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बांकीपुर की हार को सम्राट चौधरी क्यों नहीं मानते सरकार का रिपोर्ट कार्ड?

बांकीपुर की हार को विपक्ष ने सरकार के खिलाफ जनता की राय बताया लेकिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इसे सिर्फ एक विधानसभा सीट का नतीजा बताते हैं

सम्राट चौधरी ने कहा कि पुलिस की गलती पर भी होगी कार्रवाई (Photo: ITG)
'पंचायत बिहार आज तक' के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी
अपडेटेड 23 सितंबर , 2026

पिछले महीने बिहार में विपक्ष ने कहा था कि बांकीपुर उपचुनाव के नतीजे से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सरकार के काम को लेकर लोगों की राय का पता चलेगा. इस सीट पर प्रशांत किशोर ने 19,000 से ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की थी.

अप्रैल में सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद बिहार में यह पहला चुनाव था. इसलिए विपक्ष का कहना था कि बांकीपुर के नतीजे से पता चलता है कि लोग सम्राट चौधरी की सरकार के काम को किस नजर से देख रहे हैं लेकिन सम्राट चौधरी इससे सहमत नहीं थे. उन्होंने कहा : "एक सीट चुनाव तय नहीं करता."

18 सितंबर को टीवी न्यूज प्लेटफॉर्म ‘पंचायत आज तक बिहार’ में सम्राट चौधरी से पूछा गया कि अगर बिहार में सब कुछ ठीक चल रहा है, तो BJP बांकीपुर सीट क्यों हार गई. यह सीट BJP के पास 30 साल से ज्यादा समय से थी. पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी पहले इसी सीट से विधायक रह चुके हैं.

‘पंचायत आज तक बिहार’ के मंच पर सम्राट चौधरी से कहा गया कि विपक्ष बांकीपुर की हार को उनकी सरकार के काम का नतीजा बता रहा है लेकिन सम्राट चौधरी ने इसे मानने से इनकार कर दिया और प्रशांत किशोर का नाम भी नहीं लिया.

राज्यसभा जाने के बाद नितिन नवीन ने पटना की बांकीपुर सीट छोड़ दी थी. इसके बाद इस सीट पर हुए उपचुनाव के लिए BJP ने जोर-शोर से प्रचार किया क्योंकि पार्टी को भरोसा नहीं था कि नितिन नवीन के पुराने समर्थक अपने आप BJP को वोट दे देंगे. 3 अगस्त को जीत के बाद जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने कहा कि BJP का 30 साल पुराना गढ़ टूटना नए मुख्यमंत्री के खिलाफ लोगों के वोट का संकेत है.

प्रशांत किशोर की जीत इसलिए भी खास थी क्योंकि मुख्यमंत्री बनने के बाद यह पहला चुनाव था, जिसमें बांकीपुर के लोगों ने सम्राट चौधरी की सरकार चलाने के तरीके को लेकर अपना फैसला दिया था. ‘पंचायत आज तक बिहार’ में सम्राट चौधरी ने इस हार को ज्यादा महत्व नहीं दिया. उन्होंने कहा कि आखिर फैसला तो जनता ही करती है.

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2025 में एनडीए ने बिहार की 243 विधानसभा सीटों में से 202 सीटें जीती थीं. अररिया, भागलपुर, बक्सर और सासाराम से लेकर हाजीपुर तक एनडीए को जीत मिली थी. अब बांकीपुर के विधायक प्रशांत किशोर को अपना काम करने देना चाहिए.

जब उनसे फिर पूछा गया कि क्या प्रशांत किशोर की जीत बिहार की राजनीति में किसी नए बदलाव का संकेत है, तब भी सम्राट चौधरी ने उनका नाम नहीं लिया. उनका कहना था कि यह किसी एक व्यक्ति की बात नहीं है. नरेंद्र मोदी, नीतीश कुमार और एनडीए ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है, वह 2030 तक चलेगी. इसके बाद बिहार के लोग फिर अपना फैसला देंगे.

इस तरह सम्राट चौधरी ने साफ कर दिया कि वह बांकीपुर के नतीजे को ज्यादा बड़ा मुद्दा नहीं मानते. कई लोग इस नतीजे को मुख्यमंत्री के लिए जनता की राय बता रहे थे लेकिन सम्राट चौधरी ने इसे सिर्फ एक सीट का चुनावी नतीजा बताया. उनका कहना था कि अब बांकीपुर के विधायक प्रशांत किशोर को अपना काम करना चाहिए.

जब उनसे पूछा गया कि Gen Z का प्रदर्शन, परीक्षा के पेपर को लेकर विवाद और बांकीपुर उपचुनाव का नतीजा एक ही समय पर क्यों आया, तो सम्राट चौधरी ने कहा कि उनकी सरकार युवाओं के साथ है. उन्होंने बताया कि वे राज्य के पहले मुख्यमंत्री हैं, जिन्होंने युवा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर तुरंत वापस ले लीं.

लेकिन सम्राट चौधरी सरकार के सामने सिवान और भोजपुर की दो घटनाओं को लेकर सवाल थे. 25 जुलाई को परीक्षा के पेपर लीक और नीट मेडिकल प्रवेश परीक्षा को लेकर पूरे बिहार में छात्रों का आंदोलन चल रहा था. इसी दौरान सिवान में पुलिस ने गोली चला दी. एक सिपाही के हाथ में एके-47 राइफल भी दिखाई दी, जिसका वीडियो सामने आया. जिला मजिस्ट्रेट ने इसे पुलिस की बड़ी गलती माना और उस सिपाही को सस्पेंड कर दिया गया.

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि सिपाही ने एके-47 से हवा में चार गोलियां चलाई थीं. सिपाही जेपी चौक के पास भीड़ के बीच फंस गया था. सरकार का कहना था कि भीड़ को संभालने के लिए एके-47 सही हथियार नहीं था. सरकार ने यह भी बताया कि तीन लोगों को जो गोलियां लगी थीं, उनमें एक नाबालिग भी शामिल था, लेकिन ये गोलियां उस सिपाही की एके-47 से नहीं चली थीं.

लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह था कि युवाओं से भरी सड़क पर एक पुलिसकर्मी के हाथ में एके-47 जैसी राइफल दिखना कानून-व्यवस्था को लेकर ‘जीरो टॉलरेंस’ की बात करने वाली किसी भी सरकार के लिए ठीक तस्वीर नहीं थी.

भोजपुर की घटना कुछ समय पहले की थी और तब तक मामला थोड़ा शांत हो चुका था. 17 जून को बिलौती गांव में पुलिस ने भरत भूषण तिवारी को गोली मारी थी. बाद में इनकी मौत हो गई. पुलिस का कहना था कि भरत भूषण तिवारी के पास हथियार था और पुलिस ने अपनी सुरक्षा के लिए उन पर गोली चलाई थी लेकिन भरत भूषण के परिवार ने पुलिस की इस बात को गलत बताया.

मामला बढ़ने के बाद बिहार कैबिनेट ने हाई कोर्ट के एक रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच कराने का फैसला लिया. एफआईआर में कुछ अधिकारियों के नाम दर्ज किए गए, कुछ अधिकारियों को सस्पेंड किया गया और एक सिपाही को गिरफ्तार कर लिया गया.

‘पंचायत आज तक बिहार’ में जब भरत भूषण तिवारी की मौत और उन्हें गोली मारे जाने को लेकर सवाल पूछा गया, तो मुख्यमंत्री ने बताया कि 48 घंटे के अंदर ही जांच समिति बना दी गई थी. समिति ने पुलिस की गलती पाई थी. वह भरत भूषण तिवारी के परिवार से भी मिल चुके थे और जिन पुलिस अधिकारियों की गलती सामने आई, उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही थी. मुख्यमंत्री का कहना था कि सजा देने का फैसला अब अदालत को करना है और यह फैसला जल्द होना चाहिए.

जब उनसे पूछा गया कि सिवान और भोजपुर की घटनाओं के बाद भी उनकी सरकार कानून-व्यवस्था को अपनी बड़ी ताकत कैसे बता रही है और सेना के एक जवान से जुड़े मामले पर भी सवाल उठ रहे हैं तो सम्राट चौधरी ने इन घटनाओं पर दोबारा बात नहीं की. उन्होंने कहा कि सुशासन का मतलब है कि कानून सबके लिए बराबर हो. अपराध करने वाले को सजा मिले, गंभीर मामले में तुरंत कार्रवाई हो और समय पर सजा मिले.

परीक्षा में गड़बड़ी करने वालों पर कार्रवाई के लिए सम्राट चौधरी ने गुंडा एक्ट का जिक्र किया. उनका कहना था कि परीक्षा में धोखाधड़ी करने वाले जिन लोगों के खिलाफ एक या दो बार चार्जशीट दाखिल हो चुकी है, उन्हें गुंडा एक्ट के तहत 18 महीने तक जेल में रखा जाना चाहिए.

जब उनसे पूछा गया कि क्या वे उत्तर प्रदेश के योगी आदित्यनाथ और पश्चिम बंगाल के शुभेंदु अधिकारी की तरह बुलडोजर कार्रवाई और पुलिस एनकाउंटर के लिए जाने जाना चाहते हैं, तो सम्राट चौधरी ने इससे इनकार किया. उन्होंने साफ कहा, “मैं किसी दौड़ में नहीं हूं.”

पूरी बातचीत में बांकीपुर की हार को सिर्फ एक सीट का नतीजा बताया गया. वहीं, एके-47 और एनकाउंटर से जुड़े सवालों पर जांच, जेल और कानून की बात हुई. इसके बाद बातचीत का ज्यादातर हिस्सा अगले 150 दिनों में सरकार की योजनाओं पर रहा, जैसे सरकार 2030 के लक्ष्य की ओर आधा रास्ता तय कर चुकी हो.

शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने 700 मॉडल स्कूल, विद्यार्थी साथी ऐप और 15 जुलाई को ऐप शुरू होने के बाद एक ही दिन में 211 डिग्री कॉलेज खोलने की बात बताई. इसके बाद उद्योग से जुड़ी योजनाओं का जिक्र किया गया.

इन योजनाओं में 950 से 1,000 उद्योगों के लिए जमीन देना, वायबिलिटी गैप फंडिंग से एयरपोर्ट बनाना, ऑस्ट्रेलिया में मखाना भेजना, 12 टाउनशिप बनाना और 80,000 एकड़ जमीन पर पटना में एक टाउनशिप बनाने की योजना शामिल है. बाढ़, रोजगार, महिलाओं और शराबबंदी को लेकर भी सवालों के जवाब दिए गए. सम्राट चौधरी ने दिखाया कि वह जरूरत के हिसाब से कभी सोच-समझकर कदम उठाते हैं और कभी तेजी से फैसला लेते हैं.

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