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गुजरात, महाराष्ट्र के बाद मध्य प्रदेश में भी एनालॉग पनीर पर बैन, क्या है वजह?

मोहन यादव सरकार ने सेहत से जुड़ी चिंताओं के बीच एनालॉग पनीर की बिक्री और इस्तेमाल पर रोक लगा दी है. पड़ोसी राज्यों में बैन के बाद इसके बड़े पैमाने पर मध्य प्रदेश पहुंचने का डर भी फैसले की एक बड़ी वजह है

FSSAI cracks down on misleading paneer, chocolate spread claims; notices sent to three firms
सांकेतिक तस्वीर
अपडेटेड 14 अगस्त , 2026

मध्य प्रदेश उन राज्यों की बढ़ती सूची में शामिल हो गया है जिन्होंने सामान्य पनीर के सिंथेटिक रूप, एनालॉग पनीर पर बैन लगा दिया है. 12 अगस्त को जारी आदेश के बाद यह फैसला लिया गया. 

खबरें थीं कि गुजरात, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में एनालॉग पनीर पर इसी महीने की शुरुआत में बैन लगने के बाद बड़ी मात्रा में यह प्रोडक्ट पड़ोसी राज्यों से मध्य प्रदेश में भेजा जा सकता है.

हालांकि आधिकारिक तौर पर मध्य प्रदेश सरकार ने कहा कि यह फैसला सेहत से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए लिया गया है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने ऐलान किया कि एनालॉग पनीर की बिक्री और इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगा दी गई है.

यह बैन देश के कुछ हिस्सों में मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों के खिलाफ चल रही कार्रवाई के बीच आया है. 

आखिर एनालॉग पनीर क्या है? 

यह फैक्ट्री में तैयार किया जाने वाला पनीर जैसा प्रोडक्ट है, जिसमें दूध की वसा की जगह वनस्पति फैट का इस्तेमाल किया जाता है. एनालॉग पनीर दिखने और स्वाद में असली पनीर जैसा होता है लेकिन इसमें प्रोटीन की मात्रा काफी कम होती है.

सेहत के खतरे को यह बात और बढ़ा देती है कि बड़े स्तर पर खाना बनाने वाले और रेस्टोरेंट कारोबार से जुड़े लोग इसे ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि यह असली पनीर से सस्ता होता है. मध्य प्रदेश में सामान्य पनीर की कीमत करीब 400 रुपए किलो है, जबकि एनालॉग पनीर आधी कीमत पर बिकता है.

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) एनालॉग पनीर को पनीर के नाम से बेचने की इजाजत नहीं देता क्योंकि ऐसा करना इसे डेयरी प्रोडक्ट बताने के गलत दावे के बराबर है.

पनीर शाकाहारियों के लिए प्रोटीन के सबसे आम स्रोतों में से एक है और इसलिए इसकी मांग काफी ज्यादा है. एनालॉग पनीर बनाने में इस्तेमाल होने वाला वनस्पति तेल न सिर्फ सेहत के लिए नुकसानदायक है बल्कि इसमें मिलावट की आशंका भी रहती है. 

वैसे वनस्पति तेल में मिलावट एक ऐसी समस्या है जिससे खाद्य नियामक कई सालों से जूझ रहे हैं.

मध्य प्रदेश के खाद्य विभाग और इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, राज्य में हर महीने पनीर की कुल खपत करीब 10,000 क्विंटल होने का अनुमान है. अकेले भोपाल में रोज करीब 40 क्विंटल पनीर की खपत होती है लेकिन डर है कि इसमें से आधी सप्लाई एनालॉग पनीर की हो सकती है.

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