राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के भीतर बड़े टकराव का संकेत मिल रहे हैं. NCP के एक वरिष्ठ नेता ने महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया को चुनौती दी है.
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब सुनेत्रा के बड़े बेटे और राज्यसभा सांसद पार्थ पवार तथा पार्टी के वरिष्ठ नेताओं प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के बीच बढ़ती खींचतान की खबरें हैं.
सुनेत्रा पवार ने 31 जनवरी को उपमुख्यमंत्री पद संभाला था. इससे तीन दिन पहले उनके पति और NCP अध्यक्ष अजित पवार की बारामती में एक विमान हादसे में मौत हो गई थी.
पूर्व राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने दिल्ली की एक लॉ फर्म के जरिए 9 जुलाई को सुनेत्रा पवार और NCP के वरिष्ठ नेताओं को कानूनी नोटिस भेजा.
इसमें उनकी नियुक्ति में कानूनी और प्रक्रियागत खामियों का दावा किया गया है. नोटिस में कहा गया कि 17 फरवरी को NCP ने चुनाव आयोग (EC) को बताया था कि राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल अपने कार्यकाल (2028 तक) की शेष अवधि के लिए अध्यक्ष का कार्यभार संभालेंगे.
इसके साथ ही पार्टी का संशोधित संविधान भी चुनाव आयोग को सौंपा गया था. हालांकि, नोटिस में कहा गया कि 18 फरवरी को NCP के राष्ट्रीय महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव ने नियमों का पालन किए बिना चुनाव प्रक्रिया शुरू कर दी. जबकि उन्हें ऐसा करने का संवैधानिक अधिकार नहीं है.
नोटिस में कहा गया, "चुनाव प्रक्रिया शुरू से ही दोषपूर्ण रही है." इसमें यह भी कहा गया कि सच्चिदानंद सिंह ने 25 फरवरी को पटेल और श्रीवास्तव को पत्र लिखकर पार्टी के संविधान के अनुसार प्रक्रिया का पालन न होने की बात उठाई थी और चुनाव प्रक्रिया वापस लेने की मांग की थी.
सच्चिदानंद सिंह ने नोटिस में कहा है कि NCP के संविधान में राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के लिए विस्तृत प्रक्रिया तय है. इसमें रिटर्निंग ऑफिसर की नियुक्ति, आवश्यक संख्या में प्रतिनिधियों द्वारा नाम प्रस्तावित करना, नामों का प्रकाशन, नाम वापस लेने का समय और रिकॉर्ड किए गए वरीयता मतों के साथ गुप्त मतदान शामिल है.
26 फरवरी को हुए चुनाव में इन नियमों का पालन नहीं किया गया, इसलिए सुनेत्रा पवार पार्टी अध्यक्ष पद पर बने रहने की हकदार नहीं हैं.
नोटिस में 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है.
सच्चिदानंद सिंह ने इंडिया टुडे से कहा, "मैंने सही मुद्दे पर सही सवाल उठाए हैं." उन्होंने खुद को 1999 में पार्टी की स्थापना से ही NCP का सदस्य बताते हुए कहा कि वह सुनेत्रा पवार को पार्टी अध्यक्ष बनते देखना चाहते हैं लेकिन सही तरीके से. उन्होंने कहा कि वह पहले भी हर तरह की प्रक्रियागत गड़बड़ियों के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं, जिसमें 2023 में कर्जत में हुआ पार्टी अधिवेशन भी शामिल है.
प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के करीबी एक NCP नेता ने दावा किया कि सिंह के इस कदम में इन दोनों की कोई भूमिका नहीं है. उन्होंने कहा, "इससे ज्यादा कुछ नहीं होगा. सिंह ने सिर्फ प्रक्रिया पर सवाल उठाया है, जिसे दोबारा चुनाव कराकर आसानी से ठीक किया जा सकता है."
नेता ने माना कि पार्टी के भीतर चल रही खींचतान से उसकी राजनीतिक स्थिति प्रभावित होगी और इससे प्रतिद्वंद्वी NCP (शरदचंद्र पवार) के एक धड़े के पार्टी में विलय की कोशिशों पर भी असर पड़ेगा. वहीं NCP (SCP) का दूसरा धड़ा भविष्य में कांग्रेस में विलय का इच्छुक माना जा रहा है.
14 जुलाई को NCP (SCP) के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री जयंत पाटिल ने NCP नेताओं के साथ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से बंद कमरे में मुलाकात की. इसके बाद NCP (SCP) के BJP नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के साथ जाने की अटकलें तेज हो गई हैं.
NCP (SCP) के आठ लोकसभा सांसद हैं, जो संसद में BJP के लिए अहम साबित हो सकते हैं. वहीं उसके 10 विधायक महाराष्ट्र में महायुति सरकार को और मजबूत करेंगे.
कहा जा रहा है कि NCP (SCP) के आठ में से छह लोकसभा सांसद और उसके एक विधायक BJP में जाने को तैयार हैं. NCP (SCP) के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की तरह उनकी पार्टी में टूट कराना महायुति के लिए आसान नहीं होगा.
शिवसेना (UBT) के छह लोकसभा सांसद अलग होकर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की शिवसेना में शामिल हो गए थे. हालांकि, शरद पवार की उम्र, कद और उनके प्रति लोगों की सहानुभूति को देखते हुए NCP (SCP) में ऐसा करना मुश्किल होगा.
BJP के एक वरिष्ठ विधायक ने एक और समस्या की ओर इशारा किया. उन्होंने कहा कि अगर अटकलों के मुताबिक NCP (SCP) का NCP में विलय होता है, तो सुनेत्रा और पार्थ पवार को पीछे हटना पड़ सकता है और पूर्व NCP (SCP) नेता पार्टी की कमान संभाल सकते हैं.
NCP के पदाधिकारियों ने माना कि असली समस्या पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच बढ़ती दूरी है, जिससे पार्टी के भीतर बातचीत लगभग ठप हो गई है.
हालांकि, बृजमोहन श्रीवास्तव ने कहा कि वे सिंह की आपत्तियों को गंभीरता से लेंगे. उन्होंने कहा, "हम कोशिश करेंगे कि इन मुद्दों का उचित समाधान निकाला जाए."
श्रीवास्तव, जिन्हें प्रफुल्ल पटेल का करीबी माना जाता है, उन्होंने कहा, "पार्टी में कोई मतभेद नहीं है लेकिन सुनेत्रा पवार के चुनाव को लेकर चुनाव आयोग को जो जानकारी दी गई है. वह सही नहीं है. चुनाव आयोग को गलत जानकारी देना गैरकानूनी है."
प्रफुल्ल पटेल ने किसी भी तरह के मतभेद से इनकार करते हुए कहा कि सिंह के पत्र का "कोई महत्व नहीं है.
NCP और महायुति सरकार में यह धारणा है कि सुनेत्रा अभी अपने पति अजित पवार जैसी भूमिका में पूरी तरह नहीं ढल पाई हैं. अजित पवार अपनी सख्त कार्यशैली, प्रशासन पर पकड़ और पार्टी के क्षेत्रीय नेताओं के बीच संतुलन बनाए रखने की क्षमता के लिए जाने जाते थे.
अजित पवार की मौत के बाद NCP में उथल-पुथल मची हुई है. सूत्रों के मुताबिक, सुनेत्रा का अपने बेटे पार्थ पवार पर बढ़ता भरोसा पार्टी के पुराने नेताओं के एक वर्ग में असहजता पैदा कर रहा है. पार्थ और उनके छोटे भाई जय को क्रमशः पार्टी का महासचिव और राष्ट्रीय सचिव बनाया गया है.
अजित पवार के समय प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे को पार्टी संगठन का जिम्मेदार माना जाता था. आरोप है कि दोनों ने पहले चुनाव आयोग को पत्र लिखकर बताया था कि पार्टी के संविधान में संशोधन कर सभी अधिकार कार्यकारी अध्यक्ष को दे दिए गए हैं. तटकरे के विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक पार्टी कार्यक्रम के पोस्टरों से अजित और सुनेत्रा की तस्वीरें गायब होना भी चर्चाओं का कारण बना.
इसी तरह, 29 अप्रैल को NCP के जरिए चुनाव आयोग को सौंपी गई पदाधिकारियों की सूची में प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे के नाम भी नहीं थे. हालांकि, सुनेत्रा ने इसे लिपिकीय गलती बताते हुए कहा कि इसे ठीक कर दिया जाएगा.
बताया जाता है कि प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने शरद पवार से मुलाकात कर पार्थ पवार को लेकर शिकायत की थी और परिवार के वरिष्ठ सदस्य के तौर पर उनसे हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था.
हालांकि, आधिकारिक तौर पर तटकरे और पटेल दोनों ने पार्टी में किसी भी तरह के मतभेद से इनकार किया है. तनाव कम करने के लिए पटेल के करीबी राजेंद्र जैन को राज्यसभा और तटकरे के बेटे अनिकेत को विधान परिषद भेजा गया लेकिन इसके बावजूद NCP के विभिन्न गुटों के बीच टकराव जारी है.

