
नशा. अगर सिर्फ एक शब्द से इस म्यूज़िकल जीनियस को डिकोड करना हो, तो चाभी यही शब्द होता. लेकिन और भी चाभियां हैं शब्दों की जो वक़्त ज़रूरत इस्तेमाल की जा सकती हैं. जबर, जुनूनी, जादूगर, जौहरी और जो भी शब्द इस समुच्चय में आते हों. 38 साल के शाश्वत सचदेव ने बीते तीन महीनों में ही अपने संगीत के दम पर इतने रिकॉर्ड बनाए और ध्वस्त किए हैं कि अब उन्हें ‘चार्ट बस्टर’ की जगह ‘चार्ट सेटर’ कहना ठीक होगा.
दिसंबर 2025 में आई ‘धुरंधर’ और 19 मार्च 2026 को रिलीज़ हुई ‘धुरंधर- द रिवेंज’ का सारा बैकग्राउंड म्यूज़िक और सभी गाने शाश्वत सचदेव ने तैयार किए हैं. नसों में उफान मारते डोपामाइन के अंतहीन फव्वारे और अफ़ीम की तरह पास बुलाकर अपनी लत में उलझा देने वाला यह शाहकार म्यूज़िक. बॉक्स ऑफ़िस (अगर कहीं होता हो तो) को फूंककर राख कर चुकी और इसी राख पर सिंहासन करती धुरंधर अगर धुरंधर बन पाई तो इसके पीछे अपनी धुन के पक्के धुनी शश्वत सचदेव का बड़ा हिस्सा है.
धुरंधर के पहले हिस्से का ट्रेलर ट्रैक, जिसमें मशहूर हिप हॉपर हनुमानकाइंड और पंजाबी सिंगर जैस्मिन सैंडलस ने आवाज़ दी है, बीते दिसंबर म्यूज़िक चार्ट्स पर गिरने वाला पहला बम था.
इसके बाद ना तो धुरंधर ने और ना शाश्वत ने पीछे मुड़कर देखा. जब जत्थे के जत्थे में लोग सिनेमाघरों से धुरंधर देख कर निकल रहे थे तो वो बिल्कुल अलग ज़मीन पर बुनी गई लाजवाब कहानी, एक्शन और पावर पैक्ड एक्टिंग की गिरफ्त में तो थे ही, साथ ही नशे में थे हर सीन को कई-कई गुना मारक बनाने वाले बैकग्राउंड म्यूज़िक और महीन कारीगरी से रखे गए गानों के.
शाश्वत सचदेव की इस कामयाबी को उड़ती नज़र से देखें तो एक बड़ी नाव पर वो ‘जस्ट अनदर पैसेंजर’ दिखाई दे सकते हैं, लेकिन ये जिद्दी जहाज़ी ख़ुद को जानने समझने के लिए और गहरी नज़र की मांग करता है. तो शुरू से ही शुरू कर लेते हैं :
चैप्टर 1 - पैदाइशी कनसुरा
राजस्थान के जयपुर की पैदाइश शाश्वत सचदेव की कामयाबी का कैलेंडर भले ताज़ा महीने और तारीखें दिखा रहा हो, लेकिन उनकी तहों में कई दशक का पोथा जमा है. चार साल की उम्र से क्लासिकल म्यूज़िक सीखना शुरू कर चुके शाश्वत ने होश संभालने से ही संगीत की पूंजी जुटानी शुरू कर दी थी. साथ में सीखा वेस्टर्न क्लासिकल और दुनिया भर के उस्तादों की संगत करते हुए हॉलीवुड से काम शुरू किया. शाश्वत हॉलीवुड के प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बन रहे थे आज से करीब 15 साल पहले. इससे आपको अंदाज़ा हो सकेगा कि प्रोफेशनली कम्पोज़िंग शाश्वत ने बहुत पहले से शुरू कर दी थी.

चैप्टर 2 – भरोसा
शाश्वत को क़ायदे का ब्रेक मिला 2017 में. जब दिलजीत दोसांझ और अनुष्का शर्मा की फिल्म ‘फिल्लौरी’ का संगीत बनाने का जिम्मा मिला. इसके लिए शाश्वत ने कई बार कई जगहों की बातचीत में खुद को अनुष्का शर्मा का एहसानमंद बताया है. दूर से देखने पर अनुष्का शर्मा और मेकर्स की तरफ से लिया गया एक रिस्क सा दिखाई पड़ता ये फैसला असल में वैसा था नहीं.
शाश्वत सचदेव की कमाल कारीगरी पर भरोसा करने वालों में अनुष्का शर्मा बहुत शुरुआती लोगों में से एक थीं. और इस भरोसे को अपनी तरफ से रत्ती भर भी कम नहीं होने दिया शाश्वत ने. अगर संगीत का थोड़ा-सा गहरा स्वाद कानों को लगा हो तो आप शायद ही ‘फिल्लौरी’ के शीरे से मधुर संगीत से चूके होंगे. स्वाद समझने वालों ने तारीफ़ की. आज भी सुनने वालों की प्लेलिस्ट में इस फिल्म के गाने जगह बनाए हुए हैं.
बस एक समस्या यह रही कि फिल्म के साथ ही इसके गाने भी ‘मास चॉइस’ नहीं बन पाए. नतीजतन, जंगल में मोर नाचा किसने देखा जैसी बात हो गई.
चैप्टर 3 – हाउज़ दी जोश?
अगले साल 2018 में शाश्वत को और काम मिला. ‘कालाकांडी’ का टाइटल गीत और ‘वीरे दी वेडिंग’ के चार गाने इन्होंने तैयार ज़रूर किए लेकिन बात बनी नहीं. आम जनता ने अब भी कुछ खास तवज्जो नहीं दी. फिर शाश्वत से टकराया एक ऐसा आदमी जो इसी तरह की समस्या से जूझ रहा था. काम भर का काम करने के बाद भी जो मिलना चाहिए वह नहीं मिल पा रहा था. ये थे राइटर आदित्य धर. जो अपनी पहली फिल्म ‘उरी: दी सर्जिकल स्ट्राइक’ से अपना डायरेक्टोरियल डेब्यू करने जा रहे थे. दोनों नौजवानों, आदित्य और शाश्वत का मिजाज़ मिला और काम शुरू हुआ.

शाश्वत इस बार किसी तरह की कोई कमी नहीं रख छोड़ना चाहते थे. एक इंटरव्यू में शाश्वत बताते हैं कि आपको अपनी सबसे उम्दा धुन तब मिलती है जब उसकी सबसे कम उम्मीद हो. लेकिन इस बार उम्दा धुन के लिए शाश्वत ने बाक़ायदा बर्लिन जाकर ऑर्केस्ट्रा के साथ म्यूज़िक रिकॉर्ड किया. इस बार फिल्म और इसके म्यूजिक, दोनों ने मुनादी पीट दी. ‘छल्ला’ की नशीली बीट्स और ‘जग्गा जितया’ जैसा जोशीला गाना प्लस बेहद कमाल बीजीएम. इस बार ‘मास अपील’ वाला ताला खुल-सा गया था. सड़क से लेकर संसद तक ‘हाउ इज़ दी जोश?’ का नारा कहा सुना जा रहा था. शाश्वत और आदित्य धर, दोनों का मामला फिट हुआ, लेकिन नेशनल अवार्ड मिलने के बाद भी कसर रहती थी अभी भी. इसके बाद शाश्वत ने अगले चार सालों में ‘आर्टिकल 370’, ‘किल’ और ‘केसरी’ का संगीत बनाया.
चैप्टर 4 – बैड्स ऑफ़ बॉलीवुड
कट टू 2025. शाश्वत सचदेव के काम का असर हो रहा था. दिन रात अपने स्टूडियो में किसी वैज्ञानिक की तरह म्यूजिकल केमिकल्स का घालमेल करते शाश्वत को फिल्म इंडस्ट्री में जीनियस माना जाने लगा था. इसे ऐसे समझ लीजिए कि जब हिंदी सिनेमा का सबसे रिस्की लॉन्च होना था, जो कि शाहरुख़ खान के बेटे आर्यन खान का था, तब शाहरुख तक शाश्वत के काम की तारीफ़ पहुंची.
जानने वाले जानते हैं कि आर्यन के लिए किसी कीमत पर कोई भी समझौता शाहरुख़ करने को तैयार नहीं थे. ‘बैड्स ऑफ़ बॉलीवुड’ के लिए बेस्ट टू बेस्ट ही चुना गया. और चुने गए शाश्वत सचदेव. म्यूज़िक का कप्तान बनाया गया इस नौजवान को जिसने गुजरे बरसों में ख़ुद को हर मौक़े पर साबित किया था.
शाश्वत ने इस बार भी कमाल किया और बिल्कुल अलहदा संगीत तैयार हुआ. आर्यन खान समेत पूरी इंडस्ट्री ने शाश्वत का लोहा माना. शाहरुख़ ने बाक़ायदा ट्वीट करके कहा कि ‘बेटा, यू आर मैजिक एंड मैजिक इस यू’.
चैप्टर 5 – फाइनल रिवेंज!
आदित्य धर जब अपनी अब तक की जिंदगी का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट तैयार कर रहे थे तब उन्होंने सबसे पहला काम किया शाश्वत सचदेव की ऑनबोर्डिंग का. धुरंधर के संगीत की नाव अब शाश्वत के हवाले थी. पूरी इंडस्ट्री जानती है कि ये बेहद कमाल का संगीतकार ‘डायरेक्टर्स कम्पोज़र’ है. स्क्रिप्ट पर चिप्पियां चिपकाकर संगीत का स्कोप तय करने के बाद शाश्वत निकले आर्टिस्ट हंट पर.
और क्या कमाल के धुरंधर खोज लाया यह शख्स. हनुमानकाइंड से लेकर जैस्मिन सैंडलस तक और खान साब से लेकर सतिंदर सरताज तक. हिप हॉप से लेकर जैज़ तक और रैप से लेकर क़व्वाली तक...पूरी दुनिया के कारसाज़ जुटाकर शाश्वत ने एक पूरी अलग दुनिया खड़ी कर दी.
शाश्वत ने हर उस कलाकार को मौक़ा दिया जो बरसों से अपने-अपने अंधेरों में सीना जलाकर अपने-अपने तालों की चाभियां गढ़ रहे थे. हर गाना ऐसे तैयार हुआ जैसे बरसों से तैयार बैठे योद्धा अंतिम युद्ध में आंख बंद कर जीतने या मरने के लिए लड़ने आए हों.

मसलन, ‘धुरंधर : दी रिवेंज’ में सतिंदर सरताज ने सिर्फ और सिर्फ एक लाइन गाई है. लेकिन यह एक ही लाइन जैस्मिन की बेधड़क आवाज़ के साथ मिलकर दुनिया में मौजूद हर कान को निचोड़ लेने की ताक़त रखती है. हैरत की बात नहीं है कि महज़ चार दिन पहले रिलीज़ हुआ ‘आरी आरी’ स्पॉटिफाई पर 17 लाख बार से ज़्यादा स्ट्रीम हुआ है. शाश्वत की शानदार रेंज तब और हैरान करती है जब एक जगह फिल्म में उस्ताद फरीदुद्दीन अयाज़ का ‘कन्हैया याद है कुछ भी हमारी...’ बजता सुनाई देता है.
रिमिक्स से लेकर रैप तक और मेलडी से लेकर भजन तक शाश्वत सचदेव ने ऐसा कोई मोर्चा नहीं छोड़ा जहां बिल्कुल ताज़े खून की तरह टपकते ताज़ादम संगीत की लड़ाई लड़ी जा सकती थी और नहीं लड़ी गई. ये शायद इसलिए भी हो पाया क्योंकि शाश्वत ख़ुद एक ट्रेन्ड और कमाल के गायक भी हैं. धुरंधर के कई गानों में शाश्वत की आवाज़ भी है.
इसमें कोई शक़ नहीं कि शाश्वत ने जो शाहकार रचा है ऐसा काम मॉडर्न सिनेमा में बरसों पहले ‘ओए लक्की लक्की ओए’ और ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ में स्नेहा खानवलकर ने कर दिखाया था. मिट्टी की नमी भांपने में उस्ताद स्नेहा अगर रह-रहकर गुम नहीं हुई होतीं तो उनकी मार्फ़त अभी बहुत काम आना बाकी था. लेकिन, कंसिस्टेंसी बीट्स टैलेंट की पुरानी पर असरदार कहावत में हर किसी का भरोसा पुख्ता नहीं होता.
और, जैसा कि धुरंधर का ही एक डायलॉग है कि "बदला लेने के लिए हौसले का ईंधन लगता है, जो हर किसी में नहीं होता", शाश्वत हौसले का पावरहाउस साबित हुए हैं. तो वक़्त आ गया है जब दोनों हाथ उठाकर इस जीनियस को सलाम करते हुए स्वागत किया जाए उम्मीद की दुनिया में. क्योंकि उम्र, अनुभव और हिम्मत का मारक समीकरण बनकर उभरे इस संगीतकार का फ़िलहाल तो दूर-दूर तक कोई विकल्प दिखाई नहीं देता.

