scorecardresearch

गयाजी के विष्णुपद कॉरिडोर पर क्यों भड़का पंडा समाज?

विष्णुपद कॉरिडोर के प्रस्तावित नक्शे ने गयाजी के पंडा समाज को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया. फिलहाल जिला प्रशासन बैकफुट पर है लेकिन यह योजना आखिरकार जमीन पर उतरनी है

Gaya Panda Community protesting against vishnupad corridor
विष्णुपद कॉरीडोर के विरोध में पंडा समाज की बैठक
अपडेटेड 13 मई , 2026

बिहार के गयाजी में प्रस्तावित विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर के विरोध में 11 मई को वहां के पंडा समाज के लोग आक्रोशित हो गए. मंदिर के विश्राम गृह में इस कॉरिडोर का विरोध करने के लिए सैकड़ों की संख्या में पंडा समुदाय के लोग जुटे थे. यहां इन लोगों ने 'विष्णुपद क्षेत्रीय जन जागरण मंच' नाम से एक संस्था का गठन किया और विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के साथ मिलकर कॉरिडोर निर्माण के विरोध में बैठक की. 

इस बैठक में विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभु लाल विठ्ठल ने कहा, "शुरुआत में मैंने कॉरिडोर निर्माण का समर्थन किया था. मेरा मानना था कि इससे श्रद्धालुओं को सुविधा मिलेगी. हालांकि अब जो नक्शा सामने आया है, उससे स्पष्ट है कि इससे गयापाल पंडों की सांस्कृतिक विरासत और परंपरा को गंभीर क्षति पहुंचेगी. ऐसे में वर्तमान स्वरूप में कॉरिडोर निर्माण स्वीकार्य नहीं होगा."

इससे पहले वहां जुटे लोग कह रहे थे कि सिर्फ एक व्यक्ति के कहने से विष्णुपद में कॉरिडोर की शुरुआत कर दी गई है और उन लोगों से कोई राय नहीं ली गई थी. उनका इशारा शंभु लाल विठ्ठल की तरफ था. मगर जब विठ्ठल उनके साथ आ गए तो उनका विरोध खत्म हो गया.

क्यों हो रहा है विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर का विरोध

बैठक में मौजूद लोगों का कहना था कि अगर वर्तमान डिजाइन के हिसाब से कॉरिडोर बना तो मंदिर के आसपास के 694 घर टूटेंगे. इनमें कई लोगों के घर और दुकानें हैं. कुछ ऐतिहासिक महत्व की संरचनाएं भी हैं. विरोध कर रहे लोगों का कहना था कि अगर ऐसा हुआ तो गया की असली पहचान ही खत्म हो जाएगी. दरअसल अंदर गया का जो इलाका है, वही गया का असली स्वरूप है. विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर के बनने से इन संरचनाओं को भारी क्षति पहुंचेगी. खास तौर पर पंडे और स्थानीय दुकानदार इस फैसले के विरोध में काफी उग्र नजर आ रहे थे.

स्थानीय मीडिया के मुताबिक, जिला प्रशासन ने दो दिन पहले से इस इलाके में मकानों को चिह्नित करने का काम शुरू कर दिया था. लोग दुविधा में थे कि आखिर इस कॉरिडोर में उनका घर तो नहीं आ रहा. लोगों की मांग के बाद जिला प्रशासन ने उन्हें कॉरिडोर का प्रस्तावित नक्शा उपलब्ध कराया. इसके मुताबिक मंदिर के दो सौ मीटर के दायरे में आने वाले 694 मकानों को टूटना है. इसके बाद इस कॉरिडोर का विरोध तेज हो गया.

पंडा समाज का कहना है कि कॉरिडोर से उनके घर और आजीविका खतरे में पड़ सकती है
पंडा समाज का कहना है कि प्रस्तावित कॉरिडोर से उनके घर और आजीविका खतरे में पड़ सकती है

जागरण मंच के संरक्षक और रामानुज मठ के मठाधीश स्वामी वेंकटेश प्रपन्नाचार्य ने कहा कि अगर कॉरिडोर निर्माण के लिए 200 मीटर के दायरे में आने वाले 694 पुराने ढांचों को हटाया गया तो सदियों से यहां रह रहे पंडा समाज की आजीविका और अस्तित्व दोनों संकट में पड़ जाएंगे. उन्होंने सरकार से कॉरिडोर की चौड़ाई और दायरा कम करने की मांग की. मंच के अध्यक्ष रमेश लाल गायव ने आरोप लगाया कि पहले कॉरिडोर की सीमा 75 मीटर बताई गई थी लेकिन अब इसे बढ़ाकर 200 मीटर तक करने की चर्चा हो रही है. इससे स्थानीय लोगों में भय और असंतोष बढ़ गया है.

2024 के आम बजट में हुई थी घोषणा

गया के विष्णुपद कॉरिडोर की घोषणा वर्ष 2024-25 के आम बजट में हुई थी. उस वक्त वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था, "बिहार के गया में स्थित विष्णुपद मंदिर और बोधगया में स्थित महाबोधि मंदिर का आध्यात्मिक महत्व है. ऐसे में काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर की सफलता के अनुरूप विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर और महाबोधि मंदिर कॉरिडोर के व्यापक विकास को समर्थन दिया जाएगा ताकि इन्हें विश्व स्तरीय तीर्थ और पर्यटन स्थलों में परिवर्तित किया जा सके."

बाद में 1 मई 2026 को बुद्ध पूर्णिमा के मौके पर गया पहुंचे मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी विष्णुपद और बोधगया में कॉरिडोर बनाने की अपने स्तर से घोषणा की. शायद इसी के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया.

बैकफुट पर आया जिला प्रशासन

हालांकि पंडा समुदाय के तीखे विरोध के बाद गया का जिला प्रशासन बैकफुट पर आ गया है. प्रशासन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर जानकारी दी कि विष्णुपद मंदिर कॉरिडोर को लेकर जिला प्रशासन को कई ज्ञापन प्राप्त हुए हैं. जिला प्रशासन स्पष्ट करता है कि इन ज्ञापनों और आवेदनों पर विचार के बाद ही नक्शे को अंतिम रूप दिया जाएगा. अभी कोई सर्वेक्षण या चिह्नीकरण नहीं किया जाएगा.

इंडिया टुडे से बातचीत में गया के डीएम शशांक शुभंकर ने कहा, "दरअसल, जिस नक्शे को लेकर लोग विरोध कर रहे हैं, वह फाइनल नक्शा नहीं है. वह केवल एक ड्राफ्ट है. लोगों के यह कहने के बाद कि उन्हें अंधेरे में रखा जा रहा है, हम लोगों ने वह नक्शा उपलब्ध कराया था. हम लोगों की आपत्तियों पर विचार करते हुए नक्शे को अंतिम रूप देंगे. ड्राफ्ट में हमने अपने स्तर से ही कुछ मंदिरों को छोड़ दिया था. अगर लोग कहते हैं कि कुछ और ऐतिहासिक महत्व की संरचनाएं हैं तो हम उन्हें भी इसमें शामिल कर लेंगे. साथ ही नक्शा फाइनल होने के बाद जिनके घर टूटेंगे, उन्हें उचित मुआवजा भी दिया जाएगा."

इस फैसले के बाद विष्णुपद प्रबंधकारिणी समिति के अध्यक्ष शंभु लाल विठ्ठल ने इंडिया टुडे से कहा, "चूंकि अभी जिला प्रशासन ने मामले को स्थगित कर दिया है, इसलिए अभी हमारा विरोध भी स्थगित है. आगे जैसी स्थिति होगी, वैसा निर्णय लिया जाएगा."

Advertisement
Advertisement