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हरियाणवी म्यूजिक में शोहरत से खौफनाक हत्या तक, अंकित बालियान की कहानी

कबड्डी के मैदान से हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री तक पहचान बनाने वाले अंकित बालियान के बढ़ते कद, विवादों और कथित धमकियों के बीच दिनदहाड़े हत्या ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं

Ankit Baliyan (Photo/@ankiitbaliyann)
अंकित बालियान (फाइल फोटो)
अपडेटेड 27 अगस्त , 2026

हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री में अपनी बुलंद आवाज, देसी अंदाज और बदमाशी के तेवर वाले गानों से पहचान बनाने वाले अंकित बालियान अब नहीं हैं. 26 अगस्त की शाम शामली में जिस तरह जिम से निकलते ही चार बदमाशों ने उन पर करीब 20 राउंड गोलियां बरसाईं.

इस वारदात ने न सिर्फ एक उभरते कलाकार की जिंदगी खत्म कर दी, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सिर में गोली लगने से अंकित की मौके पर ही मौत हो गई. पुलिस अब हमलावरों की तलाश में जुटी है और शुरुआती तौर पर हत्या के पीछे पुरानी रंजिश या गैंगवार की आशंका जताई जा रही है.

लेकिन अंकित की कहानी सिर्फ एक सनसनीखेज हत्या की कहानी नहीं है. यह कबड्डी के मैदान से संगीत की दुनिया तक पहुंचे उस युवक की कहानी है, जिसने बेहद कम समय में हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री में अपनी अलग पहचान बनाई और अब राजनीति से लेकर बॉलीवुड तक बड़े सपने देख रहा था.

हत्याकांड को कैसे अंजाम दिया गया

शामली जिले के बंतीखेड़ा गांव में 26 अगस्त की शाम सामान्य नहीं थी. करीब सात बजे अंकित बालियान रोज की तरह जिम में वर्कआउट करने पहुंचे थे. पिछले करीब एक साल से जिम उनकी दिनचर्या का हिस्सा था. वर्कआउट के बाद जैसे ही वे बाहर निकले, पहले से घात लगाए बैठे चार बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी.

'भरी कोर्ट में गोली मारेंगे' गाने के वीडियो में अंकित
'भरी कोर्ट में गोली मारेंगे' गाने के वीडियो में अंकित

बताया गया कि हमलावरों ने करीब 20 राउंड गोलियां चलाईं. अंकित के सिर में भी गोली लगी और उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया. वारदात के बाद इलाके में दहशत फैल गई. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू की और शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा.

परिजनों ने देर रात करीब सवा एक बजे अज्ञात हमलावरों के खिलाफ तहरीर दी. पुलिस अब घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों, संदिग्धों और अंकित के संपर्क में रहे लोगों की जानकारी खंगाल रही है. हत्या की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है, लेकिन पुरानी रंजिश और गैंगवार को जांच की प्रमुख दिशाओं में माना जा रहा है.

अंकित की हत्या इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वह पश्चिमी यूपी के शामली से निकलकर हरियाणवी मनोरंजन जगत में अपनी जगह बना चुके थे. उनके गानों में जिस तरह अपराध, दबंगई और ग्रामीण जीवन की झलक दिखाई देती थी, वह उनकी लोकप्रियता का बड़ा कारण था.

'भरी कोर्ट में गोली मारेंगे मेरी जान' जैसे गाने ने उन्हें खास पहचान दिलाई. 'खाटोला', 'गोली-गोली के बारूद', 'मोदी बड़ा गांव' और 'रुतबा जाट और जाटनी' जैसे गानों में भी उन्होंने काम किया था. विडंबना यह है कि जिन गीतों ने उन्हें युवाओं के बीच पहचान दिलाई, उन्हीं गीतों के बीच जीने वाले इस कलाकार की हत्या भी गोलियों से ही हुई.

हालांकि यह कहना जल्दबाजी होगी कि उनके गीतों या सार्वजनिक छवि का हत्या से कोई सीधा संबंध था. पुलिस जांच के बाद ही तस्वीर साफ होगी.

कबड्डी से संगीत तक का सफर

अंकित बालियान की जिंदगी की शुरुआत संगीत से नहीं हुई थी. चार भाई-बहनों में तीसरे नंबर के अंकित बचपन से ही खेल और संगीत दोनों में रुचि रखते थे. उनके भाई कपिल के मुताबिक, वर्ष 2013-14 तक अंकित प्रदेश स्तर के कबड्डी खिलाड़ी थे. दिल्ली, भोपाल समेत कई स्थानों पर हुई प्रतियोगिताओं में उन्होंने हिस्सा लिया और शानदार प्रदर्शन किया. लेकिन कबड्डी का यह सफर ज्यादा लंबा नहीं चल सका.

अंकित की फिटनेस में काफी दिलचस्पी थी
अंकित की फिटनेस में काफी दिलचस्पी थी

खेल के दौरान पैर में फ्रैक्चर हुआ और उन्हें कबड्डी छोड़नी पड़ी. खेल छूटने के बाद उन्होंने जिम को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाया. यहीं से उनके जीवन में एक नया मोड़ आया. शुरुआती दिनों में अंकित गांव में मोबाइल फोन की दुकान भी चलाते थे. मगर उनके भीतर कुछ अलग करने की बेचैनी थी.

साल 2016 में वे दिल्ली चले गए और वहां बीपीएड यानी बैचलर ऑफ फिजिकल एजुकेशन की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई पूरी करने के बाद वर्ष 2018 के आसपास वह सोनीपत में रहने लगे. इसी दौरान हरियाणवी संगीत की दुनिया में कदम रखने की तैयारी शुरू हुई. 2022 में उन्होंने पेशेवर तौर पर हरियाणवी गानों की शुरुआत की.

शुरुआत में संघर्ष था, लेकिन मेहनत और लगातार काम ने उन्हें पहचान दिलानी शुरू कर दी. देखते ही देखते उनके गाने इंटरनेट मीडिया और युवाओं के बीच लोकप्रिय होने लगे. महज कुछ वर्षों में वह 50 से अधिक हरियाणवी गानों में काम कर चुके थे.

अंकित की खासियत यह थी कि वे सिर्फ गायक नहीं थे. वे अभिनेता, गीतकार और संगीतकार के तौर पर भी काम कर रहे थे. उनके गीतों में हरियाणवी संस्कृति, ग्रामीण जीवन, युवाओं की भाषा और देसी मिजाज दिखाई देता था.

उन्होंने मासूम शर्मा, रानू पंजाबी, अंजलि राघव और आशु ट्विंकल जैसे चर्चित कलाकारों के साथ भी काम किया. संगीत की दुनिया में बढ़ती लोकप्रियता के साथ अंकित ने अपना काम भी फैलाया. रोहतक के सेक्टर-14, सोनीपत और दिल्ली के खजूरी खास में उनके कार्यालय होने की जानकारी सामने आई है.

काम के सिलसिले में वे इन शहरों में रहते थे. परिवार के मुताबिक वह एक-दो महीने में गांव आते थे. करीब चार साल पहले उन्होंने दिल्ली के खजूरी खास निवासी शिक्षिका ज्योति से प्रेम विवाह किया था और उनके साथ दिल्ली में रहते थे.

धमकियों और रंगदारी का दावा

अंकित की हत्या के बाद उनके परिवार की ओर से सामने आई कुछ जानकारियां इस मामले को और गंभीर बनाती हैं. परिजनों के मुताबिक करीब एक साल पहले हरियाणा में अन्य साथी सिंगरों के साथ उनका विवाद हुआ था. इसके बाद करीब छह महीने पहले उनसे कथित तौर पर रंगदारी मांगी गई थी.

हालांकि उस समय उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई थी. परिवार और ग्रामीणों का दावा है कि करीब डेढ़ महीने पहले अंकित ने देर रात अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल से लाइव आकर प्रशंसकों के बीच धमकियों और रंगदारी की मांग का जिक्र किया था. उनका कहना था कि वे रंगदारी नहीं देंगे और डरकर पीछे नहीं हटेंगे.

साथ ही उन्होंने हरियाणा में दोबारा काम शुरू करने की बात भी कही थी. यह दावा अब पुलिस जांच का अहम हिस्सा बन सकता है. क्या धमकियां वास्तव में मिली थीं? अगर मिली थीं तो किससे? क्या उनका हत्या से कोई संबंध था? क्या किसी पुराने विवाद ने हिंसक रूप लिया? इन सवालों के जवाब पुलिस की जांच से ही सामने आएंगे.

हत्या से करीब दो घंटे पहले अंकित के इंस्टाग्राम अकाउंट पर उनके एक गाने की वीडियो भी शेयर की गई थी. वीडियो में 'खास भाई की भड़क के ऊपर, मर्डर मार दे सड़क के ऊपर...' जैसे बोल थे. पोस्ट में लोगों से वीडियो को अधिक से अधिक शेयर करने की अपील की गई थी.

हत्या के बाद भी उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर गतिविधि होने की बात सामने आई है. यही वजह है कि पुलिस सोशल मीडिया अकाउंट की पूरी टाइमलाइन खंगाल रही है. जांच एजेंसियां यह देख रही हैं कि हत्या से पहले और बाद में अकाउंट किसने संचालित किया, किन लोगों से अंकित की बातचीत हुई और हाल के दिनों में उन्हें किस तरह की धमकियां मिली थीं.

एक और अहम तथ्य यह है कि वर्ष 2025 तक अंकित लंबे समय तक हरियाणा में रहे थे. करीब एक साल पहले वह अपने मूल गांव बंतीखेड़ा लौट आए थे और परिवार के साथ रहने लगे थे. इसके बावजूद संगीत के सिलसिले में हरियाणा आना-जाना जारी रहा.

बताया गया है कि एक विवाद के चलते वह करीब छह महीने से हरियाणा नहीं गए थे. अब पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि आखिर वह विवाद क्या था और उसका इस हत्या से कोई संबंध है या नहीं.

राजनीति का सपना

अंकित बालियान की कहानी उस कलाकार की थी जो अपनी पहचान बनाने के बाद रुकना नहीं चाहता था. हरियाणवी संगीत की दुनिया में उन्हें पहचान मिल चुकी थी, लेकिन उनकी महत्वाकांक्षाएं इससे कहीं आगे की थीं. परिवार के मुताबिक वे बंतीखेड़ा से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे.

उनका इरादा राजनीति में कदम रखने का था. इसके बाद अंकित बॉलीवुड में भी अपनी किस्मत आजमाना चाहते थे. परिवार का दावा है कि कुछ चर्चित बॉलीवुड कलाकारों से इस सिलसिले में उनकी बातचीत भी चल रही थी. संगीत की दुनिया में भी उनके कई प्रोजेक्ट पाइपलाइन में थे. अंकित 20 से अधिक नए हरियाणवी गानों पर काम कर रहे थे. इन गानों को अगले महीने रिलीज करने की तैयारी थी.

परिवार के अनुसार अंकित को हरियाणवी संस्कृति और संगीत से गहरा लगाव था. वे अपने गीतों और संगीत के जरिए ग्रामीण जीवन और हरियाणवी संस्कृति को लोगों तक पहुंचाना चाहते थे.

उनके पिता सत्यवीर सिंह सेना से सेवानिवृत्त हैं और वर्तमान में गांव में खेती करते हैं. अंकित की दो बड़ी बहनों की शादी हो चुकी है. छोटा भाई भी है. गांव के स्कूल से प्राथमिक शिक्षा लेने के बाद उन्होंने दिल्ली से बीपीएड किया. खेल में करियर बनाने का सपना चोट के कारण टूटा तो उन्होंने खुद को जिम से जोड़ा और फिर संगीत को अपना रास्ता बनाया.

यही संघर्ष उन्हें गांव की मोबाइल दुकान से हरियाणवी म्यूजिक इंडस्ट्री तक लेकर गया. लेकिन 26 अगस्त की शाम बंतीखेड़ा में हुई गोलियों की बौछार ने इस सफर को अचानक रोक दिया. अंकित बालियान के अधूरे गाने, आने वाली 20 से ज्यादा रिलीज और उनके परिवार की आंखों में ठहरे सपने अब यही सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर पश्चिमी यूपी में कानून का डर अपराधियों के मन से इतना क्यों कम होता जा रहा है?

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