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शाइन सिटी का सपना कैसे बना उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा निवेश घोटाला?

उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े निवेश घोटाले के कथित मास्टरमाइंड राशिद नसीम को सात साल की फरारी के बाद UAE में गिरफ्तार कर लिया गया. उससे पूछताछ के बाद घोटाले से जुड़े कई बड़े खुलासे होने की संभावना है

Rashid Naseem arrested in UAE
शाइन सिटी घोटाले के आरोप में राशिद नसीम को UAE से गिरफ्तार किया गया है
अपडेटेड 2 मार्च , 2026

करीब सात साल तक फरार रहने के बाद पिछले हफ्ते संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में हुई गिरफ्तारी ने शाइन सिटी घोटाले के कथित मास्टरमाइंड राशिद नसीम की कहानी को फिर सुर्खियों में ला दिया है. जांच एजेंसियां मान रही हैं कि उसकी भारत वापसी इस पूरे नेटवर्क की परतें खोल सकती है.

अब तक दर्ज 554 एफआईआर, सैकड़ों गिरफ्तारियां, अरबों रुपये की कथित हेराफेरी और कई राज्यों में फैला रियल एस्टेट नेटवर्क इस मामले को उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े निवेश घोटालों में खड़ा करता है. इस मामले में 554 से अधिक एफआईआर दर्ज हैं.

अलग अलग चरणों में 80 से ज्यादा आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है. 500 से अधिक मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है. अब जांच का फोकस उस व्यक्ति पर है जिसे इस पूरे ऑपरेशन का केंद्र माना जा रहा है.

प्रयागराज के करेली निवासी राशिद नसीम ने  शाइन सिटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड की स्थापना 2013 में की. पहला कार्यालय प्रयागराज में खोला. इसके छह माह के अंदर ही उसने गोमतीनगर के एसआरएस मॉल के सामने लग्जरी कार्यालय खोला. तीन से पांच साल के भीतर कंपनी ने उत्तर प्रदेश के कई शहरों के अलावा दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और झारखंड तक नेटवर्क फैलाने का दावा किया. एजेंट, सब एजेंट और रीजनल कोऑर्डिनेटर की बहुस्तरीय संरचना खड़ी की गई. इस तेजी से विस्तार ने निवेशकों के बीच यह धारणा बनाई कि कंपनी मजबूत आधार पर खड़ी है.

भरोसे का निर्माण : मॉडस ऑपरेंडी का पहला चरण

जांच एजेंसियों के मुताबिक, कथित मॉडस ऑपरेंडी का पहला चरण था भरोसा बनाना. कंपनी ने रियल एस्टेट को आधार बनाकर निवेश योजनाएं पेश कीं. प्लॉट, फ्लैट, फार्म हाउस, कमर्शियल स्पेस, यहां तक कि ज्वेलरी और लग्जरी गाड़ियों तक के ऑफर दिए गए. निवेशकों को बताया गया कि तय अवधि में निवेश दोगुना या आकर्षक रिटर्न के साथ वापस मिलेगा.

शुरुआती निवेशकों को समय पर भुगतान या आंशिक रिटर्न देकर विश्वास मजबूत किया गया. बड़े सेमिनार, प्रमोशनल इवेंट और आकर्षक प्रेजेंटेशन इस रणनीति का हिस्सा थे. एजेंटों को मोटा कमीशन दिया जाता था, जिससे वे अपने सामाजिक दायरे में निवेश जुटाते. कई मामलों में निवेश रिश्तों और स्थानीय भरोसे के आधार पर हुआ.

जांचकर्ताओं का दावा है कि जैसे-जैसे निवेश का दायरा बढ़ा, मॉडल पोंजी संरचना की ओर झुकता गया. नए निवेशकों से जुटाई गई रकम का इस्तेमाल पुराने निवेशकों को भुगतान में किया जाने लगा. इससे यह आभास बना कि कंपनी लगातार मुनाफा कमा रही है और भुगतान कर रही है.

समस्या तब शुरू हुई जब नए निवेश की रफ्तार कम हुई. भुगतान अटकने लगे. निवेशकों को प्लॉट का कब्जा नहीं मिला, न रिटर्न. कई जगहों पर दस्तावेजों की वैधता पर सवाल उठे. रेरा रिकॉर्ड के मुताबिक लखनऊ में आधिकारिक तौर पर सिर्फ 58 प्लॉट दर्ज थे, जबकि कंपनी ने तीन हजार से अधिक बुकिंग का दावा किया. यही अंतर जांच का अहम आधार बना.

कंपनियों का जाल और फंड डायवर्जन

शाइन सिटी के साथ दर्जनों संबद्ध कंपनियां बनाई गईं. कानपुर, दिल्ली और हरियाणा के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज में कई इकाइयों का पंजीकरण हुआ. जांच में 30 से अधिक संबद्ध और 34 संदिग्ध शेल एंटिटी की पहचान की गई. आरोप है कि निवेशकों से जुटाए गए फंड को इन कंपनियों के जरिए घुमाया गया. इससे असली स्रोत और अंतिम उपयोग का पता लगाना कठिन हो गया.

धन का इस्तेमाल जमीन, कमर्शियल प्रॉपर्टी, कृषि भूमि और अन्य अचल संपत्तियों की खरीद में किया गया. प्रवर्तन निदेशालय यानी Enforcement Directorate (इडी) ने 2021 में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की. एजेंसी के अनुसार अब तक 266.70 करोड़ रुपये की संपत्ति अटैच की जा चुकी है.

यूपी में BJP सरकार बनने पर 2017 के बाद जब शिकायतों और एफआईआर की संख्या तेजी से बढ़ी, तब दबाव बढ़ने लगा. आरोप है कि 2019 में राशिद नसीम भारत छोड़कर नेपाल गया. वहां हिरासत में लिए जाने और जमानत मिलने के बाद वह दुबई पहुंचा. एजेंसियों का कहना है कि दुबई से ही नेटवर्क संचालित होता रहा. भारत में मौजूद सहयोगियों के जरिए फंड मूवमेंट और निर्देश दिए जाते रहे. पासपोर्ट रद्द हुआ, लुक आउट सर्कुलर जारी हुआ और इंटरपोल प्रक्रिया शुरू की गई. जनवरी 2026 में यूएई को विस्तृत डोजियर सौंपा गया, जिसके बाद गिरफ्तारी संभव हुई.

जांच का फैलता दायरा

इस मामले में राज्य की आर्थिक अपराध शाखा और ईडी समानांतर जांच कर रहे हैं. 80 से अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी हैं. आसिफ नसीम, जिन्हें कंपनी का मैनेजिंग डायरेक्टर बताया गया, 2021 में गिरफ्तार हुए. वाइस प्रेसिडेंट मनीष जायसवाल को 2024 में पकड़ा गया. 500 से अधिक मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है. जांचकर्ता अब यह भी देख रहे हैं कि क्या कंपनी को नियामकीय स्तर पर किसी तरह की अनदेखी या संरक्षण मिला था.

जानकारी के मुताबिक पूछताछ में वित्तीय ट्रेल, बेनामी संपत्ति और संभावित व्हाइट कॉलर लिंक पर खास फोकस रहेगा. 2021 में सामने आई एक ऑडियो क्लिप में राशिद ने दावा किया था कि एजेंसियों ने 500 करोड़ से अधिक की संपत्ति जब्त की है और बाजार मूल्य उससे कहीं ज्यादा है. उसने किसानों और बिचौलियों के बीच 300 करोड़ फंसे होने की भी बात कही थी. जांच एजेंसियां इन दावों की स्वतंत्र जांच कर रही हैं. यह भी देखा जा रहा है कि क्या जमीन सौदों में दोहरी रजिस्ट्री या विवादित लेनदेन शामिल थे.

हजारों निवेशकों ने छोटे बड़े अमाउंट लगाए. कई मध्यमवर्गीय परिवारों ने जीवनभर की बचत प्लॉट या घर के सपने में लगा दी. शुरुआत में समय पर भुगतान ने भरोसा बढ़ाया. बाद में जब दफ्तर बंद होने लगे और भुगतान रुके, तब शिकायतों की बाढ़ आई. लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, कानपुर, बाराबंकी और कौशांबी में बड़ी संख्या में मुकदमे दर्ज हुए. गोमतीनगर, विकासनगर, बख्शी का तालाब, मोहनलालगंज और गोसाईगंज जैसे इलाकों में विरोध प्रदर्शन भी हुए.

कानूनी स्थिति और आगे की राह

विशेष पीएमएलए अदालत ने राशिद नसीम को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया. प्रत्यर्पण की प्रक्रिया विदेश मंत्रालय के माध्यम से जारी है. जांच एजेंसियों का मानना है कि उसकी कस्टोडियल पूछताछ से वित्तीय लेनदेन की पूरी श्रृंखला सामने आ सकती है. यह भी स्पष्ट हो सकता है कि किन लोगों ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से समर्थन दिया.

यह मामला केवल एक व्यक्ति या कंपनी तक सीमित नहीं है. इतने बड़े पैमाने पर बुकिंग और निवेश के दावों के बावजूद नियामकीय स्तर पर समय रहते हस्तक्षेप क्यों नहीं हुआ, यह भी जांच का विषय है. रेरा पंजीकरण और वास्तविक बुकिंग के बीच अंतर ने निगरानी तंत्र पर सवाल उठाए हैं. एजेंसियां अब यह देख रही हैं कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए क्या सख्ती जरूरी है.

करीब एक हजार करोड़ रुपए के शाइन सिटी घोटाले की कहानी भरोसे, लालच और कॉरपोरेट जटिलता के मिश्रण की कहानी है; चमकदार दफ्तरों और ऊंचे रिटर्न के वादों से शुरू हुई यह यात्रा हजारों निवेशकों के लिए निराशा में बदली. राशिद नसीम की गिरफ्तारी को जांच एजेंसियां बड़ी सफलता मान रही हैं, लेकिन असली चुनौती अब शुरू होती है. फंड की रिकवरी, जिम्मेदारी तय करना और पीड़ितों को राहत देना लंबी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा होगा. आने वाले महीनों में यह साफ होगा कि क्या यह मामला निवेश धोखाधड़ी के खिलाफ सख्त मिसाल बन पाता है या फिर यह भी लंबी न्यायिक प्रक्रिया में उलझा रह जाता है. 

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