अनुराग रायज़ादा
राजस्थान पर्यटन विभाग राज्य को वर्ष 2030 तक देश के सबसे विविध और अनुभव–समृद्ध पर्यटन गंतव्यों में स्थापित करने की दिशा में लगातार काम कर रहा है. उप-मुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री दिया कुमारी के नेतृत्व में पर्यटन क्षेत्र में विरासत संरक्षण, नए पर्यटन सर्किटों के विकास, ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन, धार्मिक पर्यटन, एस्ट्रो टूरिज्म और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य की ब्रांडिंग जैसे क्षेत्रों में विशेष पहल की जा रही है.
पर्यटन विभाग की विभिन्न योजनाओं और पहलों का उद्देश्य राजस्थान की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहरों को पर्यटन विकास के साथ जोड़ते हुए रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना है. इसी सोच के तहत प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने तथा नए पर्यटन उत्पाद विकसित करने पर कार्य किया जा रहा है.
संयुक्त निदेशक दलीप सिंह राठौड़ के उप-मुख्यमंत्री दिया कुमारी के विजन के अनुसार राज्य सरकार द्वारा विरासत संरक्षण को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है. शेखावाटी क्षेत्र की ऐतिहासिक हवेलीयों के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में शुरू किए गए प्रयासों के साथ–साथ विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों और सांस्कृतिक धरोहरों को पर्यटन से जोड़ने की योजनाएं तैयार की गई हैं. राठौड़ ने कहा कि विभाग का मानना है कि विरासत संरक्षण और पर्यटन विकास एक–दूसरे के पूरक हैं और दोनों के समन्वय से स्थानीय स्तर पर नए अवसर सृजित हो सकते हैं.
पर्यटन विभाग प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों को नई पहचान दिलाने के लिए नए पर्यटन सर्किटों के विकास पर भी काम कर रहा है. महाराणा प्रताप टूरिस्ट सर्किट जैसी परियोजनाओं के माध्यम से राजस्थान के इतिहास, संस्कृति और गौरवशाली विरासत को नए स्वरूप में प्रस्तुत करने की योजना है. इन परियोजनाओं से पर्यटकों को प्रदेश के कम परिचित लेकिन महत्वपूर्ण स्थलों तक पहुंचने का अवसर मिलेगा.
राठौड़ ने बताया की ग्रामीण और जनजातीय पर्यटन को भी राज्य की पर्यटन नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है. विभाग गांवों की संस्कृति, लोक परंपराओं, हस्तशिल्प, स्थानीय खानपान और ग्रामीण जीवन शैली को पर्यटन अनुभव के रूप में विकसित करने की दिशा में कार्य कर रहा है. इससे स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ने के साथ–साथ पर्यटन से जुड़े आर्थिक लाभ भी ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच सकेंगे.
धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में भी विभिन्न प्रमुख तीर्थस्थलों पर सुविधाओं के विकास और पर्यटक सेवाओं को सुदृढ़ बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं. नाथद्वारा, खाटूश्यामजी, सालासर बालाजी, करणी माता और अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
राजस्थान पर्यटन विभाग ने हाल के वर्षों में एस्ट्रो टूरिज्म को भी नई संभावनाओं के क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया है. पश्चिमी राजस्थान के मरुस्थलीय क्षेत्रों में उपलब्ध अनुकूल प्राकृतिक परिस्थितियों के आधार पर इस क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं. इससे राजस्थान के पर्यटन उत्पादों में विविधता आने की उम्मीद है.
अंतरराष्ट्रीय पर्यटन बाजारों में राजस्थान की मजबूत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए विभाग विभिन्न देशों में आयोजित पर्यटन मेलों, रोडशो और व्यापारिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी कर रहा है. पर्यटन विभाग का लक्ष्य राजस्थान को वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख पर्यटन गंतव्य के रूप में स्थापित करना है.
संयुक्त निदेशक दलीप सिंह के अनुसार पर्यटन विभाग डिजिटल तकनीकों और नवाचार आधारित सेवाओं को भी पर्यटन विकास का महत्वपूर्ण आधार बना रहा है. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, डिजिटल प्रचार और आधुनिक पर्यटक सेवाओं के माध्यम से पर्यटकों को बेहतर अनुभव उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है.
पर्यटन विभाग का मानना है कि विरासत संरक्षण, सांस्कृतिक संवर्धन, ग्रामीण विकास, आधुनिक पर्यटन अवसंरचना और वैश्विक प्रचार–प्रसार के समन्वित प्रयासों से राजस्थान आने वाले वर्षों में पर्यटन क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा.

