यह पिछले महीने की बात है जब दिल्ली में लड़के-लड़कियां निष्पक्ष परीक्षाओं की मांग को लेकर अभियान चला रहे थे. उसी दौरान जामनगर स्थित गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय में ग्रेजुएशन कर रहे छात्रों को यह जानकर झटका लगा कि उनके तीसरे वर्ष के बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी (BAMS) का प्रश्नपत्र कथित तौर पर लीक हो गया है.
गुजरात भर के छात्रों की सर्जरी की परीक्षा से एक दिन पहले 'इंपॉर्टेंट टॉपिक्स' शीर्षक वाला एक वॉट्सएप मैसेज कई छात्रों को मिला. इसके साथ विषयों की एक सूची थी और एक लाइन लिखी थी कि इसे किसी से साझा न करें.
20 जुलाई की सुबह जब तृतीय वर्ष BAMS परीक्षा का ‘शल्य तंत्र-I’ का प्रश्नपत्र परीक्षा कक्षों में बांटा गया तो छात्रों ने पाया कि 12 में से 11 प्रश्न वही थे जो उन्हें वॉट्सएप पर मिले थे.
यह मामला आधिकारिक तौर पर तब सामने आया जब परीक्षा वाले दिन दोपहर में जूनागढ़ के सरकारी आयुर्वेद कॉलेज के एक प्रोफेसर को वायरल मैसेज की जानकारी मिली. यही प्रश्नपत्र गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय से संबद्ध 20-25 कॉलेजों में इस्तेमाल किया गया था. विश्वविद्यालय ने यह नहीं बताया कि इस परीक्षा में कितने अभ्यर्थी शामिल हुए थे.
गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय की स्थापना 1965 में गुजरात विधानसभा द्वारा पारित एक कानून के तहत की गई थी और यह 1967 में अस्तित्व में आया. इसे दुनिया का पहला वैधानिक विश्वविद्यालय बताया जाता है, जो केवल आयुर्वेद शिक्षा और अनुसंधान के लिए समर्पित है. प्रशासनिक रूप से यह राज्य और केंद्र, दोनों सरकारों के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालयों से जुड़ा है. यह कानून 1954 और 1956 में जामनगर में केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान और पोस्ट ग्रेजुएट प्रशिक्षण संस्थानों की स्थापना के बाद लाया गया था.
गुजरात के सभी आयुर्वेद कॉलेज गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय से संबद्ध हैं. इनमें अहमदाबाद, भावनगर और सूरत के सरकारी कॉलेजों के साथ-साथ लोदरा, नडियाद, वल्लभ विद्यानगर और लिमडा के स्ववित्तपोषित संस्थान भी शामिल हैं. विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (NAAC) से A++ ग्रेड प्राप्त है. BAMS में प्रवेश राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा-स्नातक (NEET-UG) के माध्यम से होता है. इसके बाद राज्य स्तर की काउंसलिंग होती है.
27 जुलाई को जामनगर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में गुजरात आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति डॉ. नरेश जैन ने कहा कि पहली बार संदेह गांधीनगर जिले के श्री बाला हनुमान आयुर्वेद कॉलेज पर गया. वहां विश्वविद्यालय के फ्लाइंग स्क्वॉड ने परीक्षा के दौरान नियमित निरीक्षण किया था और संदिग्ध वॉट्सएप स्क्रीनशॉट पाए थे.
जैन ने कहा कि तीन वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति मामले की जांच करेगी. जो भी व्यक्ति या संस्थान दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ विश्वविद्यालय के नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी और आर्थिक दंड भी लगाया जाएगा. साथ ही पुलिस में एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी.
हालांकि, परीक्षा कार्यालय का पक्ष इससे अलग है. परीक्षा नियंत्रक के कार्यवाहक एच.पी. झाला ने कहा कि परीक्षा दोपहर 12:30 बजे समाप्त हुई थी और उन्हें शाम को ही पता चला कि परीक्षा से पहले मोबाइल फोन पर 'महत्वपूर्ण' प्रश्न साझा किए गए थे.
गुजरात BJP के प्रवक्ता डॉ. अनिल पटेल ने कहा कि कार्यवाहक कुलपति ने उन्हें स्वतंत्र जांच और कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है.
कांग्रेस के छात्र संगठन भारतीय राष्ट्रीय छात्र संघ (NSUI) के जूनागढ़ जिला अध्यक्ष मयूर सावलिया ने परीक्षा रद्द करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. संगठन ने कहा कि ऐसा नहीं होने पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.
छात्रों ने जामनगर परिसर में धरना दिया और कुलपति तथा परीक्षा नियंत्रक को ज्ञापन सौंपा. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो राज्यव्यापी आंदोलन किया जाएगा.
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि 2014 से 2024 के बीच गुजरात में परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने की 34 घटनाएं हुई हैं. उनकी सूची में गुजरात लोक सेवा आयोग के मुख्य अधिकारी, तलाटी, शिक्षक अभिरुचि परीक्षा, लोकरक्षक दल, हेड क्लर्क, वन रक्षक और जूनियर क्लर्क की परीक्षाएं शामिल थीं. रमेश ने तर्क दिया कि फास्ट-ट्रैक अदालतें 'व्यवस्थित सुधारों से ध्यान भटकाने' का माध्यम हैं.
कांग्रेस प्रवक्ता मनीष दोशी ने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होना हजारों युवा अभ्यर्थियों के सपनों की चोरी है. उन्होंने कहा कि पिछले तीन वर्षों में गुजरात में 1,899 छात्रों ने आत्महत्या की, जिनमें से अकेले 2024 में 568 मामले थे. उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों के पीछे हर संख्या एक परिवार के दुख और एक युवा के अधूरे सपने की कहानी है. छात्रों को अब प्रश्नपत्र लीक, परीक्षा में गड़बड़ी और भर्ती घोटालों के खिलाफ 'कानून नहीं, बल्कि कार्रवाई' की जरूरत है.

