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BJP को क्यों आ रही फिरोज गांधी की याद?

राहुल गांधी के प्रयागराज कार्यक्रम से पहले फिरोज गांधी की विरासत पर सियासत तेज, कांग्रेस की कथित अनदेखी को मुद्दा बनाकर BJP साध रही राजनीतिक निशाना

Feroze Gandhi
फिरोज गांधी
अपडेटेड 5 अगस्त , 2026

उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनावी मौसम आते ही इतिहास के ऐसे पन्ने भी खुलने लगते हैं, जिन पर वर्षों तक किसी की नजर नहीं जाती. प्रयागराज के मम्फोर्डगंज स्थित पारसी कब्रिस्तान में स्वतंत्रता सेनानी, सांसद और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पति फिरोज जहांगीर गांधी की कब्र भी इन दिनों ऐसी ही राजनीतिक हलचल के केंद्र में है. 

वर्षों तक उपेक्षित रही इस कब्र पर अब फूल चढ़ाने की होड़ नहीं बल्कि राजनीतिक संदेश देने की कोशिश दिखाई दे रही है. दिलचस्प यह है कि जिस कांग्रेस नेहरू-गांधी परिवार की विरासत को अपना सबसे बड़ा राजनीतिक आधार बताती है, उसी परिवार के सदस्य फिरोज गांधी की कब्र पर वर्षों से नजर नहीं आए. अब इस खालीपन को BJP भरने की कोशिश कर रही है. 

पिछले महीने 18 जुलाई को BJP पिछड़ा वर्ग मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल अपने समर्थकों के साथ इस कब्रिस्तान में पहुंचे. उन्होंने फिरोज गांधी की कब्र पर पुष्प अर्पित किए और कांग्रेस पर अपने ही पूर्वज की उपेक्षा का आरोप लगाया. 

फिरोज गांधी की कब्र (फोटो : आशुतोष)
फिरोज गांधी की कब्र (फोटो : आशुतोष)

अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को कब्रगाह की साफ-सफाई और व्यवस्थाओं पर ध्यान देने का निर्देश दिए जाने की चर्चा भी राजनीतिक गलियारों में है. इससे साफ संकेत मिल रहा है कि यह केवल श्रद्धांजलि का मामला नहीं, बल्कि एक सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा बन चुका है. 

फिरोज गांधी की कब्र पर आज भी एक वाक्य टूटी हुई इबारत में पढ़ा जा सकता है, "He is not dead..." लेकिन विडंबना यह है कि इस वाक्य के नीचे मौजूद कब्र का घेरा टूट चुका है, आसपास झाड़ियां उग आई हैं और वर्षों से वहां कोई नियमित रूप से श्रद्धांजलि देने नहीं पहुंचता. 

पारसी समुदाय के देखरेखकर्ता अनिल कुमार बताते हैं कि बहुत पहले सोनिया गांधी और बाद में राहुल गांधी आए थे लेकिन उसे भी जमाना बीत चुका है. हर वर्ष 8 सितंबर को फिरोज गांधी की पुण्यतिथि गुजर जाती है मगर वहां फूल चढ़ाने वाला कोई नहीं होता. इस बार पहली बार BJP नेताओं की मौजूदगी ने इस सन्नाटे को राजनीतिक बहस में बदल दिया.

BJP के प्रदेश पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष प्रकाश पाल इसे कांग्रेस की वैचारिक विडंबना बताते हैं. उनका कहना है, "जिस व्यक्ति ने स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया, संसद में भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ी और कांग्रेस की सरकार को भी कठघरे में खड़ा किया, उसी फिरोज गांधी को कांग्रेस भूल चुकी है. BJP ऐसे स्वतंत्रता सेनानी का सम्मान करेगी." 

प्रकाश पाल ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि न वे अपने दादा की जन्मतिथि पर आते हैं और न ही पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि देने पहुंचते हैं. उन्होंने यहां तक कहा कि कांग्रेस परिवार ने अपनी राजनीतिक सुविधा के अनुसार फिरोज गांधी की विरासत को पीछे छोड़ दिया. 

यह पहला अवसर नहीं है जब BJP ने फिरोज गांधी की कब्र को राजनीतिक प्रतीक बनाया हो. 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले जब प्रियंका गांधी प्रयागराज में सक्रिय हुई थीं और स्वराज भवन के जरिए कांग्रेस का अभियान शुरू हुआ था, तब BJP युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने फिरोज गांधी की कब्र की साफ-सफाई कर वहां पुष्प अर्पित किए थे. 

आनंद भवन में जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा और राजीव के साथ फिरोज गांधी
आनंद भवन में जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा और राजीव के साथ फिरोज गांधी

इसी तरह जब-जब राहुल गांधी का प्रयागराज दौरा तय होता है, BJP इस मुद्दे को सामने लाती रही है. इस बार भी राहुल गांधी के प्रस्तावित युवा संवाद कार्यक्रम से पहले फिरोज गांधी की कब्र पर श्रद्धांजलि और उसके बाद कब्रगाह की बदहाली का मुद्दा उठना राजनीतिक संयोग नहीं माना जा रहा.

राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि BJP का उद्देश्य केवल कांग्रेस पर हमला करना नहीं है बल्कि गांधी परिवार के भीतर की विरासत को लेकर भी सवाल खड़े करना है. वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक सुशील पांडेय कहते हैं, "BJP प्रतीकों की राजनीति में बेहद दक्ष है. उसे मालूम है कि कांग्रेस ने गांधी उपनाम को राजनीतिक पूंजी बनाया है लेकिन फिरोज गांधी की सार्वजनिक स्मृति अपेक्षाकृत कमजोर रही है. ऐसे में उनकी उपेक्षा का सवाल उठाकर BJP कांग्रेस की नैतिक विश्वसनीयता पर चोट करना चाहती है." 

सुशील पांडेय का मानना है कि राहुल गांधी जिस तरह विरासत, संविधान और स्वतंत्रता आंदोलन की बात करते हैं, उसी समय फिरोज गांधी की उपेक्षा का मुद्दा उठाकर BJP उनके नैरेटिव को कमजोर करने का प्रयास करती है.

इतिहासकार बताते हैं कि फिरोज गांधी केवल इंदिरा गांधी के पति या राहुल गांधी के दादा भर नहीं थे. स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी सक्रिय भूमिका रही. 1930 में वे लाल बहादुर शास्त्री के साथ फैजाबाद जेल में बंद रहे. पंडित जवाहरलाल नेहरू के साथ लगान विरोधी आंदोलन में भाग लेने पर 1932-33 में भी जेल गए. 

लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अध्ययन के दौरान फिरोज गांधी ने फासीवाद विरोधी अभियानों में हिस्सा लिया. 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन में सक्रिय भूमिका के कारण उन्हें नैनी सेंट्रल जेल भेजा गया. स्वतंत्र भारत में सांसद बनने के बाद उन्होंने सत्ता के भीतर रहते हुए भी सरकार को कठघरे में खड़ा करने का साहस दिखाया. 

फिरोज और इंदिरा गांधी की शादी (फोटो : विकिमीडिया कॉमन्स)
फिरोज और इंदिरा गांधी की शादी (फोटो : विकिमीडिया कॉमन्स)

एलआईसी निवेश से जुड़े हरिदास मुंद्रा घोटाले का खुलासा कर उन्होंने तत्कालीन वित्त मंत्री टी.टी. कृष्णमाचारी को इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया. भारतीय संसदीय इतिहास में इसे सत्ता के खिलाफ संसद के प्रभावी दखल के सबसे बड़े उदाहरणों में गिना जाता है. 

इतिहासकार अरविंद कुमार कहते हैं, "फिरोज गांधी भारतीय लोकतंत्र में संसदीय जवाबदेही के प्रतीक माने जाते हैं. उनकी पहचान केवल गांधी परिवार के सदस्य के रूप में नहीं, बल्कि एक निर्भीक सांसद और खोजी जनप्रतिनिधि के रूप में भी रही है. दुर्भाग्य से कांग्रेस ने भी उनकी राजनीतिक विरासत को उतना सामने नहीं रखा जितना रखा जा सकता था."

जानकार बताते हैं कि प्रयागराज से फिरोज गांधी का रिश्ता भी बेहद गहरा रहा. पिता की मृत्यु के बाद उनकी मां रतिमाई उन्हें लेकर अपनी बहन डॉ. शिरीन के पास इलाहाबाद आ गई थीं. यहीं उन्होंने विद्या मंदिर हाईस्कूल और बाद में इविंग क्रिश्चियन कॉलेज में पढ़ाई की. 

आनंद भवन से उनका जुड़ाव भी प्रयागराज में ही शुरू हुआ. एक प्रदर्शन के दौरान कमला नेहरू के बेहोश हो जाने पर फिरोज ने उनकी मदद की थी. यहीं से नेहरू परिवार के साथ उनके संबंध गहरे हुए और बाद में इंदिरा गांधी से उनका विवाह हुआ. 

राजनीतिक विश्लेषक विनय सिंह वर्मा का कहना है, “BJP इतिहास के उन पात्रों को सामने लाकर कांग्रेस पर सवाल खड़े करती है, जिनकी विरासत कांग्रेस ने पर्याप्त रूप से राजनीतिक विमर्श में नहीं रखी. फिरोज गांधी उसी श्रेणी का नाम हैं. इससे BJP एक तरफ कांग्रेस को रक्षात्मक बनाती है और दूसरी तरफ खुद को स्वतंत्रता आंदोलन की विरासत का सम्मान करने वाली पार्टी के रूप में प्रस्तुत करती है." 

हालांकि कांग्रेस के नेता इस पूरे घटनाक्रम को चुनावी राजनीति का हिस्सा बताते हैं. पार्टी के नेताओं का कहना है कि BJP को वास्तव में फिरोज गांधी की विरासत से कोई सरोकार नहीं है. कांग्रेस का तर्क है कि यदि सम्मान ही उद्देश्य होता तो यह मुद्दा केवल राहुल गांधी या प्रियंका गांधी के प्रयागराज आने से पहले ही क्यों उठता? कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यह केवल मीडिया का ध्यान खींचने और गांधी परिवार पर व्यक्तिगत हमला करने की रणनीति है.

उधर पारसी समुदाय के भीतर भी इस कब्रगाह की बदहाली को लेकर चिंता है. हाल ही में समुदाय के कुछ सदस्य वहां पहुंचे और प्रबंधन से रखरखाव बेहतर करने की बात कही थी. समुदाय के लोगों का कहना है कि यह केवल फिरोज गांधी की कब्र नहीं बल्कि प्रयागराज की साझा विरासत का हिस्सा है. इसकी देखभाल राजनीति से ऊपर उठकर होनी चाहिए. 

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