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अदालत के इंकार के बाद भी यूसुफ पठान को प्लॉट कैसे मिला?

वडोदरा में 978 वर्ग मीटर के प्लॉट पर 13 साल से विवाद चल रहा था. गुजरात की BJP सरकार ने अब यूसुफ पठान को 500 वर्ग मीटर जमीन मुफ्त और बाकी बाजार भाव के 55 फीसदी पर देने की मंजूरी दी है

पूर्व क्रिकेटर और लोकसभा सांसद यूसुफ पठान (फाइल फोटो)
अपडेटेड 26 अक्टूबर , 2026

पूर्व क्रिकेटर और लोकसभा सांसद यूसुफ पठान के वडोदरा वाले बंगले के पास 978 वर्ग मीटर के प्लॉट को लेकर एक दशक से भी ज्यादा समय से विवाद चल रहा है. पठान 2011 में भारत को विश्व कप जिताने वाली टीम का हिस्सा थे और 2024 में तृणमूल कांग्रेस के सांसद बने.

उन्होंने इस प्लॉट को चारदीवारी से घेर लिया था और गुजरात हाई कोर्ट ने उन्हें अतिक्रमण करने वाला बताया था. अब गुजरात की BJP सरकार के एक फैसले से यह विवाद खत्म होने के करीब नजर आ रहा है.

13 अगस्त को राज्य सरकार ने अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के लिए बनाई गई अपनी नीति के तहत पठान को यह प्लॉट देने की मंजूरी दी. इस नीति के तहत उन्हें आवासीय उपयोग के लिए 500 वर्ग मीटर जमीन मुफ्त मिलेगी, जबकि बाकी 478 वर्ग मीटर जमीन बाजार भाव के 55 फीसदी पर मिलेगी.

मार्च में वडोदरा शहरी विकास प्राधिकरण द्वारा तय 2.1 लाख रुपए प्रति वर्ग मीटर की दर से, इस प्लॉट की कीमत लगभग 20.5 करोड़ रुपए है, लेकिन पठान लगभग 5.5 करोड़ रुपए चुकाएंगे.

सरकारी फैसले में कहा गया है कि यह फैसला कोई मिसाल नहीं कायम करता. इसमें राजस्व विभाग को वडोदरा नगर निगम (VMC) को समान मूल्य की जमीन से मुआवजा देने का आदेश दिया गया है. हालांकि इसके लिए VMC की स्थाई समिति और आम सभा की मंजूरी अभी बाकी है.

सरकारी फैसले पर हस्ताक्षर होने के 18 दिन बाद, 31 अगस्त को पठान ने हाई कोर्ट से अपनी अपील वापस ले ली. उनके वकील ने कहा कि वे अदालत के बाहर इस मामले का हल निकालने की कोशिश करेंगे.

इस विवाद को यहां तक पहुंचने में काफी समय लगा. 2012 में पठान ने अपने परिवार की सुरक्षा का हवाला देते हुए इस प्लॉट को 99 साल की लीज पर देने के लिए आवेदन किया था. VMC ने बिना नीलामी के जमीन देने का प्रस्ताव रखा लेकिन राज्य सरकार ने 2014 में इसे मंजूरी देने से इनकार कर दिया क्योंकि जमीन की नीलामी नहीं हुई थी. इसके बावजूद पठान ने प्लॉट के चारों ओर दीवार बनवा दी.

इसके बाद 2024 तक यह मामला शांत रहा. उसी साल मार्च में ममता बनर्जी ने पठान को बहरामपुर से चुनाव मैदान में उतारा. यह कांग्रेस का गढ़ रहा है, जहां से पार्टी के पांच बार के सांसद अधीर रंजन चौधरी चुनाव जीतते रहे थे. 4 जून को पठान ने 85,000 से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. इसके दो दिन बाद BJP शासित VMC ने उन्हें अतिक्रमण का नोटिस भेजा.

अगस्त 2025 में जस्टिस मौना भट्ट ने राज्य सरकार के फैसले को बरकरार रखा. उन्होंने कहा कि बिना भुगतान किए लंबे समय तक जमीन पर कब्जा रखने से उन्हें कोई अधिकार नहीं मिल जाता और मशहूर हस्ती होने के कारण उन्हें कोई छूट नहीं दी जा सकती.

इसके बाद बंगाल की राजनीति बदल गई. 4 मई को BJP ने विधानसभा की 294 में से 207 सीटें जीतकर TMC के 15 साल के शासन का अंत कर दिया. कुछ ही हफ्तों के भीतर पार्टी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन किया. इनमें पठान भी शामिल थे. 28 में से 20 सांसदों की संख्या दो-तिहाई से थोड़ी ज्यादा है.

दल-बदल कानून के तहत किसी पार्टी के दूसरी पार्टी में विलय के लिए इतनी संख्या जरूरी होती है. TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर पठान की आलोचना करते हुए उन्हें थोड़ी शर्म और हिम्मत दिखाने को कहा.

8 जून को हाई कोर्ट की दो जजों वाली पीठ ने सवाल उठाया कि पठान ने बिना कोई औपचारिकताएं पूरी किए सार्वजनिक भूमि पर कब्जा कैसे कर लिया. अदालत ने इस बात की जांच का आदेश दिया कि उन्हें कब्जा किसने सौंपा था. इसके तीन महीने बाद राज्य सरकार ने उसी जमीन का कुछ हिस्सा पठान को देने का फैसला कर लिया, जिसके लिए वे पहले पैसे देने को तैयार थे और जिसे लेकर सरकार के खिलाफ अदालत में लड़ रहे थे.

यूसुफ और उनके छोटे भाई इरफान पठान, दोनों भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेल चुके हैं. दोनों भाई वडोदरा में पले-बढ़े, जहां उनके पिता एक स्थानीय मस्जिद में मुअज्जिन थे. छोटे भाई इरफान ने पहले भारतीय टीम में जगह बनाई. वे बाएं हाथ के स्विंग गेंदबाज थे. उन्होंने 19 साल की उम्र में एडिलेड में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला और 2006 में कराची टेस्ट में पारी के पहले ही ओवर में तीन विकेट लेकर हैट्रिक बनाई.

43 साल के यूसुफ भारतीय क्रिकेट के सबसे खतरनाक लंबे शॉट लगाने वाले बल्लेबाजों में गिने जाते थे. वह दाएं हाथ से बल्लेबाजी करते थे और ऑफ स्पिन गेंदबाजी भी करते थे. उन्होंने 2007 के वर्ल्ड T20 के फाइनल में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेला. उस मैच में इरफान को प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया था. यूसुफ ने बाद में 2011 का वर्ल्ड कप और कोलकाता नाइट राइडर्स के साथ IPL के दो खिताब जीते. एक समय वह IPL में सबसे तेज शतक लगाने वाले भारतीय बल्लेबाज थे.

दोनों भाई विवादों से भी घिरे रहे हैं. 2018 में यूसुफ पर डोपिंग के लिए पांच महीने का प्रतिबंध लगाया गया था. यह प्रतिबंध पिछली तारीख से लागू किया गया था क्योंकि उनके एक सैंपल में गले की दवा में पाया जाने वाला टरब्यूटालाइन नामक पदार्थ मिला था.

सांसद बनने के बाद भी उन्हें आलोचना का सामना करना पड़ा. मुर्शिदाबाद में वक्फ कानून के खिलाफ प्रदर्शन हिंसक हो गए थे. इसी दौरान उन्होंने सोशल मीडिया पर 'अच्छी चाय' को लेकर एक पोस्ट किया, जिसके लिए उनकी आलोचना हुई. मुर्शिदाबाद उनके संसदीय क्षेत्र का एक जिला है.

इरफान अब क्रिकेट कमेंटेटर हैं लेकिन खिलाड़ियों की शिकायतों के बाद उन्हें IPL 2025 के कमेंट्री पैनल से हटा दिया गया था. बाद में उन्होंने कहा कि बड़ौदा के उनके साथी क्रिकेटर हार्दिक पांड्या ने इस पर आपत्ति जताई थी.

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