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महाराष्ट्र में शिवाजी की मूर्तियां लगाने पर क्यों मच रहा बवाल?

ग्रामीण महाराष्ट्र में कई जगह छत्रपति शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज की मूर्तियां स्थापित करने की घटनाएं राज्य में ध्रुवीकरण बढ़ा रही हैं

सोलापुर और मराठावाड़ा में तीन दर्जन मूर्तियां स्थापित करने के मामले सामने आए हैं (फाइल फोटो)
अपडेटेड 16 अप्रैल , 2026

महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में छत्रपति शिवाजी महाराज और संभाजी महाराज की मूर्तियां रातों-रात स्थापित करने की अचानक बाढ़ आ गई है. इसके बाद अधिकारियों ने इस चलन पर नकेल कसी है. डर है कि इससे राज्य में सामाजिक ध्रुवीकरण बढ़ सकता है.

पिछले कुछ महीनों में सोलापुर और मराठावाड़ा के हिस्सों में अंधेरे का फायदा उठाकर करीब तीन दर्जन ऐसी मूर्तियां चुपके से लगाई गई हैं. इसकी वजह से तनाव और झड़पें हुई हैं. 2 अप्रैल को सोलापुर के अंजनगांव में दबंग मराठा समुदाय और OBC धनगरों के बीच झड़प हुई. यहां धनगरों जिस स्थान पर पूजा करते हैं, वहां रातों-रात मूर्ति खड़ी कर दी गई थी.

फरवरी में बुलढाणा जिले के लोनार तालुका में दो समूहों के बीच झड़प हुई थी. वहां ग्राम पंचायत की जमीन पर शिवाजी महाराज की मूर्ति अवैध रूप से लगाई गई थी. चोरी-छिपे मूर्तियां लगाने की ऐसी घटनाएं सोलापुर, बीड, जालना और धाराशिव जिलों से सामने आई हैं.

अंजनगांव में तनाव के बाद, सोलापुर पुलिस ने पिछले हफ्ते बालराजे अवारे-पाटिल (45) को गिरफ्तार किया. उन पर दंगा करने, हत्या के प्रयास और बिना अनुमति मूर्ति लगाने के आरोप हैं. जालना के रहने वाले पाटिल 'धर्मवीर छत्रपति संभाजीराजे शौर्य प्रतिष्ठान' के प्रमुख हैं. उन्हें मराठा कार्यकर्ता मनोज जरांगे-पाटिल के समर्थक हैं.

मराठा समुदाय के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि बालराजे मराठावाड़ा जैसे संवेदनशील क्षेत्र में ऐसी हरकतों से खुद को नेता के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहे होंगे. उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, "बड़ा सवाल यह है कि क्या बालराजे को राजनीतिक तत्वों का प्रोत्साहन मिल रहा है? जब यह सब हो रहा था, तब क्या पुलिस सो रही थी?"

जरांगे-पाटिल सितंबर 2023 में तब चर्चा में आए जब जालना के अंतरवाली-सराटी गांव में मराठा आरक्षण के लिए विरोध कर रहे लोगों पर लाठीचार्ज हुआ था. जरांगे-पाटिल मांग उठा रहे थे कि मराठाओं को OBC 'कुनबी' (खेतिहर बटाईदार) श्रेणी में शामिल कर आरक्षण दिया जाए. OBC समुदाय इस मांग का विरोध कर रहा है.

राज्य सरकार ने नौकरियों और शिक्षा में मराठाओं के लिए 10 फीसदी आरक्षण मंजूर किया है. फिर भी जरांगे-पाटिल अपनी मांग पर अड़े रहे. उनके विरोध के कारण सरकार ने कुछ मांगें मान लीं. इनमें हैदराबाद गजट के ऐतिहासिक संदर्भों का उपयोग कर पात्र मराठाओं को कुनबी प्रमाण पत्र देना शामिल है.

जरांगे-पाटिल के तीखे अंदाज ने उन्हें युवाओं के एक वर्ग के बीच लोकप्रिय बना दिया है. वे उन्हें सरकार विरोधी चेहरे के रूप में देखते हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर लगातार हमले किए हैं. फडणवीस खुद ब्राह्मण हैं.

अनुमान है कि मराठा-कुनबी समुदाय महाराष्ट्र की जनसंख्या का लगभग एक-तिहाई है. लेकिन बिना कुनबी वाले मराठा केवल 12-16 फीसदी हैं. कोंकण और विदर्भ के कुछ हिस्सों में कुनबी खासे असरदार हैं.

जरांगे-पाटिल के समर्थक उन्हें "संघर्ष योद्धा" कहते हैं, जबकि अवारे-पाटिल के लोग उन्हें "स्मारक योद्धा" बताते हैं. कहा जाता है कि अवारे-पाटिल इन मूर्तियों के लिए क्राउड-फंडिंग के जरिए पैसा जुटाते हैं.

OBC नेता लक्ष्मण हाके ने कहा कि ये घटनाएं जातिगत तनाव भड़काने के लिए की जा रही हैं. उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज की मूर्ति लगाने का कोई विरोध नहीं करेगा. लेकिन यह काम जानबूझकर उन गांवों और चौकों पर किया जा रहा है जहां OBC आबादी ज्यादा है या जो डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर के नाम पर हैं.

अंजनगांव में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले हाके ने कहा कि ऐसी जगहों पर मूर्तियां डर पैदा करने और प्रभुत्व दिखाने के लिए लगाई जा रही हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसमें डोनेशन का एक वित्तीय एंगल भी जुड़ा है.

पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इसके पीछे राजनीति और पैसा, दोनों हो सकते हैं. एक वरिष्ठ IPS अधिकारी ने कहा कि यह माहौल बिगाड़ने की सोची-समझी कोशिश है. उन्होंने बताया कि मूर्तियां लगाने के नियम काफी कमजोर हैं, इसलिए इन्हें रोकने के लिए कोई स्पष्ट अधिकार क्षेत्र नहीं है. 2017 में सरकार ने एक आदेश (GR) जारी किया था, लेकिन यह केवल कार्यकारी आदेश है, कोई कानून नहीं.

ये मूर्तियां अक्सर सरकारी या PWD की जमीनों पर लगाई जाती हैं. बीड के पुलिस अधीक्षक नवनीत कंवत ने बताया कि अनाधिकृत मूर्तियां लगाने के मामले में FIR दर्ज की गई हैं. नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी. अवारे-पाटिल पर बीड में करीब 17 ऐसे मामलों में शामिल होने का संदेह है.

मराठा और OBC के बीच यह सामाजिक तनाव पूरे संतुलन को बिगाड़ सकता है. 2024 के लोकसभा चुनावों में जरांगे-पाटिल का असर दिखा था. मराठा गुस्से और दलित-मुस्लिम वोटों के कारण BJP और महायुति को मराठावाड़ा में भारी नुकसान हुआ था.

हालांकि, बाद के विधानसभा चुनावों में 'जरांगे फैक्टर' कमजोर पड़ गया. मराठा वोट बंट गए, जबकि OBC और अन्य गैर-मराठा समुदाय एकजुट होकर महायुति के साथ चले गए. इससे मराठा समुदाय के भीतर अपना राजनीतिक दबदबा खोने को लेकर असुरक्षा भाव पैदा हुआ है.
 

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