scorecardresearch
डार्क मोड

आंध्र प्रदेश का स्थापना दिवस 1 नवंबर या 1 अक्टूबर, क्यों छिड़ा तारीख पर विवाद?

1956 में आंध्र प्रदेश के गठन के बाद दशकों तक 1 नवंबर को स्थापना दिवस मनाया गया. लेकिन तेलंगाना के अलग होने के बाद इस तारीख की प्रासंगिकता और इसे मनाने को लेकर राजनीतिक दलों में मतभेद उभर आए

मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू (फाइल फोटो)
अपडेटेड 3 नवंबर , 2026

1 नवंबर को आंध्र प्रदेश के सोशल मीडिया अकाउंट रंग-बिरंगी पोस्ट और वीडियो क्लिप से भरे हुए थे. इनमें राज्य के स्थापना दिवस का जश्न मनाया जा रहा था. इसी मौके पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और दूसरे नेताओं ने भी राज्य के लोगों को शुभकामनाएं दीं.

लेकिन न तो राज्य की राजधानी अमरावती में और न ही 28 जिला मुख्यालयों में इस खास दिन को याद करने के लिए कोई आयोजन हुआ. यहां तक कि राज्यपाल के कार्यालय और आवास लोक भवन में भी ऐसा कुछ नहीं दिखा. 

राजनीतिक नेता और उनकी पार्टियां उसी दिन हुए शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में मतदान को लेकर व्यस्त नजर आए. स्कूलों और कॉलेजों में न तो ध्वजारोहण हुआ और न ही राज्य गीत 'मां तेलुगु तल्लीकि' गाया गया.

आंध्र प्रदेश का गठन 1956 में हुआ था. इसके बाद 58 साल तक हर साल 1 नवंबर को राज्य का स्थापना दिवस मनाया जाता रहा. लेकिन 2014 में संयुक्त आंध्र प्रदेश के विभाजन और तेलंगाना के गठन के बाद से तेलुगु देशम पार्टी (TDP) की अगुवाई वाली सरकारों के दौरान इस दिन का आधिकारिक महत्व खत्म हो गया.

इससे पहले युवजन श्रमिक रायथू कांग्रेस पार्टी (YSRCP) की सरकार ने स्थापना दिवस समारोह फिर शुरू किया था. लेकिन 2024 में TDP के दोबारा सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने फिर यह परंपरा बंद कर दी.

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आई.वाई.आर. कृष्णा राव कहते हैं, "यह विडंबना है कि आंध्र प्रदेश के करीब 5.5 करोड़ लोगों के पास अपने राज्य के गठन को याद करने के लिए कोई तारीख या दिन ही नहीं है."

1 नवंबर को कोई महत्व न देने का फैसला करते हुए नायडू ने राष्ट्रीय नेताओं की ओर से दी गई शुभकामनियों का जवाब तक नहीं दिया. उपमुख्यमंत्री और जन सेना पार्टी (JSP) के प्रमुख पवन कल्याण का रुख भी ऐसा ही रहा. उन्होंने भी स्थापना दिवस समारोह से दूरी बनाए रखी.

उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने भी राज्य दिवस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी (फाइल फोटो)
उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने भी राज्य दिवस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी (फाइल फोटो)

हालांकि गठबंधन में शामिल BJP के नेताओं का रुख इससे अलग था. पार्टी की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष पी.वी.एन. माधव और राजमुंदरी से सांसद एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री दग्गुबाती पुरंदेश्वरी ने इस मौके पर राज्य के लोगों को "हार्दिक शुभकामनाएं" दीं.

पूर्व मुख्यमंत्री और YSRCP प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने भी लोगों को शुभकामनाएं दीं. उन्होंने स्वतंत्रता सेनानी पोट्टी श्रीरामुलु को श्रद्धांजलि दी. रेड्डी ने कहा कि उन्होंने "अहिंसा को अपना हथियार और अटूट संकल्प को अपनी ताकत बनाकर तेलुगु भाषी लोगों के लिए अलग राज्य का सपना साकार करने के वास्ते अपने प्राणों की आहुति दी थी."

विवाद की वजह

विपक्षी YSRCP ने पहले TDP-JSP के स्थापना दिवस नहीं मनाने के फैसले को पोट्टी श्रीरामुलु का अपमान बताया था. पार्टी ने इसे आंध्र प्रदेश के संस्थापक नेताओं के बलिदान का भी अपमान करार दिया था.

1952 में मद्रास में पोट्टी श्रीरामुलु ने 58 दिनों तक आमरण अनशन किया था. इससे व्यापक आंदोलन शुरू हुआ, जिसके बाद तेलुगु भाषी लोगों के लिए अलग आंध्र राज्य का गठन हुआ. 1 अक्टूबर, 1953 को मद्रास प्रेसीडेंसी से अलग होकर बने आंध्र राज्य के साथ भारत में भाषाई आधार पर गठित होने वाले पहले राज्य का रास्ता खुला.

इसके तीन साल बाद 1 नवंबर, 1956 को बड़े आंध्र प्रदेश का गठन हुआ. इसके लिए तेलुगु भाषी एक और क्षेत्र तेलंगाना को आंध्र में मिला दिया गया. उस समय तेलंगाना तत्कालीन निजाम के हैदराबाद राज्य का हिस्सा था.

नायडू सरकार ने अपने पिछले कार्यकाल (2014-19) में भी 1 नवंबर को स्थापना दिवस नहीं मनाया था. सरकार का कहना था कि यह तारीख अब प्रासंगिक नहीं रह गई है. इसकी वजह यह थी कि 1 नवंबर को मूल रूप से आंध्र और तेलंगाना क्षेत्रों के एक होने की याद में मनाया जाता था. 2014 में इन दोनों क्षेत्रों का फिर से विभाजन हो गया था.

इसके बजाय नायडू ने 2018 तक हर साल 2 जून से 8 जून के बीच 'नव निर्माण दीक्षा' के नाम से विरोध सप्ताह आयोजित किया. 2 जून को आंध्र प्रदेश का विभाजन हुआ था जबकि 8 जून, 2014 को नायडू ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी.

नायडू सरकार हर साल करीब 15 करोड़ रुपए विभिन्न गतिविधियों पर खर्च करती थी. इनका मकसद विभाजन के दौरान आंध्र प्रदेश के साथ हुए ‘अन्याय’ को सामने लाना था. उस समय राज्य के लोग आर्थिक रूप से मजबूत केंद्र हैदराबाद के हाथ से निकलने को लेकर नाराज थे.

YSRCP प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने 1 नवंबर को राज्य गठन की शुभकामनाएं दी थीं (फाइल फोटो)
YSRCP प्रमुख जगन मोहन रेड्डी ने 1 नवंबर को राज्य गठन की शुभकामनाएं दी थीं (फाइल फोटो)

2019 में सत्ता में आने के बाद जगन रेड्डी ने हर साल होने वाले दीक्षा सप्ताह को बंद कर दिया और 1 नवंबर को फिर से 'राज्य स्थापना दिवस' के रूप में मनाना शुरू किया. दशकों पुरानी परंपरा के मुताबिक उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज फहराया और पोट्टी श्रीरामुलु की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की.

तारीख को लेकर मतभेद

सिर्फ राजनीतिक दलों में ही नहीं, शिक्षाविदों और बौद्धिक समूहों में भी इस बात पर मतभेद रहे हैं कि आंध्र प्रदेश का स्थापना दिवस 1 नवंबर को मनाया जाए या 1 अक्टूबर को.

1956 में आंध्र और तेलंगाना का विलय दोनों क्षेत्रों के नेताओं के बीच हुए एक "सज्जनों के समझौते" का नतीजा था. इसका मकसद संयुक्त राज्य में तेलुगु भाषी लोगों के हितों की रक्षा करना था. वहीं 2014 में राज्य का विभाजन तेलंगाना के नेताओं की लंबे समय से चली आ रही उस शिकायत का नतीजा था कि नौकरियों, जल संसाधनों और दूसरे क्षेत्रों में आंध्र का दबदबा बना हुआ है.

कृष्णा राव ने कहा, "इस तरह 1 नवंबर, 1956 को दोनों क्षेत्रों का मिलन हुआ था और 2 जून, 2014 को तलाक के साथ यह रिश्ता खत्म हो गया, यानी आंध्र प्रदेश और तेलंगाना अलग हो गए. आज का आंध्र प्रदेश वैसा ही है जैसा 1 अक्टूबर, 1953 से 1956 तक था. इसलिए अब कम से कम स्थापना दिवस की तारीख बदलकर 1 अक्टूबर कर देनी चाहिए."

उन्होंने बताया कि 2014 से 2016 के बीच आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव रहते हुए उन्होंने इस बारे में एक फाइल भी आगे बढ़ाई थी लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला.

हालांकि गुंटूर स्थित नव्यांध्र इंटेलेक्चुअल फोरम के अध्यक्ष प्रोफेसर डी.ए.आर. सुब्रमण्यम का मानना है कि 1 नवंबर को ही स्थापना दिवस मनाना सही है.

सुब्रमण्यम कहते हैं, "1 अक्टूबर, 1953 को बने आंध्र राज्य में बेल्लारी के कुछ हिस्से भी शामिल थे. लेकिन 1 नवंबर, 1956 को आंध्र प्रदेश और मैसूर अलग-अलग भाषाई राज्यों के रूप में बने तो बेल्लारी का वह हिस्सा कर्नाटक में चला गया. 1953 का आंध्र राज्य अब इतिहास है. आज का आंध्र प्रदेश वही क्षेत्र है, जो 1956 में बना था. उस समय हैदराबाद राज्य के तेलुगु भाषी हिस्से को इसमें मिलाया गया था. 2014 में तेलंगाना के अलग होने के बाद भी 1956 में बना आंध्र प्रदेश का यही हिस्सा बचा रहा. इसलिए 1 नवंबर को ही आंध्र प्रदेश के स्थापना दिवस के रूप में मान्यता मिलनी चाहिए."

इंडिया टुडे ने TDP और JSP के कई वरिष्ठ नेताओं से इस मुद्दे पर बात की. उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से परहेज किया. हालांकि उन्होंने माना कि 1 नवंबर ऐतिहासिक रूप से आंध्र प्रदेश के लिए एक अहम दिन रहा है.

JSP के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "हमारे पार्टी प्रमुख का तर्क है कि विभाजन के दौरान आंध्र प्रदेश के साथ अन्याय हुआ और उसे संपत्तियों में उसका उचित हिस्सा नहीं मिला. इसलिए हमने भी यह दिन मनाना बंद कर दिया." हालांकि उनके बयान से लगा कि वे खुद भी अपनी पार्टी के इस रुख से पूरी तरह सहमत नहीं हैं.

इंडिया टुडे ने आंध्र प्रदेश के मुख्य सचिव साई प्रसाद से भी संपर्क किया. उनसे पूछा गया कि 1 नवंबर को आधिकारिक तौर पर स्थापना दिवस क्यों नहीं मनाया जा रहा है. लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं मिला.

हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि 2024 में नई सरकार बनने के बाद इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई थी. राज्य मंत्रिमंडल में भी इस पर विचार किया गया था.

अधिकारी ने कहा, "तारीख को लेकर सभी तरह की जटिलताओं, ऐतिहासिक संदर्भों और अलग-अलग राय पर भी चर्चा हुई. इसके बजाय श्री पोट्टी श्रीरामुलु और उनके बलिदान को सर्वोच्च महत्व देने का फैसला किया गया. उनके बलिदान से ही हमें तेलुगु भाषी राज्य मिला."

दिसंबर 2024 में सरकार ने एक आदेश जारी किया था. इसके तहत हर साल 15 दिसंबर को "अमरजीवी श्री पोट्टी श्रीरामुलु" की पुण्यतिथि को आत्मार्पण दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया गया. वहीं, 16 मार्च को उनकी जयंती राज्य समारोह के रूप में मनाई जाती है.

कृष्णा राव का कहना है, "पोट्टी श्रीरामुलु का सम्मान करना सराहनीय है लेकिन किसी भी राज्य का अपना स्थापना दिवस होना चाहिए. अगर 1 अक्टूबर नहीं तो आंध्र प्रदेश सरकार को कम से कम अगले साल से 1 नवंबर को स्थापना दिवस मनाना शुरू कर देना चाहिए."

रिपोर्ट में जिस JSP नेता का जिक्र है, उन्हें उम्मीद है कि अमरावती की राजधानी के रूप में औपचारिक शुरुआत होने तक नायडू और उनका प्रशासन इस मुद्दे पर कोई स्पष्ट रुख अपना लेंगे. राजधानी का उद्घाटन 2028 में होने की उम्मीद है.

ADVERTISEMENT
Advertisement