
बिहार राज्यसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) ने पांचों सीटों पर कब्जा जमा लिया है. चार सीटों पर जीत पहले से ही तय मानी जा रही थी, लेकिन पांचवीं सीट पर मुकाबला रोचक रहा. यहाँ NDA के शिवेश राम और महागठबंधन के अमरेंद्रधारी सिंह के बीच सीधी टक्कर थी. मतदान के दौरान NDA के सभी 202 विधायक एकजुट दिखे, जबकि महागठबंधन को बड़ा झटका लगा.
विपक्षी गठबंधन के चार विधायक (कांग्रेस के तीन और RJD का एक) सदन नहीं पहुंचे. गायब रहने वाले इन चारों विधायकों के फोन दिन भर बंद रहे. शाम को जब संपर्क हुआ, तो इनमें से तीन विधायकों ने अपनी अनुपस्थिति को लेकर चौंकाने वाली जानकारियां साझा कीं. मनोज कुमार विश्वास का बयान सबसे विस्फोटक रहा.
इंडिया टुडे से बातचीत में विश्वास ने सीधे तौर पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “जब गठबंधन में हमारे अध्यक्ष को ही सम्मान नहीं मिल रहा, तो हम वोट क्यों दें? मैंने 13 तारीख को ही स्पष्ट कर दिया था कि मैं वोट नहीं डालूंगा.” जब उनसे पूछा गया कि क्या यह फैसला सामूहिक था, तो उन्होंने इसे अपना व्यक्तिगत निर्णय बताया. वहीं, वाल्मीकिनगर से कांग्रेस विधायक सुरेंद्र कुमार कुशवाहा ने खराब तबीयत का हवाला दिया, जबकि मनोहर के फोन की घंटियां बजती रहीं लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

उधर, ढाका से RJD विधायक फैसल रहमान ने 'बिहार तक' को बताया कि मां की अचानक तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें दिल्ली जाना पड़ा. उन्होंने स्वीकार किया कि उन्होंने इसकी जानकारी तेजस्वी यादव या पार्टी के किसी अन्य सदस्य को नहीं दी थी, जबकि वे मतदान के एक दिन पहले तक पटना में ही मौजूद थे.
पार्टी के भीतर मचे घमासान पर वार-पलटवार
मनोज कुमार विश्वास के बयान ने कांग्रेस के भीतर 'अध्यक्ष बनाम पूर्व अध्यक्ष' की आंतरिक कलह को उजागर कर दिया है. हालांकि, बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने इन आरोपों को खारिज करते हुए BJP पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, “हमारे विधायकों के साथ जो भी हुआ, उसके पीछे BJP का हाथ है. जहां उनकी सरकार होती है, वे एजेंसियों के जरिए धमकाने या प्रलोभन देने का काम करते हैं.” उन्होंने यह भी दावा किया कि 7 मार्च को ही विधायकों ने अपने घरों के बाहर पुलिस की तैनाती की शिकायत की थी.
जब मनोज कुमार विश्वास द्वारा उठाए गए 'मान-सम्मान' के सवाल पर राजेश राम से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो वे उपलब्ध नहीं हुए. हालांकि, पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ता राजेश राठौर ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “किसी भी स्थिति में वोट न करना पार्टी के साथ गद्दारी है. वे महागठबंधन के वोटों से जीतकर आए हैं, इसलिए उन्हें गठबंधन के पक्ष में ही मतदान करना चाहिए था.”

