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न कट, न एडिटिंग; 8mm रोल पर रची मुंबई के इश्क की कहानी अब Cannes जाएगी!

Cannes Film Festival के बड़े पर्दे पर 2 मिनट 18 सेकंड की भारतीय शॉर्ट फिल्म 'ब्लैकबर्ड्स' दिखाई जाएगी

कांस फिल्म फेस्टिवल में भारतीय फिल्म ब्लैकबर्ड्स का प्रीमियर होगा
कांस फिल्म फेस्टिवल में भारतीय फिल्म ब्लैकबर्ड्स का प्रीमियर होगा
अपडेटेड 13 मई , 2026

नहीं, यार जरा और प्यार से उसकी तरफ देखो... पता चलना चाहिए दोनों लड़कियों के बीच इश्क है. फरवरी की एक रोज मुंबई के एक स्टेशन पर कुछ नए से दिखने वाले कलाकार एक 8mm का पुराना फिल्म रोल लिए यह सब बुदबुदा रहे थे.

ये कलाकार एक ऐसी फिल्म बनाने की कोशिश कर रहे थे, जिसमें डायरेक्टर के पास कट कहने का कोई मौका नहीं होता. उसे और उसके कलाकारों को सिर्फ एक ही शॉट में पूरी फिल्म को कैमरे में कैद करना है, वह भी पूरे परफेक्शन के साथ. फिल्मी दुनिया की भाषा में इन्हें कहते हैं - वन शॉट फिल्म.

कम बजट और सीमित संसाधनों के साथ सिनेमा में कुछ दिलचस्प-सा बनाने की जुगत में लगे इन लोगों को पता भी नहीं था कि तीन महीने बाद उनकी वन शॉट फिल्म दुनिया में सिनेमा के सबसे बड़े मेले Cannes Film Festival में दिखाई जाएगी.

भारत से पहली बार किसी महिला फिल्मेकर की फिल्म को Straight8 कंपीटीशन में जगह मिली है. 16 मई को 2 मिनट 18 सेकेंड की यह फिल्म Cannes Film Festival के बड़े पर्दे पर दिखाई जाएगी. जॉई कौशिक के निर्देशन में बनी इस फिल्म का नाम है- ब्लैकबर्ड्स.

Straight8 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त फिल्म-निर्माण प्रतियोगिता है. इसकी शुरुआत 1999 में हुई थी. इस प्रतियोगिता में दुनिया भर से सिर्फ 8 फिल्मों को सिलेक्ट किया जाता है. इन सभी 8 शॉर्ट फिल्मों का Cannes Film Festival के दौरान प्रीमियर होता है.

इस प्रतियोगिता में सिलेक्ट होने के लिए जरूरी है कि एक 8mm के रोल पर पूरी फिल्म को शूट किया जाए. इसमें पोस्ट प्रोडक्शन या एडिटिंग का कोई स्कोप नहीं रहता. जो होगा एक बार में होगा. इस फिल्म के प्रीमियर के मौके पर फिल्म-निर्माताओं, प्रशंसकों, आम जनता और फिल्म उद्योग से जुड़े लोगों का विशाल दर्शक-वर्ग मौजूद होता है.

'ब्लैकबर्ड्स' मुंबई की लोकल ट्रेन में रोजाना मिलने वाली 2 लड़कियों की कहानी है जो इस कशमकश में हैं कि क्या उनके बीच कुछ है. मन में धुकधुकी के साथ रोज एक ट्रेन में सफर करते वक्त ये लड़कियां एक-दूसरे को निहारती हैं पर कुछ कहने की हिम्मत नहीं करती. हालांकि इस दौरान अपनी आंखों और हावभाव से वे भरपूर संवाद करती दिखती हैं.

निर्देशक और कहानीकार जॉई कौशिक के अलावा फोटोग्राफी डायरेक्टर ओमकार दिवेकर और फिल्म की मुख्य कलाकारों सिमरत हरविंद कौर और हर्षिका ने इसमें बेहतरीन काम किया है. फिल्म में काम करने वाले कलाकारों का कहना है कि बुनियादी संसाधनों के अभाव में उन्होंने इस फिल्म को बनाया है. इस फिल्म को जब बनाया जा रहा था, उन्होंने तब यह सोचा भी नहीं था कि दुनिया के सबसे बड़े मंच पर इस फिल्म का प्रीमियर होगा.

'ब्लैकबर्ड्स' की निर्देशक जॉई कौशिक का कहना है कि फिल्म के जरिए लैंगिक संवेदनशीलता के मुद्दे पर समाज में एक सही मैसेज देना चाहती हैं. इसी मैसेज के साथ उन्होंने इससे पहले 'द विच ऑफ विहार लेक' नाम से एक फिल्म बनाई थी और इसे प्रतिष्ठित इस्मत चुगताई अवॉर्ड से नवाजा गया था.

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