केंद्रीय मंत्री और BJP नेता सुकांत मजूमदार पिछले दिनों एक अलग ही भूमिका में नजर आए. राजनीतिक भाषणों और पार्टी की बैठकों से अलग इस बार उन्होंने रंगमंच पर संवाद बोले. मौका था कोलकाता के रवींद्र सदन में 1 नवंबर को ऐतिहासिक नाटक 'केसरी हत्या' के मंचन का. यह नाटक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, उनके राजनीतिक सफर और रहस्यमयी मौत पर आधारित है.
बंगाल के थिएटर ग्रुप रंगा ओपेरा की ओर से तैयार इस नाटक में मुखर्जी के राजनीतिक सफर को दिखाया गया है. इसमें जवाहरलाल नेहरू की कैबिनेट से उनके इस्तीफे, भारतीय जनसंघ के गठन और युवा अटल बिहारी वाजपेयी के साथ उनके राजनीतिक संबंधों को भी दिखाया गया है. रंगमंच पर मजूमदार ने अटल बिहारी वाजपेयी की भूमिका निभाई जबकि अभिनेता कौशिक अधिकारी श्यामा प्रसाद मुखर्जी के किरदार में नजर आए. नाटक का निर्देशन देबाशीष बिस्वास ने किया है.
थिएटर ग्रुप ने करीब दो महीने पहले इस भूमिका के लिए केंद्रीय मंत्री से संपर्क किया था. मजूमदार ने बताया कि इस प्रस्ताव को स्वीकार करने में उन्हें जरा भी हिचकिचाहट नहीं हुई. उन्होंने कहा, "मुझे यह भूमिका ऑफर की गई थी और किसी भी दूसरे बंगाली की तरह मैं भी मंच पर अभिनय करना चाहता था. इसलिए मैंने इसके लिए हामी भर दी."
दर्शकों की तालियों के बीच उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि आपको यह नाटक पसंद आएगा."
हालांकि नाटक की तैयारी के लिए समय निकालना आसान नहीं था. मंत्री पद की जिम्मेदारियों के बीच उन्हें रिहर्सल करनी पड़ी. मजूमदार ने बताया कि सरकारी कामकाज के बीच उन्होंने नाटक की तैयारी जारी रखी. यहां तक कि दूसरे राज्यों के दौरे से लौटने के बाद भी रिहर्सल के लिए समय निकाला. उन्होंने कहा, "मैं पहले सिर्फ दो बार रिहर्सल कर पाया था और प्रस्तुति से एक रात पहले एक बार रिहर्सल की थी." उन्होंने बताया कि वे इससे एक दिन पहले ही अरुणाचल प्रदेश से लौटे थे.
इस नाटक में मुखर्जी के जीवन से जुड़ी जानी-पहचानी घटनाओं से आगे की कहानी दिखाने की कोशिश की गई है. आयोजकों के मुताबिक इससे पहले बने नाटकों में उनके राजनीतिक जीवन की कुछ अहम घटनाओं को तो दिखाया गया था लेकिन जम्मू-कश्मीर को लेकर उनके आंदोलन उस दौरान RSS और भारत सेवाश्रम संघ की भूमिका और जून 1953 में उनकी मौत से जुड़ी परिस्थितियों को पूरी तरह से नहीं दिखाया गया था.
मुखर्जी को अनुच्छेद -70 के तहत जम्मू-कश्मीर को मिले विशेष संवैधानिक प्रावधानों के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कश्मीर में गिरफ्तार किया गया था. हिरासत के दौरान उनकी अचानक मौत हुई जो आज भी विवाद का विषय बनी हुई है. उनके समर्थक उनकी मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाते रहे हैं और इसके पीछे राजनीतिक साजिश का आरोप लगाते हैं.
मजूमदार दर्शकों की प्रतिक्रिया से खुश नजर आए. उन्होंने उम्मीद जताई कि 'केसरी हत्या' के और शो होंगे और इस नाटक को बंगाल के अलग-अलग जिलों में भी ले जाया जाएगा.
राजनीति से हटकर कुछ नया करने का मजूमदार का यह पहला मौका नहीं है. दिसंबर 2024 में वह एक फैशन शो में मॉडल के तौर पर रैंप पर भी उतरे थे. अब वे एक बार फिर सुर्खियों में हैं. इस बार उनके हाथ में स्क्रिप्ट है. उन्होंने नाटक की पोशाक पहनी है और याद रखने के लिए उनके पास एक अलग तरह की भूमिका है.
रवींद्र सदन में मौजूद लोगों में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सलाहकार सुब्रत गुप्ता, शिवपुर से विधायक और अभिनेता रुद्रनील घोष और राज्यसभा के पूर्व सांसद जवाहर सरकार भी शामिल थे.
मजूमदार के लिए राजनीतिक मंच से थिएटर के मंच तक का सफर काफी सहज नजर आया. उन्होंने अभिनय में अपना दूसरा करियर बना लिया है या नहीं, इस बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी लेकिन कम से कम उस शाम मंत्री ने तालियों की गूंज को ही अपनी बात कहने दी.

