
18 सितंबर को BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पठानकोट के माधोपुर से पार्टी की पहली ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ को रवाना किया. माधोपुर, फतेहगढ़ साहिब, फाजिल्का और तलवंडी साबो से शुरू होने वाली चार यात्राएं 13 दिनों में राज्य की सभी 117 विधानसभा सीटों से होते हुए करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करेंगी.
ये यात्राएं 30 सितंबर को जालंधर में एक रैली के लिए एक साथ पहुंचेंगी. इस रैली को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संबोधित करेंगे. यह उस राज्य में BJP का अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी अभियान है जहां पार्टी के पास विधानसभा की दो सीटें हैं और लोकसभा में एक भी सीट नहीं है.
हालांकि 2024 में उसका वोट शेयर बढ़कर 18.56 फीसदी हो गया था. इसमें ग्रामीण इलाकों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मजहबी सिखों तक पहुंच की भी भूमिका रही.
अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में पार्टी पूर्व सहयोगी शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बिना सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. उसका एक बड़ा वादा सत्ता में आने के दो साल के भीतर पंजाब से ड्रग्स को खत्म करना है.
BJP का कहना है कि ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ कोई राजनीतिक अभियान नहीं है. फाजिल्का में केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने इसे सामाजिक सुधार बताया. लेकिन उसी भाषण में उन्होंने भगवंत मान सरकार पर व्यवस्था को बर्बाद करने का आरोप लगाया और ड्रग्स के कारोबार में पुलिस की मिलीभगत का आरोप भी लगाया.
नवीन के दौरे के बाद से पंजाब में केंद्र के मंत्री, कई राज्यों के मुख्यमंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री, कई राज्य सरकारों के मंत्री और प्रमुख सांसद लगातार पहुंच रहे हैं. यह पंजाब के मतदाताओं तक BJP के संदेश को बड़े पैमाने पर पहुंचाने की कोशिश है.

इस यात्रा को खास बनाता है इसके पीछे का राष्ट्रीय स्तर का अभियान. 22 सितंबर को यात्रा के बीच में शाह ने राज्य की नशा विरोधी एजेंसियों से जुड़े अधिकारियों से कहा कि अगर युवा नशे की गिरफ्त में हैं तो विकसित भारत 2047 का सपना पूरा नहीं हो सकता. उन्होंने ड्रग्स को कश्मीर, पूर्वोत्तर और माओवाद के बाद सबसे कठिन लड़ाई बताया और इससे निपटने के लिए ‘विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029’ पेश किया.
जनवरी में शाह ने 31 मार्च से शुरू होने वाले तीन साल के राष्ट्रीय अभियान का ऐलान किया था. उन्होंने मंत्रालयों और राज्य पुलिस को 2029 तक की कार्ययोजना तैयार करने का आदेश दिया था और कहा था कि ड्रग्स तस्करों के प्रति कोई नरमी नहीं बरती जानी चाहिए.
केंद्र सरकार मादक पदार्थों की जब्ती के आंकड़ों का हवाला देती है. नरेंद्र मोदी सरकार के दौरान 2014-26 में 1.19 करोड़ किलोग्राम से ज्यादा मादक पदार्थ जब्त किए गए, जबकि 2004-14 में यह आंकड़ा करीब 26 लाख किलोग्राम था.
पंजाब इस राष्ट्रीय नैरेटिव की पहली राजनीतिक परीक्षा है और BJP का दो साल में ड्रग्स खत्म करने का वादा केंद्र की 2029 की समयसीमा के भीतर आता है. लेकिन इस दलील के दोनों पहलू हैं. अगर ड्रग्स सुरक्षा से जुड़ी समस्या है तो इसकी जिम्मेदारी केंद्र की भी है. और पंजाब में यह समस्या दोहरी है.
ड्रग्स, हथियार और गैंगस्टर
पहली समस्या पाकिस्तान के साथ लगी 553 किलोमीटर लंबी सीमा से जुड़ी है. पहले तस्कर पैदल ही हेरोइन सीमा पार भेज देते थे और कभी-कभी इसके साथ नकली नोट भी होते थे. 2013 में सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने तौर पर खेमकरण के पास सीमा बाड़ के नजदीक 18 किलो हेरोइन और 1,000 रुपए के नकली नोट बरामद किए थे.
ड्रोन ने इस पूरे कारोबार का तरीका बदल दिया. 2025 में BSF ने पाकिस्तान से आए 272 ड्रोन और 367 किलो से ज्यादा हेरोइन जब्त की. इसके साथ 10 किलो से ज्यादा आरडीएक्स, 12 ग्रेनेड और 200 हथियार भी बरामद किए गए.
इस साल जुलाई में फिरोजपुर के बुला राय गांव के पास ड्रोन से पांच पिस्तौल और 47 कारतूस गिराए गए. तरनतारन में एक दूसरे ड्रोन से मेथामफेटामाइन भेजा गया.

अब ड्रग्स और हथियार एक साथ पहुंचते हैं और उन्हीं नेटवर्क को मजबूत करते हैं. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के मुताबिक, भारत और पाकिस्तान के साथ-साथ कनाडा, मलेशिया, पुर्तगाल और ऑस्ट्रेलिया में मौजूद गैंगस्टर ड्रग्स और हथियारों की तस्करी और हवाला के जरिए हत्याओं, जबरन वसूली और खालिस्तान समर्थक संगठनों को पैसा देते हैं.
जांचकर्ताओं का आरोप है कि तरनतारन का कनाडा में रह रहा गैंगस्टर लखबीर सिंह लांडा पाकिस्तान में मौजूद हरविंदर रिंदा के साथ मिलकर छोटे हथियारों और जबरन वसूली से आगे बढ़ते हुए रॉकेट लॉन्चर और बड़ी मात्रा में हेरोइन की तस्करी करने लगा. हालांकि, ये सिर्फ आरोप हैं और आरोपियों ने इन्हें खारिज किया है.
यही नेटवर्क लोगों को भी दूसरे देशों तक पहुंचाता है. 2023 में पंजाब एंटी-गैंगस्टर टास्क फोर्स ने जालंधर के एक इमिग्रेशन संचालक को गिरफ्तार किया था. उस पर गैंगस्टरों के लिए फर्जी पासपोर्ट बनवाने और आम लोगों को भी ठगने का आरोप था. गोल्डी बराड़, लांडा और अर्श डल्ला जैसे गैंगस्टर विदेश भाग गए और वहीं से अपना काम जारी रखा.
डंकी कारोबार भी इसी तरह के एजेंट नेटवर्क पर चलता है. तरनतारन के एक व्यक्ति ने मध्य अमेरिका के रास्ते अमेरिका पहुंचने के लिए करीब 45 लाख रुपए दिए थे. रास्ते में उसे पीटा गया और लूट लिया गया.
जालंधर में शाह के लिए यही मुद्दा है. पाकिस्तान से जुड़ा नशे का आतंकवाद और प्रवासी गैंगस्टरों का नेटवर्क. यही वह जगह भी है जहां केंद्र का जिम्मेदारी से इनकार करना सबसे मुश्किल है.
दूसरी समस्या घरेलू है. यह सिंथेटिक ड्रग्स और दवाओं के गलत इस्तेमाल से जुड़ी है. जुलाई 2024 तक उस साल करीब 17 किलो क्रिस्टल मेथामफेटामाइन जब्त किया जा चुका था, जबकि 2023 में यह करीब 1 किलो था.
पुलिस का कहना था कि तस्कर स्थानीय स्तर पर इसका उत्पादन कर रहे थे क्योंकि अफगानिस्तान में तालिबान के अफीम प्रतिबंध से हेरोइन की आपूर्ति कम हो गई थी. दुनियाभर में संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक मेथामफेटामाइन की जब्ती रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है और फार्मास्यूटिकल ओपिओइड की जब्ती 2020 के स्तर से करीब 130 फीसदी ज्यादा है.
दवाओं की ये खेप दूसरे राज्यों के रास्ते पंजाब पहुंचती है. अमृतसर पुलिस ने एक मामले में गोइंदवाल साहिब सेंट्रल जेल के अंदर से मंगाई गई गोलियों का स्रोत अहमदाबाद की एक दवा कंपनी को पाया था. वहां छापे में 14.7 लाख से ज्यादा गोलियां बरामद हुई थीं.
फतेहगढ़ साहिब पुलिस ने एक पेडलर की जांच करते हुए दिल्ली और हरियाणा की एक लाइसेंस प्राप्त कंपनी का पता लगाया, जिसके पास करीब छह लाख बिना लेबल वाले इंजेक्शन थे.
सीमा अहम है लेकिन ड्रग्स की लाइसेंसिंग और केमिस्टों का नियमन मुख्य रूप से राज्य के अधिकार क्षेत्र में आता है. BJP की यात्रा की आलोचना करते हुए कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि ध्यान केवल हेरोइन तक सीमित नहीं रह सकता. दो साल में ड्रग्स खत्म करने की योजना भारत के भीतर तैयार होने वाले इस बाजार को आसानी से खत्म नहीं कर सकती.
टूटी समयसीमाएं और वादे
BJP के अभियान को एक मौत से भी बल मिला. 6 सितंबर को संगरूर के 47 वर्षीय दलित मजदूर गुलजार सिंह ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से अपने इलाके में ‘चिट्टा’ के बारे में सवाल किया था.
उसके परिवार का कहना है कि उस पर माफी मांगने का दबाव बनाया गया और जातिसूचक गालियां दी गईं. उसका बड़ा बेटा नशे का आदी था. गुलजार की अगले दिन जहर खाने से मौत हो गई. पुलिस ने पंचायत सदस्यों समेत पांच लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और SC/ST एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया. पंचायत ने उत्पीड़न के आरोप से इनकार किया है.
अपनी यात्रा की शुरुआत करते हुए नवीन ने कहा कि वे ऐसी असहनीय पीड़ा झेल रहे परिवारों के साथ खड़े हैं. इस मौत ने BJP के ‘मावां मांगदियां जवाब’ अभियान को एक चेहरा दिया और वह भी दलित चेहरा, क्योंकि यात्रा का अंत दोआबा में होना है.
पंजाब पहले भी ड्रग्स के नैरेटिव को सुन चुका है हालांकि कई बार इसमें भूमिकाएं बदली हुई थीं. अक्टूबर 2012 में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा था कि पंजाब के 10 में से सात युवा ड्रग्स की समस्या से जूझ रहे हैं.
बाद में जिस अध्ययन को इसका स्रोत बताया गया था उसके लेखक ने कहा कि आंकड़े को गलत तरीके से समझा गया था. तब उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने जवाब दिया था कि पाकिस्तान से ड्रग्स रोकना BSF का काम है. यानी आज मान सरकार जो सीमा वाला तर्क देती है, वह सबसे पहले पुराने दौर में BJP के सहयोगी ने ही दिया था.
तलवंडी साबो में ही BJP की चौथी यात्रा शुरू हुई. दिसंबर 2015 में यहीं तत्कालीन कांग्रेस नेता कैप्टन अमरिंदर सिंह ने सत्ता में आने के चार हफ्ते के भीतर ड्रग्स नेटवर्क तोड़ने का वादा किया था. 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी (आप) ने भी इसी वादे पर अभियान चलाया था.
BJP की पूर्व प्रदेश इकाई के प्रमुख श्वेत मलिक का कहना है कि मुख्यमंत्री मान इसके बाद पांच समयसीमाएं चूक चुके हैं. दरअसल, पंजाब में 2007 के बाद से हर सरकार ने कुछ हद तक ड्रग्स के मुद्दे पर चुनाव जीता है और इसी मुद्दे पर उसे जनता के आकलन का सामना भी करना पड़ा है.
कोई सीमा नहीं
ड्रग्स का नुकसान जाति, वर्ग और क्षेत्र की सीमाओं से परे है. इसकी चपेट में संभ्रांत और राजनीतिक वर्ग, सीमा से लगे गांव, प्रवासी परिवार, कपड़ा मजदूर और यहां तक कि दलित मजदूर भी हैं. हेरोइन सीमा से लगे इलाकों में ज्यादा केंद्रित है जबकि गोलियां केमिस्टों के जरिए दूर-दूर तक पहुंचती हैं.
राज्य के आंकड़े समस्या के पैमाने की पुष्टि करते हैं. मार्च 2025 से अब तक पुलिस के मुताबिक 60,582 एफआईआर दर्ज की गई हैं, 79,784 गिरफ्तारियां हुई हैं, 3,803 किलो हेरोइन जब्त की गई है और 366 करोड़ रुपए की संपत्ति फ्रीज की गई है.
लेकिन सवालों के जवाब नहीं मिले हैं. मसलन गिरफ्तार किए गए लोगों में कितने ड्रग्स इस्तेमाल करने वाले और कुरियर थे और कितने मामलों में आरोप साबित हुए?
डेरों ने इस क्षेत्र में सबसे पहले अपनी जगह बनाई. नशामुक्ति, रक्तदान और सामूहिक विवाह मालवा के गरीबों के बीच डेरा सच्चा सौदा की पहचान बन गए, जहां उसका प्रभाव सबसे तेजी से बढ़ा. अब वह नशा छोड़ने वालों को मुफ्त रहने की जगह, खाना और दवाएं उपलब्ध कराता है.
राज्य की व्यवस्था इस मामले में पीछे रही थी. 2014 के एक आकलन में पाया गया था कि पंजाब में राज्य सरकार की तरफ से फंड पाने वाले पुनर्वास केंद्र नहीं थे. लेकिन उसके बाद बदलाव हुए हैं. इस जून में मान ने ड्रग्स विरोधी ‘सूरमा’ अभियान शुरू किया. इसमें नशे से उबर चुके लोगों को दूसरे लोगों को इलाज की ओर ले जाने की जिम्मेदारी दी गई.
मान का जवाब
आप ने BJP पर पलटवार किया है. मान ने केंद्र से कहा कि पहले BJP शासित गुजरात में मादक पदार्थों की समस्या पर रोक लगाई जाए. उन्होंने कहा कि सीमा सुरक्षा केंद्र की जिम्मेदारी होने के बावजूद पंजाब ने खुद एंटी-ड्रोन सिस्टम खरीदे हैं.
इस बीच कांग्रेस और SAD चीमा को हटाने की मांग कर रहे हैं. यह दो पार्टियों के बीच की लड़ाई नहीं, बल्कि चार पक्षों के बीच की लड़ाई है.
हकीकत यह है कि न तो केंद्र और न ही राज्य सरकार पूरी समस्या की जिम्मेदारी अकेले ले सकती है. BJP की यात्रा ने भले ही 2027 के चुनाव में ड्रग्स को एक प्रमुख मुद्दा बना दिया हो लेकिन पार्टी को मतदाताओं को यह समझाना होगा कि उसका दो साल में ड्रग्स खत्म करने का वादा कैसे पूरा होगा?
यह सवाल इसलिए अहम है कि पहले अलग-अलग पक्षों की ओर से किए गए सभी वादे पूरे नहीं हुए. BJP के लिए 4,000 किलोमीटर की यात्रा आसान हिस्सा है. असली मुश्किल इस वादे को पूरा करने और विश्वसनीयता हासिल करने की है.

