात में भारत को संभाला. बांग्लादेश के खिलाफ जब ऐसा लग रहा था कि मैच फंस रहा है तो उन्होंने 80 रनों की एक महत्वपूर्ण पारी खेली. फाइनल में भी आखिर में उन्होंने तेज बैटिंग करके रन रेट बरकरार रखा और टीम को 400 के पार पहुंचाने में मदद की.

अभिज्ञान की खासियत है विकेट बचाते हुए स्ट्राइक रोटेट करते रहना और खराब गेंद मिलने पर बड़े शॉट्स खेलना. विशेषज्ञों का मानना है कि अभिज्ञान वनडे और टेस्ट में मध्य क्रम के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं.

विहान मल्होत्रा: उभरता आलराउंडर

विहान मल्होत्रा ने अपनी बल्लेबाजी और सटीक गेंदबाजी से विपक्षी टीमों को परेशान किया. जिम्बाबे के खिलाफ शतक जड़ने के साथ उन्होंने गेंद से भी बेहतरीन प्रदर्शन किया है. बांग्लादेश जब बारिश से प्रभावित मैच में अपनी जीत को लेकर आश्वस्त हो रहा था तो विहान ने सिर्फ 14 रन देकर चार विकेट लिए और पांसा पलटते हुए भारत को विजयी बनाने में मुख्य भूमिका निभाई.

पंजाब के पटियाला से आने वाले विहान के बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि एक आलराउंडर के तौर पर वे अगर भविष्य में सीनियर क्रिकेट टीम का हिस्सा बन जाएं तो हैरानी नहीं होनी चाहिए.

हेनिल पटेल : प्रभावी तेज गेंदबाज

गुजरात के वलसाड से सटे एक छोटे से गांव से आने वाले हेनिल पटेल ने अपनी गेंदबाजी से सभी को प्रभावित किया. टूर्नामेंट में पटेल ने कुल 11 विकेट लिए. अपनी गेंदबाजी से उन्होंने विपक्षी टीमों के बल्लेबाजों को लगातार परेशान किया और भारत को जब भी विकटों की जरूरत थी, उन्होंने सफलता दिलाई.

सटीक लाइन पर लगातार गेंदबाजी करते रहने की हेनिल की क्षमता ने लोगों को काफी प्रभावित किया. हालांकि, उन्हें सेमीफाइनल और फाइनल में विकेट नहीं मिले लेकिन इन दोनों मुकाबले में उन्होंने अपनी गेंदों पर अधिक रन नहीं बनने दिए.

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