
नीब करौरी बाबा (प्रचलित नाम नीम करौली बाबा) की तपोभूमि उत्तराखंड के कुमांऊ क्षेत्र में मौजूद कैंचीधाम में बढ़ती श्रद्धालुओं की भीड़ अब प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है. मंदिर में दर्शन के लिए उमड़ रहे लोगों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ी है कि इसका सीधा असर आसपास की पर्वतीय सड़कों पर दिखाई देने लगा है.
लंबे वीकेंड और त्योहारों के दौरान कैंचीधाम, भवाली और भीमताल तक कई किलोमीटर लंबा जाम लग रहा है. इसे देखते हुए नैनीताल जिला प्रशासन भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कैंचीधाम में रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है. इसके साथ ही सड़क की क्षमता बढ़ाने, वैकल्पिक मार्ग तैयार करने और भविष्य में काठगोदाम-ज्योलीकोट से कैंचीधाम तक रोपवे पहुंचाने की योजना पर भी काम चल रहा है.
कैंचीधाम आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में पिछले कुछ समय में असाधारण वृद्धि हुई है. आंकड़ों के मुताबिक 2026 के शुरुआती छह महीनों में ही 24.34 लाख लोग कैंचीधाम पहुंच चुके हैं, जबकि पिछले पूरे साल में यहां आने वाले पर्यटकों की संख्या करीब आठ लाख थी. हाल के नौ महीनों में करीब 50 लाख लोगों के मंदिर पहुंचने का आंकड़ा भी सामने आया है.

प्रशासन के मुताबिक सामान्य दिनों में रोजाना करीब 25 हजार श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद रहती है लेकिन 2 अक्टूबर से शुरू हुए लंबे वीकेंड के दौरान यह संख्या बढ़कर 35 हजार से अधिक हो गई. कैंचीधाम जाने वाली सड़क वही है जो भवाली से मुक्तेश्वर की ओर भी जाती है. ऐसे में स्थानीय लोगों और तीर्थयात्रियों का पूरा यातायात एक ही सड़क पर आने से जाम की स्थिति गंभीर हो जाती है.
नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के मुताबिक लंबे वीकेंड के दौरान भीमताल, भवाली और कैंची में गाड़ियां कई किलोमीटर तक रेंगती रहीं और लोगों को सामान्य से कई घंटे अधिक समय लगा.
रजिस्ट्रेशन से भीड़ पर नियंत्रण
कैंचीधाम में बढ़ती भीड़ से निपटने के लिए प्रशासन सबसे पहले श्रद्धालुओं की संख्या को नियंत्रित और उनका अनुमान लगाने की व्यवस्था तैयार कर रहा है. जिला प्रशासन चार धाम यात्रा की तर्ज पर कैंचीधाम में भी रजिस्ट्रेशन सिस्टम शुरू करना चाहता है. शुरुआत में इसे वीकेंड पर लागू किए जाने की तैयारी है क्योंकि इन्हीं दिनों श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ जाती है.
अभी कैंचीधाम जाने के लिए किसी तरह के पूर्व रजिस्ट्रेशन की जरूरत नहीं है. कोई भी श्रद्धालु बिना ऑनलाइन पंजीकरण के मंदिर पहुंचकर दर्शन कर सकता है. प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने के बाद प्रशासन के पास पहले से यह जानकारी होगी कि किसी खास दिन कितने श्रद्धालुओं के कैंचीधाम पहुंचने की संभावना है. भीड़ एक तय सीमा से अधिक होने की स्थिति में लोगों की आवाजाही को नियंत्रित करने की व्यवस्था भी की जा सकेगी.
नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संयुक्त रूप से एक रिपोर्ट तैयार कर राज्य सरकार के पर्यटन विभाग को भेजेंगे. इसमें कैंचीधाम में चार धाम की तर्ज पर रजिस्ट्रेशन व्यवस्था लागू करने की सिफारिश की जाएगी.

चार धाम में लागू सिस्टम के मुताबिक श्रद्धालु 'टूरिस्ट केयर' पोर्टल या मोबाइल ऐप पर अकाउंट बनाकर यात्रा की तारीख, यात्रियों की संख्या और जिन धामों में जाना है, उनकी जानकारी दर्ज करते हैं. इसके बाद प्रत्येक यात्री की जरूरी जानकारी भरकर रजिस्ट्रेशन पूरा किया जाता है.
रजिस्ट्रेशन के बाद QR कोड वाला यात्रा रजिस्ट्रेशन लेटर जारी होता है जिसे यात्रा के दौरान साथ रखना होता है. निर्धारित स्थान पर पहुंचने पर रजिस्ट्रेशन की जांच की जाती है. इसी मॉडल को कैंचीधाम के लिए अपनाने पर प्रशासन को भीड़ प्रबंधन का एक डिजिटल आधार मिल सकता है.
इस व्यवस्था का इस्तेमाल व्यक्ति, परिवार और टूर ऑपरेटर कर सकते हैं. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के साथ उन लोगों के लिए फिजिकल रजिस्ट्रेशन और 'यात्री मित्र' की सुविधा भी उपलब्ध रहती है जो ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकते.
चार धाम व्यवस्था में दर्शन स्लॉट टोकन और निजी या सार्वजनिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन भी शामिल है. कैंचीधाम में इसी तरह की व्यापक व्यवस्था लागू करने पर प्रशासन केवल मंदिर के गेट पर श्रद्धालुओं के नाम दर्ज करने के बजाय यात्रा से पहले ही भीड़ का अनुमान लगा सकेगा.
रातीघाट बाईपास से घटेगा दबाव
रजिस्ट्रेशन के जरिए श्रद्धालुओं की संख्या को व्यवस्थित करने के साथ ही प्रशासन सड़क की क्षमता बढ़ाने पर भी काम कर रहा है. कैंचीधाम जाने वाले यातायात को अलग करने के लिए 18 किलोमीटर लंबे रातीघाट बाईपास को अहम विकल्प माना जा रहा है. जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के मुताबिक वन विभाग ने अब इस बाईपास के लिए जरूरी मंजूरी दे दी है. पहले इसे सैद्धांतिक मंजूरी मिली थी लेकिन अब जमीन पर काम शुरू करने की अनुमति भी मिल गई है.

बाईपास का करीब आठ किलोमीटर हिस्सा हॉट-मिक्सिंग के जरिए तैयार हो चुका है जबकि लगभग 10 किलोमीटर हिस्से पर काम बाकी है. राज्य सरकार बाकी हिस्से की हॉट-मिक्सिंग के लिए करीब 21 करोड़ रुपए के अनुमान पर विचार कर रही है. रयाल के मुताबिक मंजूरी मिलने के बाद सड़क को चार से छह महीने में चालू किया जा सकता है.
रातीघाट बाईपास का उद्देश्य सिर्फ कैंचीधाम आने-जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए रास्ता उपलब्ध कराना नहीं है. यह अल्मोड़ा, रानीखेत और कौसानी की ओर जाने वाले यातायात को भी कैंचीधाम वाली सड़क से अलग करने में मदद करेगा.
फिलहाल तीर्थयात्री और स्थानीय लोग एक ही सड़क का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में कैंचीधाम पर बढ़ने वाली भीड़ का असर दूसरे इलाकों के यातायात पर भी पड़ता है. प्रशासन की रणनीति इसलिए दो स्तरों पर दिखाई दे रही है. एक तरफ कैंचीधाम आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या और समय का अनुमान लगाकर भीड़ को नियंत्रित करने की तैयारी है, वहीं दूसरी तरफ गैर-कैंची यातायात को वैकल्पिक मार्ग देने की कोशिश हो रही है.
काठगोदाम से कैंची तक रोपवे
कैंचीधाम में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए सरकार अब सड़क परिवहन के विकल्प को भी मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रही है. काठगोदाम से नैनीताल के हनुमानगढ़ी तक प्रस्तावित रोपवे परियोजना के दायरे को कैंचीधाम तक बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद इस दिशा में कवायद शुरू हुई है.
काठगोदाम और ज्योलीकोट से कैंचीधाम तक रोपवे पहुंचाने की योजना का मकसद पर्वतीय सड़कों पर वाहनों का दबाव कम करना और श्रद्धालुओं को परिवहन का एक वैकल्पिक साधन देना है. काठगोदाम से हनुमानगढ़ी तक प्रस्तावित रोपवे की लंबाई 14.9 किलोमीटर है और इसकी अनुमानित लागत 2721.52 करोड़ रुपए है.
2018 से इस परियोजना को लेकर सर्वे का दौर चल रहा है. अब कैंचीधाम को इसमें जोड़ने पर योजना का दायरा बदल जाएगा. प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम, लोक निर्माण विभाग के सचिव पंकज पांडे और पर्यटन सचिव धीरज गर्ब्याल ने इस संबंध में अधिकारियों के साथ बैठक कर चुके हैं.
प्रमुख सचिव के मुताबिक मुख्यमंत्री के निर्देश पर परियोजना में बदलाव के बाद उसकी स्थिति, भूमि अधिग्रहण और निर्माण से जुड़े पहलुओं पर रिपोर्ट तैयार की जानी है. अधिकारियों के मुताबिक कैंचीधाम पहुंचने के लिए फिलहाल काठगोदाम से ज्योलीकोट और भीमताल होकर तथा कालाढूंगी रोड से नैनीताल और ज्योलीकोट होकर दो प्रमुख रास्ते हैं. ज्योलीकोट से कैंचीधाम की सड़क दूरी करीब 24 किलोमीटर है. रोपवे से यह दूरी और यात्रा का दबाव दोनों कम किए जा सकते हैं.
मौजूदा प्रस्ताव के मुताबिक काठगोदाम से हनुमानगढ़ी तक रोपवे में 78 टावर बनाए जाएंगे. एक दिशा में हर घंटे करीब 1800 यात्रियों को ले जाने की क्षमता होगी. दस घंटे संचालन में अधिकतम 18 हजार लोगों को ले जाया जा सकेगा. प्रति व्यक्ति किराया 375 रुपए प्रस्तावित है. अधिकारियों का अनुमान है कि रोपवे बनने के बाद करीब 60 फीसदी ट्रैफिक सड़क से शिफ्ट हो सकता है.
हालांकि कैंचीधाम को परियोजना में जोड़ने के बाद तकनीकी और पर्यावरणीय पहलुओं का नए सिरे से अध्ययन करना होगा. संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्र होने के कारण प्रस्तावित टावरों और अन्य निर्माण स्थलों की भूगर्भीय रिपोर्ट तैयार की जाएगी. सरकार का जोर विस्तृत तकनीकी अध्ययन पर है ताकि भविष्य में पर्यावरणीय आधार पर परियोजना के सामने कानूनी अड़चन न आए.
यात्रियों के लिए पूरा ट्रांजिट नेटवर्क
रोपवे को सिर्फ एक हवाई परिवहन सुविधा के रूप में नहीं बल्कि काठगोदाम और आसपास के यातायात को व्यवस्थित करने वाले बड़े नेटवर्क के तौर पर विकसित करने की योजना है. काठगोदाम रेलवे स्टेशन और रोडवेज परिसर के बीच करीब 250 मीटर लंबा फुटओवर ब्रिज बनाने की योजना है. इसका उद्देश्य ट्रेन से उतरने वाले यात्रियों को सड़क पार किए बिना सीधे रोपवे स्टेशन तक पहुंचाना है.
रोपवे इस्तेमाल करने वाले लोगों के निजी वाहन और टैक्सी कहां खड़े होंगे, इसके लिए भी पार्किंग व्यवस्था तैयार करनी होगी. प्रस्ताव में रानीबाग में बड़ी पार्किंग बनाने की योजना है. बंद हो चुकी एचएमटी फैक्ट्री परिसर के बड़े हिस्से का इस्तेमाल इसके लिए किया जा सकता है. इसके अलावा काठगोदाम रेलवे स्टेशन, रोपवे के शुरुआती केंद्र रोडवेज परिसर और ज्योलीकोट में पार्किंग विकसित करने की योजना है.
भवाली से पहले सेनिटोरियम के पास भी पार्किंग की संभावना तलाशी जा रही है. जहां वनभूमि का मामला आएगा, वहां लैंड ट्रांसफर की प्रक्रिया अपनाई जाएगी. मौजूदा 14.9 किलोमीटर के काठगोदाम-नैनीताल रोपवे के लिए कुल 11.03 हेक्टेयर भूमि की जरूरत बताई गई है. इसमें 6.62 हेक्टेयर सरकारी विभागों की जमीन, 3.60 हेक्टेयर वनभूमि और 0.80 हेक्टेयर निजी जमीन शामिल है.
प्रस्ताव के मुताबिक रोपवे करीब 50 मिनट में लोगों को सरोवर नगरी पहुंचाएगा. हालांकि सरकार के सामने एक नई चुनौती भी है. रोपवे से नैनीताल पहुंचने वाले पर्यटकों को हनुमानगढ़ी में उतारा जाना है. ऐसे में वहां भी भीड़ बढ़ सकती है. प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने अधिकारियों को हिदायत दी है कि हनुमानगढ़ी में ऐसा दबाव न बने जिससे बॉटलनेक की स्थिति पैदा हो जाए. इसलिए यहां भी पार्किंग और यातायात प्रबंधन की जरूरत होगी.
इस परियोजना को केंद्र की पर्वतमाला परियोजना में शामिल किए जाने की संभावना पर भी चर्चा हुई है. अगर नैनीताल-कैंचीधाम रोपवे को पर्वतमाला का हिस्सा बनाया जाता है तो इसके लिए केंद्रीय कैबिनेट में प्रस्ताव भेजना होगा. मंजूरी मिलने पर केंद्र से आर्थिक सहयोग मिल सकता है, जबकि राजस्व का बड़ा हिस्सा राज्य को मिलने की उम्मीद है.
कुल मिलाकर कैंचीधाम में बढ़ती भीड़ से निपटने की सरकारी रणनीति केवल मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या सीमित करने तक नहीं है. प्रशासन एक तरफ रजिस्ट्रेशन के जरिए पहले से भीड़ का अनुमान लगाना चाहता है तो दूसरी तरफ रातीघाट बाईपास के जरिए गैर-तीर्थ यातायात को अलग करने की कोशिश है. लंबी अवधि में काठगोदाम-ज्योलीकोट से कैंचीधाम तक रोपवे को सड़क का विकल्प बनाने की तैयारी है. इसके साथ पार्किंग, फुटओवर ब्रिज और हनुमानगढ़ी जैसे इंटरचेंज प्वाइंट पर भीड़ प्रबंधन की योजना बनाई जा रही है.

