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ऑनलाइन प्रवचन से शोषण तक, IIT बाबा के ब्लैकमेलिंग नेटवर्क की कहानी

IIT रुड़की से पढ़ा युवक कथित तौर पर आध्यात्मिक गुरु बना, उसने ऑनलाइन प्रवचनों के जरिए शिक्षित युवतियों को प्रभाव में लेकर शोषण, ब्लैकमेलिंग और आर्थिक उगाही का नेटवर्क खड़ा किया

Mathura IIT Baba
IIT बाबा अभिषेक मिश्रा
अपडेटेड 3 जून , 2026

मथुरा में राधाकुंड की शांत गलियों और कृष्णभक्ति के लिए प्रसिद्ध मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र से सामने आया अभिषेक मिश्रा का मामला सिर्फ एक दुष्कर्म या ब्लैकमेलिंग का केस नहीं है. यह उस सुनियोजित मनोवैज्ञानिक जाल की कहानी है, जिसमें एक IIT से पढ़ा युवक आध्यात्मिक गुरु का चोला पहनकर उच्च शिक्षित युवतियों को अपने प्रभाव में लेता रहा. 

ऑनलाइन प्रवचन, आध्यात्मिक ज्ञान, कृष्णभक्ति, गंधर्व विवाह और मोक्ष के नाम पर उसने ऐसा नेटवर्क खड़ा किया, जिसने कई परिवारों को तोड़ दिया और दर्जनों युवतियों की जिंदगी को संकट में डाल दिया. मथुरा पुलिस द्वारा 2 जून को गिरफ्तार किया गया अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास मूल रूप से ओडिशा का रहने वाला है. 

पुलिस जांच के मुताबिक, उसने आइआइटी रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और कुछ समय तक निजी क्षेत्र में आकर्षक वेतन वाली नौकरी भी की. नौकरी छोड़ने के बाद उसने एक बिल्कुल अलग रास्ता चुना. यही रास्ता आगे चलकर कथित आध्यात्मिक साम्राज्य और यौन शोषण के गंभीर आरोपों तक पहुंच गया.

इंजीनियर से कथावाचक बनने तक का सफर

पुलिस के मुताबिक, अभिषेक मिश्रा पढ़ाई में मेधावी था. उसने वर्ष 2017 से 2021 के बीच IIT रुड़की से बीटेक किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद वह मुंबई समेत अन्य शहरों में निजी क्षेत्र की नौकरी से जुड़ा. बताया जाता है कि उसका वार्षिक पैकेज 20 लाख रुपये के आसपास था. इसी दौरान उसकी रुचि आध्यात्मिक विषयों की ओर बढ़ी. 

वर्ष 2022-23 के आसपास वह मथुरा के राधाकुंड क्षेत्र में आकर रहने लगा. शुरू में किराए के मकान में रहा, फिर धीरे-धीरे उसने अपना ठिकाना और आश्रमनुमा परिसर तैयार कर लिया. यहीं से उसने खुद को "आदिकर्ता नारायण दास" के रूप में स्थापित करना शुरू किया. उसने सोशल मीडिया, यूट्यूब, गूगल मीट और ऑनलाइन प्रवचन मंचों का उपयोग करते हुए एक अलग पहचान बनाई.

हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में धार्मिक और आध्यात्मिक प्रवचन देने के कारण वह शिक्षित युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय होने लगा. पारंपरिक बाबाओं की तरह अभिषेक का नेटवर्क मंदिरों और आश्रमों तक सीमित नहीं था. उसका सबसे बड़ा हथियार इंटरनेट था. पुलिस जांच में सामने आया है कि वह "राधा कृपा अमृत" नाम से यूट्यूब चैनल चलाता था. यहां वह गीता, कृष्णभक्ति, जीवन प्रबंधन, वैराग्य और आध्यात्मिक उन्नति जैसे विषयों पर प्रवचन देता था. 

उसके वीडियो देखने वालों में बड़ी संख्या में इंजीनियर, आईटी प्रोफेशनल, कॉरपोरेट क्षेत्र में काम करने वाली युवतियां और उच्च शिक्षा प्राप्त युवा शामिल थे. अभिषेक से जुड़े एक ‘भक्त’ बताते हैं “पढ़े-लिखे लोगों को प्रभावित करने के लिए वह धार्मिक भाषा के साथ वैज्ञानिक और तार्किक शब्दावली का भी इस्तेमाल करता था. एक इंजीनियर होने के कारण वह आधुनिक शिक्षा प्राप्त युवाओं की मनोवृत्ति को समझता था और उसी के अनुरूप संवाद स्थापित करता था.”

कौन थीं उसके निशाने पर?

पुलिस को मिली जानकारी के मुताबिक, अभिषेक मिश्रा का लक्ष्य सामान्यतः वे युवतियां थीं जो उच्च शिक्षा प्राप्त थीं, विशेषकर इंजीनियरिंग और तकनीकी क्षेत्र से जुड़ी हुईं. इनमें कई युवतियां मल्टीनेशनल कंपनियों में कार्यरत थीं और आकर्षक पैकेज पर नौकरी कर रही थीं. 

कुछ के बारे में दावा किया गया है कि उन्होंने लाखों रुपये सालाना वेतन वाली नौकरियां छोड़कर उसके आश्रम का रुख किया. पुलिस को अब तक लगभग 24 ऐसी युवतियों के बारे में जानकारी मिली है जो किसी न किसी समय उसके संपर्क में थीं. इनमें विभिन्न राज्यों की युवतियां शामिल बताई जा रही हैं. जांच में जो तस्वीर सामने आई है, वह किसी सामान्य धार्मिक गतिविधि से कहीं आगे की प्रतीत होती है. 

सबसे पहले अभिषेक सोशल मीडिया या ऑनलाइन प्रवचन के जरिए संपर्क बनाता था. फिर नियमित बातचीत शुरू होती थी. धीरे-धीरे वह खुद को आध्यात्मिक मार्गदर्शक और जीवन का समाधान बताने वाले व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत करता था. इसके बाद कथित तौर पर वह युवतियों को यह समझाने का प्रयास करता था कि सांसारिक जीवन, परिवार और सामाजिक बंधन आध्यात्मिक उन्नति में बाधा हैं. 

कई मामलों में उसने युवतियों को परिवार से दूरी बनाने और राधाकुंड आने के लिए प्रेरित किया. परिजनों के अनुसार कुछ युवतियां इतनी प्रभावित हो गई थीं कि वे अपने माता-पिता तक से बात करने को तैयार नहीं होती थीं. जब परिवार उन्हें वापस ले जाने पहुंचता था, तो कई बार विरोध और हंगामे की स्थिति बन जाती थी.

खुद को बताता था कृष्ण का अवतार

पुलिस पूछताछ और परिजनों के बयानों के अनुसार अभिषेक मिश्रा स्वयं को साधारण कथावाचक नहीं बल्कि विशेष आध्यात्मिक शक्ति वाला व्यक्ति बताता था. कुछ परिजनों ने आरोप लगाया है कि वह स्वयं को कृष्ण का अवतार बताता था और यह दावा करता था कि उसे कई गोपियों के साथ रहने का अधिकार है. 

इसी कथित धार्मिक तर्क के जरिए वह युवतियों को शारीरिक संबंधों के लिए मानसिक रूप से तैयार करने का प्रयास करता था. जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि उसने अपने अनुयायियों के बीच किस प्रकार की धार्मिक और वैचारिक अवधारणाएं स्थापित की थीं. आरोपी के खिलाफ सामने आए सबसे चौंकाने वाले आरोपों में गंधर्व विवाह का इस्तेमाल शामिल है. 

पुलिस के अनुसार जब कोई युवती उसके प्रभाव में पूरी तरह आ जाती थी, तब वह उसके सामने गंधर्व विवाह का प्रस्ताव रखता था. पारंपरिक हिंदू ग्रंथों में वर्णित इस विवाह पद्धति की अवधारणा को वह अपने तरीके से प्रस्तुत करता था. कथित रूप से वह युवतियों को यह विश्वास दिलाता था कि उनके बीच आध्यात्मिक और वैवाहिक संबंध स्थापित हो चुके हैं. इसके बाद वह शारीरिक संबंध बनाता था और इसे धार्मिक या आध्यात्मिक मान्यता देने का प्रयास करता था.

नशा, शोषण और ब्लैकमेल

जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार आश्रम में आने वाली कुछ युवतियों को प्रसाद के नाम पर नशीला पदार्थ दिया जाता था. शिकायतकर्ता युवती ने आरोप लगाया है कि उसे दूध में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया गया था, जिसके बाद वह अचेत हो गई. पुलिस का कहना है कि इसी अवस्था में कथित यौन उत्पीड़न किया गया और आपत्तिजनक तस्वीरें तथा वीडियो रिकॉर्ड किए गए. 

इसके बाद यही सामग्री ब्लैकमेलिंग का हथियार बन जाती थी. आरोप है कि यदि कोई युवती उससे दूरी बनाने का प्रयास करती या विरोध करती तो वीडियो और तस्वीरें सार्वजनिक करने की धमकी दी जाती थी. एक मामले में पांच लाख रुपये की रंगदारी मांगने का आरोप भी सामने आया है. पुलिस जांच अब केवल यौन शोषण तक सीमित नहीं है. 

जांच एजेंसियां आरोपी के आर्थिक नेटवर्क की भी पड़ताल कर रही हैं. अधिकारियों के अनुसार कई लोगों से आर्थिक सहायता और धनराशि प्राप्त करने के संकेत मिले हैं. यह भी जांच का विषय है कि राधाकुंड में मकान निर्माण और आश्रम संचालन के लिए धन कहां से आया. पुलिस बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन, संपत्ति के दस्तावेजों और आर्थिक स्रोतों की जांच कर रही है. आशंका है कि ब्लैकमेलिंग और अनुयायियों से प्राप्त धन का उपयोग संपत्ति निर्माण में किया गया हो सकता है.

परिवार भी था परेशान

जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि अभिषेक की मां उसके व्यवहार से असहज थीं. उड़ीसा के भुवनेश्वर थाना खण्डगिरी क्षेत्र के आईगिनिया अपार्टमेंट निवासी अभिषेक उर्फ आदिकर्ता नारायण दास की की मां सरकारी स्कूल की प्रधानाध्यापिका थीं. सेवानिवृत्त होने के बाद वह 2022 में भक्ति करने के लिए राधाकुंड आ गईं. यहां पर वह किराए के मकान में रहने लगीं थीं. 

अभिषेक ने 2017 से 2021 में रुड़की से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की. पढ़ाई पूरी होने के बाद वह 2023 में मुंबई के किसी संस्थान में नौकरी करने लगा. वहां पर छत्तीसगढ़ की एक युवती से इसकी मुलाकात हुई. करीब एक साल बाद वह नौकरी छोड़कर अपनी मां के पास राधाकुंड आ गया. कुछ दिन में उसके पास युवती भी आ गई. 

अभिषेक की मां ने इसका विरोध किया तो विवाद हो गया. परेशान होकर उसकी मां फिर उड़ीसा चली गईं, लेकिन अभिषेक ने अपना जाल बिछाना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे सोशल मीडिया और गूगल जूम मीट पर युवक व युवतियों को जोड़कर ज्ञान का पाठ पढ़ाने लगा और अपने पास बुलाने लगा. फिर धीरे-धीरे इसका रैकेट फैलता चला गया. पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि परिवार को उसकी गतिविधियों की कितनी जानकारी थी.

इस मामले की जांच में सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि अधिकांश युवक-युवतियां बालिग थीं और स्वयं अपनी इच्छा से आश्रम में रहने की बात कहती थीं. पिछले कुछ महीनों में कई परिवार अपने बच्चों को वापस ले जाने राधाकुंड पहुंचे थे. मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र में किराए पर रहने वाली युवती ने अभिषेक मिश्रा उर्फ आदिकर्ता नारायण दास की शिकायत 15 मई को SSP श्लोक कुमार से की थी. उसका आरोप था कि छोटी बहन के साथ अभिषेक अश्लील हरकतें कर ब्लैकमेल करता था. जांच के बाद 2 जून की शाम पुलिस ने राधाकुंड स्थित आश्रम पर छापा मारा. यहां से अभिषेक मिश्रा को गिरफ्तार कर लिया. 

आश्रम से छत्तीसगढ़ की दो युवतियां व एक युवक मिले. तीनों नशे के आदी होने की वजह से पुलिस ने इन्हें नशा मुक्त‍ि केंद्र भिजवा दिया. पुलिस ने अभिषेक मिश्रा का मोबाइल फोन, डिजिटल डाटा और सोशल मीडिया अकाउंट्स कब्जे में ले लिए हैं. बरामद वीडियो, तस्वीरों और चैट रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है. जांच एजेंसियां अन्य संभावित पीड़िताओं की पहचान करने और उनसे संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं. विभिन्न राज्यों की युवतियों के नाम सामने आने के कारण यह मामला बहुराज्यीय जांच का रूप भी ले सकता है.

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