
लखनऊ की पहचान उत्तर प्रदेश की राजधानी, सत्ता के केंद्र और तहजीब के शहर के रूप में रही है, लेकिन अक्टूबर में सामने आए दो मामलों ने शहर के भीतर पनप रहे ड्रग्स के अवैध कारोबार की एक गंभीर तस्वीर पेश की है.
महज आठ दिनों के अंतराल पर रिहायशी इलाकों में हेरोइन बनाने वाली दो संदिग्ध यूनिट्स का खुलासा हुआ. 12 अक्टूबर की रात दुबग्गा के महिपतमऊ में हुई कार्रवाई में पुलिस ने 6.4 किलोग्राम संदिग्ध कच्ची मॉर्फीन बरामद की.
इससे पहले 4 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस की रोहिणी स्पेशल स्टाफ टीम ने जानकीपुरम की सीता विहार कॉलोनी स्थित एक मकान में छापा मारकर 6.275 किलोग्राम तैयार हेरोइन बरामद की थी. दोनों कार्रवाइयों में बरामद ड्रग्स की मात्रा और रिहायशी मकानों में कथित उत्पादन की समानता ने जांच एजेंसियों का ध्यान खींचा है.
महिपतमऊ में सामने आया मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां कथित तौर पर हेरोइन बनाने का काम किसी सुनसान औद्योगिक परिसर या शहर से दूर स्थित ठिकाने पर नहीं बल्कि रिहायशी इलाके में बने तीन मंजिला मकान के दूसरे तल पर किया जा रहा था. पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने करीब दो महीने पहले ही यह मकान खरीदा था.

बाहर से सामान्य दिखने वाले इस मकान में ड्रग्स बनाने की गतिविधियां संचालित होने की आशंका है. एंटी नार्कोटिक्स टास्कफोर्स यूनिट (ANTF) और दुबग्गा पुलिस की संयुक्त टीम ने 12 अक्टूबर की रात करीब 11 बजे छापा मारा. टीम को मकान में प्रवेश करने के लिए सीढ़ी का सहारा लेना पड़ा.
पुलिस के अनुसार कार्रवाई के दौरान कुछ आरोपियों ने विरोध किया जबकि दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया और अन्य मौके से फरार हो गए. गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मोहम्मद जुबैर और मोहम्मद अमजद के रूप में बताई गई है.
स्थानीय पुलिस के मुताबिक, जुबैर बाराबंकी के कुर्सी क्षेत्र का रहने वाला है और बीफार्मा का कोर्स कर चुका है. पुलिस का दावा है कि दोनों आरोपी मॉर्फीन तैयार करने के साथ उससे हेरोइन बनाने की प्रक्रिया में भी शामिल थे. हालांकि इस पूरे नेटवर्क में उनकी भूमिका और उत्पादन की वास्तविक मात्रा का निर्धारण जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा.
छापेमारी में 6.4 किलोग्राम संदिग्ध कच्ची मॉर्फीन के अलावा अवैध .32 बोर की पिस्तौल, कारतूस, नकदी, छह मोबाइल फोन, एक मोटरसाइकिल, स्कूटी, कॉम्पैक्ट एसयूवी और कुछ केमिकल सहित अन्य सामग्री बरामद की गई.
इससे पहले 4 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने जानकीपुरम की सीता विहार कॉलोनी स्थित मकान में छापा मारा था. वहां से 6.275 किलोग्राम तैयार हेरोइन बरामद हुई. दिल्ली पुलिस ने इस मामले में बबलू को गिरफ्तार किया था और उसके कथित संपर्कों की जांच शुरू की थी. पुलिस को मौके से सोडियम, एसिटिक एनहाइड्राइड, मिक्सर ग्राइंडर, गैस सिलिंडर, वजन मशीन और अन्य सामग्री भी मिली थी.
दिल्ली में पहले हुई गिरफ्तारियों से मिले इनपुट के आधार पर लखनऊ तक पहुंची जांच ने यह सवाल और गंभीर कर दिया कि शहर में ऐसी कितनी अन्य यूनिट्स सक्रिय हो सकती हैं. दोनों मामलों में रिहायशी मकानों का कथित इस्तेमाल एक समान पहलू है.
सप्लाई चेन की कड़ियां खंगाल रही पुलिस
महिपतमऊ मामले में जांच का सबसे अहम पहलू कच्चे माल और केमिकल की आपूर्ति है. एडीजी कानून-व्यवस्था अमिताभ यश के मुताबिक आरोपियों से पूछताछ में सामने आया कि वे अलग-अलग स्रोतों से कच्ची मॉर्फीन और अमोनियम क्लोराइड जुटाते थे. हेरोइन बनाने में इस्तेमाल होने वाला एसिटिक एनहाइड्राइड भी उन्हें उपलब्ध कराया जाता था.
जांचकर्ताओं ने इन केमिकल के सप्लायर के रूप में मुरादाबाद निवासी योगेश उर्फ पिंकू की पहचान की है. पुलिस के अनुसार, पिंकू को एएनटीएफ की बरेली यूनिट ने जुलाई 2026 में 498 किलोग्राम एसिटिक एनहाइड्राइड के साथ गिरफ्तार किया था. उसे नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो भी वर्ष 2025 में गिरफ्तार कर चुका है.
फिलहाल पिंकू के जेल में होने की जानकारी देते हुए जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि उसके कथित सप्लाई नेटवर्क से लखनऊ में किन लोगों को केमिकल उपलब्ध कराया गया और इसका इस्तेमाल किन-किन स्थानों पर हो रहा था.

इस मामले में कच्ची मॉर्फीन और तैयार हेरोइन के बीच का अंतर भी महत्वपूर्ण है. मॉर्फीन से हेरोइन तैयार करने के लिए रासायनिक प्रक्रिया अपनाई जाती है. ऐसे में कच्चे माल की खरीद, रसायनों की उपलब्धता, उत्पादन के लिए ठिकाने और तैयार पदार्थ की बिक्री, ये सभी अलग-अलग चरण हैं. पुलिस की जांच का उद्देश्य इन्हीं चरणों को जोड़कर पूरे नेटवर्क की संरचना समझना है.
दिल्ली पुलिस के मुताबिक पिंकू पहले से उसकी निगरानी में रहे केमिकल सप्लाई नेटवर्क से जुड़ा था. इससे जांचकर्ताओं को यह संभावना खंगालने का आधार मिला है कि गिरफ्तार आरोपियों को आवश्यक सामग्री किसी बड़े नेटवर्क के जरिए मिल रही थी. हालांकि पिंकू के नेटवर्क और जानकीपुरम में पकड़ी गई कथित यूनिट के बीच संबंध अभी साबित नहीं हुआ है.
महिपतमऊ में पकड़े गए कथित नेटवर्क की मॉडस ऑपरेंडी का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू मोबाइल फोन और संपर्कों का इस्तेमाल है. पुलिस के मुताबिक जुबैर छह मोबाइल फोन के जरिए नेटवर्क का चलाता था. जांच में इन फोन में मॉर्फीन और हेरोइन खरीदने वाले संभावित डीलरों तथा सप्लायरों के नंबर मिलने की बात सामने आई है.
पुलिस सूत्रों का दावा है कि प्रत्येक मोबाइल में करीब 400 नंबर दर्ज थे. इस्तेमाल किए गए सिमकार्ड भी कथित तौर पर दूसरे लोगों के नाम पर रजिस्टर्ड थे. यदि जांच में इन जानकारियों की पुष्टि होती है तो ये संपर्क इस नेटवर्क की वास्तविक पहुंच समझने में महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं. पुलिस अब मोबाइल फोन से मिले नंबरों, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी किन लोगों से नियमित संपर्क में थे.
हालांकि, किसी फोन में नंबर दर्ज होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि संबंधित व्यक्ति ड्रग्स की खरीद-बिक्री में शामिल था. प्रत्येक संपर्क की भूमिका की अलग से जांच जरूरी होगी. पुलिस के मुताबिक गिरोह के सदस्य कथित तौर पर लखनऊ में बाइक और दूसरे जिलों या राज्यों में कार के जरिए ड्रग्स पहुंचाते थे.
शुरुआती पूछताछ में लखनऊ, बाराबंकी और बरेली तक आपूर्ति की जानकारी सामने आई है. अन्य रिपोर्टों में झारखंड, हरदोई और आसपास के जिलों तक नेटवर्क के विस्तार का दावा भी किया गया है. इन दावों की पुष्टि के लिए पुलिस को बरामद मोबाइलों, वाहनों, वित्तीय लेन-देन और आरोपियों के बयान से मिलने वाले साक्ष्यों को जोड़ना होगा.
इस तरह के मामलों में जांच की चुनौती केवल तैयार ड्रग्स बरामद करने तक सीमित नहीं रहती. पुलिस को यह भी पता लगाना होता है कि खरीद के लिए रकम कौन उपलब्ध कराता था, केमिकल किसके जरिए आते थे, तैयार पदार्थ के खरीदार कौन थे और वितरण से मिलने वाला पैसा किन खातों या माध्यमों से पहुंचता था. महिपतमऊ मामले में पुलिस को गिरफ्तार आरोपियों से कुछ सप्लायरों के बारे में अहम जानकारी मिलने का दावा है. इसी आधार पर फरार लोगों की तलाश में टीमें दबिश दे रही हैं.
चार अक्टूबर को जानकीपुरम में हुई कार्रवाई भी इसी व्यापक जांच का हिस्सा बन गई है. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, वहां से बरामद कुल 7.076 किलोग्राम हेरोइन की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत करीब 50 करोड़ रुपये थी. यह कार्रवाई दिल्ली में सितंबर में हुई गिरफ्तारियों के बाद मिली जानकारी के आधार पर की गई थी.
जांच के दौरान रुखसार अली उर्फ राजू सहित कई संदिग्धों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई. दिल्ली पुलिस ने रुखसार को कथित मुख्य सप्लायर और मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का मालिक बताया है. इन गिरफ्तारियों से मिले इनपुट और महिपतमऊ मामले में मिले संपर्कों की तुलना से यह स्पष्ट हो सकता है कि लखनऊ में सामने आए दोनों मामलों के बीच कोई साझा कड़ी है या नहीं.
लखनऊ की भौगोलिक स्थिति और दूसरे जिलों से उसकी कनेक्टिविटी उसे बड़े वितरण नेटवर्क के लिए सुविधाजनक बना सकती है. हालांकि शहर को संगठित हेरोइन उत्पादन का स्थापित केंद्र मानने के लिए अभी पर्याप्त प्रमाण सार्वजनिक नहीं हैं. फिलहाल उपलब्ध तथ्य यह जरूर दिखाते हैं कि राजधानी में कम से कम दो रिहायशी ठिकानों पर कथित हेरोइन निर्माण से जुड़े मामले सामने आए हैं और जांच का दायरा शहर से बाहर तक जा रहा है.

