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Gen-Z भूत और नास्तिक पुजारी! ‘सर्वम माया’ क्यूं है हॉरर-कॉमेडी की सबसे अलहदा फिल्म?

जियो हॉटस्टार पर पहली बार Gen-Z भूत अपनी कहानी के साथ प्रकट हुआ है. मलयाली फिल्म ‘सर्वम माया’ ने कई मायनों में वे परिभाषाएं ध्वस्त कर दी हैं जो अब भी क्लासिक हॉरर कल्चर में बची हुई थीं

पिछले कम से कम एक दशक में हॉरर स्पेस का सबसे साहसिक प्रयोग है ‘सर्वम माया’
अपडेटेड 12 फ़रवरी , 2026

वो दौर देखते ही देखते चला गया जब भूतही फ़िल्में डरने डराने के काम आती थीं. हॉरर ने हाथ थामा कॉमेडी का और धूम धड़ाके से एंट्री हुई हॉरकॉम की. इसी मयार की फिल्म ‘स्त्री’ और उसके अगले पार्ट ने बॉक्स ऑफिस पर रिकार्ड्स के धुर्रे छुड़ा दिए थे. इससे साबित हुआ कि स्क्रीन पर अब भूत भी नेक्स्ट जेन हो चुके हैं. हॉरर सिनेमा का दर्शक भी दशकों से सुनसान हवेली और चुर्र-चुर्र... चांय-चांय... करके खुलते दरवाजों से ऊब चुका था. इस स्पेस का सिनेमा इंडस्ट्री ने बहुत क़ायदे से और बढ़िया इस्तेमाल किया. कहानियां वेस्टर्न सिनेमा के क्लोज्ड स्पेस और पवित्र जल इफेक्ट से बाहर निकलीं. इस महादेश में सदियों से सुनी-सुनाई जा रहे भूतीले किस्सों से फिल्मों ने अपने भूत चुने और नतीजा क्रांतिकारी तौर पर कामयाब रहा.

अच्छी बात ये रही कि नई बहार सभी भाषाई सिनेमा में आई, सिर्फ हिंदी सिनेमा में ही नहीं. जियो हॉटस्टार पर पहली बार जेन ज़ी भूत अपनी कहानी के साथ प्रकट हुआ है. मलयाली फिल्म ‘सर्वम माया’ ने कई मायनों में वे परिभाषाएं ध्वस्त कर दी हैं जो अब भी क्लासिक हॉरर कल्चर में बची हुई थीं.

पिछले कम से कम एक दशक में हॉरर स्पेस का सबसे साहसिक प्रयोग है ‘सर्वम माया’. और, यह प्रयोग शायद उतना कामयाब ना होता अगर इसके डायरेक्टर अखिल सत्यन मूल रूप से स्क्रीन राइटर ना होते. कमाल की लिखाई और शानदार डायरेक्शन का लीथल कॉम्बिनेशन बन पड़ी है ये फिल्म.
‘प्रोफेशनल’ पुजारियों के खानदान का मॉडर्न म्यूजिक में डूबा हुआ नास्तिक लड़का अब पैसों की तंगी के कारण अपना पारिवारिक कारोबार संभाल रहा है. बस इतनी सी कहानी है. लेकिन यह कहानी इतने सिरे खोलती है नएपन के कि एकबार को भरोसा करना मुश्किल हो जाता है. कहानियों को रीढ़ मानने की वजह से मलयालम सिनेमा कई वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी दुंदुभी पीट रहा है. कई बार मलयाली फ़िल्में देश ही नहीं, दुनिया की फिल्मों पर अपने कथ्य, दृश्य और दर्शन में भारी पड़ जाती हैं. डायरेक्टर अखिल ने इस फिल्म में बेहद मासूमियत से यह कारनामा फिर कर दिखाया है.

फिल्म के एक सीन में प्रभेंदु (बाएं) और उसका चचेरा भाई

क्या है कहानी

केरल के एक गांव में पुजारियों का परिवार रहता है, जो देश-विदेश में मोटे पैसे वाले यजमानों के यहां पूजा करवाते हैं. इसी परिवार का छोटा बेटा है प्रभेंदु जिसका ईश्वर में विश्वास नहीं. संगीत में मन रमाए प्रभेंदु किसी बड़े ब्रेक के इंतजार में है. लेकिन अचानक एक भजन पार्टी से निकाले जाने की वजह से उसके पास स्ट्रगल तक के पैसे नहीं बचते.

‘करता क्या ना करता’ के हालात बने तो प्रभेंदु ने पिता के ग्राहकों से अलग अपने चचेरे भाई के असिस्टेंट पुजारी के तौर पर शुरुआत की. एक बार प्रभेंदु को ‘भूत भगाओ पूजा’ के लिए अच्छी रकम ऑफर हुई और उसने पूजा निबटा भी दी. लेकिन इसी के बाद उसके साथ अजीब चीजें होनी शुरू हुईं.

कहानी से इतर 

क्लासिक हॉरर का शिकार आपका दिमाग़ अब आगे की कहानी सोच भी चुका होगा. जिसमें पैने दांतों और बिगड़े चेहरे वाली किसी चुड़ैल के मुंह से खून टपक रहा होगा. रैंडम दर्शन और हैवी बैकग्राउंड म्यूजिक. लेकिन यह फिल्म यहीं से बाजी मार लेती है. प्रभेंदु को एक ऐसी चुड़ैल दिखती है जो चुड़ैल कहलाना पसंद नहीं करती. जेन ज़ी भूत को रील्स देखना पसंद है और ऑनलाइन शॉपिंग की लत है. रैंडम दिखने पर उल्टा वही प्रभेंदु को डांट देती है कि ऐसे बार-बार डराते क्यों हो भाई.

डेलुलू (बीच में) अपने इन नए साथियों के साथ 'फन मोड' में

आप इस कहानी में विट और सिचुएशनल कॉमेडी का अंदाजा इस बात से लगाइए कि जब प्रभेंदु की पूजाओं का इस जेन ज़ी आत्मा पर असर नहीं पड़ता, तब खुद ये लड़की ही बताती है कि शायद ईसाई होने की वजह से हिंदू पूजा कोई असर नहीं कर पा रही. अब प्रभेंदु एक चर्च के भीतर स्टोर में क्रॉस खरीदने पहुंचता है. यहां डायलॉग्स देखिए कि प्रभेंदु दुकानदार से पूछता है कि ज्यादा असरदार कौन-सा क्रॉस होता है? लकड़ी वाला या स्टील वाला? तो दुकानदार जवाब देता है कि ये लाइट बल्ब नहीं है जो वॉट के हिसाब से मिलता हो. 

इस जेन ज़ी आत्मा की हर आदत हमसे आपसे मिलती है.

ऐसे विटी संवादों से भरी और बेहद मनोरंजक फिल्म का हॉरर स्पेस में होना बड़ी राहत की बात है. राइटर डायरेक्टर अखिल ने पहली बार जेन ज़ी स्लैंग्स का इस्तेमाल किया है, और क्या ख़ूब किया है. भूत ही कहती है कि उसे ‘डेलुलू’ नाम से बुलाया जाए. अब इसके मायने देखिए कि जेन ज़ी डेलुलू का इस्तेमाल करता है डिल्यूजन यानि माया के लिए. और एक प्रेत से बड़ी माया क्या होगी!

कुल मिलाकर अद्भुत एक्टिंग से भरपूर और फ्रेशनेस के तमाम सोपानों पर आलातरीन बैठती इस फिल्म को देखने आप जितना जल्द बैठ सकें उतना बेहतर. फिल्म के अंत में एक कारगर ट्विस्ट भी आपका इंतजार कर रहा होता है.

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