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STD गैंग, कंडक्टर और नेता : राजस्थान रोडवेज घोटाले की अजब-गजब कहानी

STD-PCO बूथ गुजरे जमाने की बात हो गए लेकिन राजस्थान रोडवेज को हर दिन लाखों रुपए की चपत लगाने का खेल जो ऐसे ही बूथों से शुरू हुआ था, अब जाकर पकड़ा गया

फाइल फोटो.
राजस्थान रोडवेज की एक बस (फाइल फोटो)
अपडेटेड 3 फ़रवरी , 2026

देश में मोबाइल फोन के आने के बाद सब्सक्राइबर ट्रंक कॉलिंग (STD) और पब्लिक कॉल ऑफिस (PCO) चाहे गुजरे जमाने की बात हो गई हो मगर राजस्थान रोडवेज में अभी भी 'STD' राज चल रहा है. किसी एक दो जिलों में नहीं बल्कि पूरा प्रदेश इस STD गिरोह की गिरफ्त में है. 

राजस्थान पुलिस ने प्रदेश के 12 जिलों में 'ऑपरेशन क्लीन राइड' चलाकर राजस्थान रोडवेज को आर्थिक चोट पहुंचाने वाले STD गिरोह का खुलासा किया है. यह गिरोह रोडवेज के मुनाफे को हर दिन करीब 40-50 प्रतिशत नुकसान पहुंचा रहा था. 

इस गिरोह के 'STD' नाम की कहानी भी बेहद रोचक है. बताया जा रहा है कि यह गिरोह उस वक्त अस्तित्व में आया जब पूरे देश में STD-PCO का दौर था. राजस्थान में रोडवेज के हर छोटे-बड़े बस स्टैंड पर STD-PCO संचालित थे. रोडवेज बसों के कई कंडक्टर यात्री टिकटों में हेराफेरी करते तो उन्हें सामने उड़न दस्ता मिलने का खतरा बना रहता था. 

ऐसे में उड़न दस्तों की सूचना देने के लिए कंडक्टरों ने इन STD-PCO संचालकों को काम सौंपा. प्रदेश में किसी भी सड़क पर उड़न दस्ता निकलता तो ये STD-PCO संचालक उस रूट के तमाम STD-PCO संचालकों को उस संबंध में सूचित कर देते और वहां से सूचना कंडक्टर के पास पहुंच जाती थी. उड़न दस्ते की सूचना देने के बदले रोडवेज बस के कंडक्टर इन्हें हर माह कमिशन देते थे. दिलचस्प बात ये है कि धीरे-धीरे STD-PCO बंद हो गए लेकिन इसके बाद भी यह गिरोह सक्रिय रहा. 

मोबाइल फोन आने के बाद तो इस गिरोह ने पूरे प्रदेश में अपने पांव जमा लिए. प्रदेश में जहां भी रोडवेज बसों का संचालन हो रहा है वहां इस गिरोह के सदस्य काम कर रहे हैं. रोडवेज के उड़न दस्तों की हर मिनट की खबर इस STD गिरोह के पास होती है. गिरोह के जरिए उड़न दस्तों की लोकेशन की सूचना पहले ही कंडक्टरों तक पहुंच जाती थी और वे उड़न दस्ते के पास पहुंचने तक सभी यात्रियों को टिकट जारी कर देते थे. 

झालावाड़ पुलिस ने स्टिंग ऑपरेशन के जरिए इस गिरोह का खुलासा किया. झालावाड़ पुलिस अधीक्षक अमित कुमार को जब रोडवेज में इस तरह के गिरोह की सूचना मिली तो उन्होंने कमल कुमार के नेतृत्व में एक टीम गठित की. इस टीम में शामिल पुलिसकर्मियों ने कई दिन तक यात्री बनकर रोडवेज की बसों में सफर किया और कंडक्टरों तथा STD गिरोह के बीच डीलिंग का स्टिंग ऑपरेशन किया. कई कंडक्टरों और STD गिरोह के सदस्यों को रडार पर लेकर उनकी वीडियो और कॉल रिकॉर्डिंग इकट्ठा की. STD गिरोह का सरगना झालावाड़ नगर परिषद का निर्दलीय पार्षद निकला. राजनीतिक रसूख के दम पर वह रोडवेज की बसों में अपनी मर्जी के कंडक्टरों और ड्राइवरों की ड्यूटी लगवाता था. पार्षद की मां रोडवेज में काम कर चुकी है इसलिए वह विभाग की हर गतिविधि से वाकिफ था. 

रोडवेज कंडक्टर यात्रियों को बिना टिकट यात्रा कराने से जो पैसा कमाते थे उसमें से हर फेरे के लिए 1500 से 2000 रुपए STD गिरोह को दिए जाते थे. रोडवेज का कोई अधिकारी या कर्मचारी इस गिरोह के काम में दखलंदाजी करता तो गिरोह के लोग उसके साथ मारपीट करते थे. पुलिस ने गिरोह के सरगना सहित 15 लोगों को गिरफ्तार किया है. 

इस पूरे नेटवर्क पर झालावाड़ पुलिस अधीक्षक अमित कुमार जानकारी देते हैं, ‘‘रोडवेज उड़न दस्तों सूचना कंडक्टरों को देना और बदले में उनसे रकम वसूलना गिरोह का मुख्य काम था. इसमें रोडवेज के कंडक्टरों, ड्राइवरों सहित अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत रही है.’’
 
इस गिरोह ने रोडवेज के राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया है. पुलिस के 'ऑपरेशन क्लीन राइड' के अगले ही दिन रोडवेज की आमदनी में दोगुने से ज्यादा इजाफा हुआ है. इससे यह साफ है कि रोडवेज में किस कदर भ्रष्टाचार था. 1 जनवरी से 30 जनवरी 2026 तक रोडवेज के झालावाड़ डिपो में हर दिन औसतन 4 लाख रुपए की आमदनी हो रही थी जो ऑपरेशन क्लीन राइड के अगले ही दिन 31 जनवरी को बढ़कर 9 लाख रुपए तक पहुंच गई.  

इस गिरोह ने रोडवेज में कंडक्टर ही नहीं ठेके पर बस संचालित करने वाले ‘बस सारथियों (प्राइवेट बसों में नियुक्त होने वाले कंडक्टर)’ के साथ मिलकर भी भारी फर्जीवाड़ा किया है. राजस्थान रोडवेज प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को निशुल्क यात्रा सुविधा प्रदान करती है. बस सारथी जितने अभ्यर्थियों को निशुल्क यात्रा टिकट जारी करते हैं वह राशि उनके टारगेट में जुड़ जाती है. STD गिरोह के साथ मिलकर बस सारथी अपने टारगेट का 50 से 75 फीसदी तक निशुल्क यात्रा करना दिखा रहे थे जबकि हकीकत में उनकी बसों में निशुल्क यात्रा करने यात्रियों की संख्या बहुत कम थी. 

बस में सामान्य यात्रियों से पैसा वसूला जा रहा था और रोडवेज को फ्री यात्रा की सूचना दी जा रही थी. इस काम में उनकी मदद STD कर रहे थे. फ्री यात्रा के लिए अभ्यर्थी को कंडक्टर या बुकिंग काउंटर पर एडमिट कार्ड की फोटो कॉपी तथा खुद की ओरिजनल आईडी दिखानी होती है. टिकट लेते समय अभ्यर्थी को परीक्षा प्रवेश पत्र की फोटोकॉपी कंडक्टर को देनी होती है. फ्री टिकट जारी करने के बाद यह फोटोकॉपी कंडक्टर डिपो में जमा कराता है. STD बस सारथियों को अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड व प्रवेश पत्र की कॉपी उपलब्ध कराते थे.

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