
रामपुर की राजनीति में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां का नाम लंबे समय तक दबदबे, सियासी ताकत और अपने गढ़ में मजबूत पकड़ के लिए लिया जाता रहा है. लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उनके खिलाफ खड़े हुए एक नाम ने इस राजनीतिक समीकरण को काफी हद तक बदल दिया.
यह नाम है भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता और रामपुर सदर से विधायक आकाश सक्सेना का. आजम खां के खिलाफ दर्ज मुकदमों और कानूनी मामलों में शिकायतकर्ता के तौर पर सामने आए आकाश सक्सेना अब एक बार फिर चर्चा में हैं.
19 अगस्त को मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी परिसर और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई के बाद उनकी वर्ष 2019 की शिकायतें फिर सुर्खियों में आ गई हैं.
आकाश सक्सेना ने जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण, ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर जांच एजेंसियों से शिकायत की थी. ईडी की ताजा कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले की जांच का हिस्सा बताई जा रही है.

हालांकि छापेमारी में जांच एजेंसी को क्या मिला और आगे की कार्रवाई क्या होगी, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है. ऐसे में आकाश सक्सेना की शिकायतों और आजम खां के खिलाफ उनकी लंबी कानूनी लड़ाई को समझना जरूरी हो जाता है.
2018 से शुरू हुई कानूनी जंग
आजम खां और आकाश सक्सेना के बीच टकराव को केवल चुनावी राजनीति की लड़ाई के तौर पर नहीं देखा जा सकता. इसकी शुरुआत उन शिकायतों और मुकदमों से हुई, जिनमें आकाश सक्सेना ने आजम खां और उनके परिवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की.
जनवरी 2018 में आजम खां के बेटे अब्दुल्ला आजम के जन्म प्रमाण पत्र से जुड़े मामले ने इस टकराव को नया मोड़ दिया. बाद में यह मामला आजम खां, उनकी पत्नी तजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला आजम तक पहुंचा. आकाश सक्सेना की शिकायत के बाद फर्जी जन्म प्रमाण पत्र से संबंधित मुकदमा दर्ज हुआ.
मामला अदालत तक पहुंचा और लंबे समय तक कानूनी लड़ाई चली. हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब्दुल्ला आजम की विधानसभा सदस्यता भी चली गई. इसके बाद आजम खां के खिलाफ भी कई दूसरे मामलों में कानूनी कार्रवाई का सिलसिला आगे बढ़ा. 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान आजम खां के भाषण को लेकर भी आकाश सक्सेना ने शिकायत दर्ज कराई थी.
मिलक कोतवाली क्षेत्र के खातानगरिया गांव में जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी तथा अधिकारियों के खिलाफ कथित अभद्र भाषा के इस्तेमाल का मामला सामने आया था. इस मामले में भी मुकदमा दर्ज हुआ और बाद में अदालत से आजम खां को सजा हुई.

हेट स्पीच मामले में सजा के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हो गई. इस तरह एक के बाद एक मामलों में आकाश सक्सेना की शिकायतें अदालतों और जांच एजेंसियों तक पहुंचती गईं.
जौहर यूनिवर्सिटी का मामला
2019 में आकाश सक्सेना ने जौहर ट्रस्ट और उसके माध्यम से यूनिवर्सिटी के निर्माण में कथित तौर पर काले धन के इस्तेमाल और वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए जांच एजेंसियों से शिकायत की थी. शिकायत में यूनिवर्सिटी के निर्माण पर खर्च हुई रकम, ट्रस्ट को मिले दान और उसकी वित्तीय गतिविधियों से जुड़े सवाल उठाए गए थे.
इस शिकायत का एक अहम आधार निर्माण लागत को लेकर सामने आया अंतर था. आकाश सक्सेना की ओर से यह सवाल उठाया गया कि विश्वविद्यालय प्रबंधन की ओर से निर्माण लागत 50 करोड़ रुपए से कम बताई गई, जबकि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की जांच में लागत करीब 494 करोड़ रुपए आंकी गई.
इतनी बड़ी रकम के अंतर ने निर्माण में इस्तेमाल धन के स्रोत को लेकर सवाल खड़े किए. हालांकि, निर्माण लागत से संबंधित अलग-अलग आकलनों और उनके आधार को जांच एजेंसियों और संबंधित रिकॉर्ड के संदर्भ में ही अंतिम रूप से देखा जाना है.
इसी तरह काले धन के इस्तेमाल के आरोप भी जांच का विषय हैं. आकाश सक्सेना ने ट्रस्ट को मिले कथित बड़े दान पर भी सवाल उठाए थे. उनका तर्क था कि यदि ट्रस्ट के रिकॉर्ड में बड़ी रकम दान के रूप में दर्ज है तो दानदाताओं की आर्थिक क्षमता और धन के स्रोत की भी जांच होनी चाहिए. यही वह पहलू है, जिसे ईडी की कार्रवाई के बाद फिर महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
ईडी इससे पहले वर्ष 2022 में भी जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े परिसर में कार्रवाई कर चुकी है. इसके बाद हाल के महीनों में आयकर विभाग की ओर से ट्रस्ट से आय-व्यय का विवरण मांगे जाने और 23 जून को उसके चैरिटेबल पंजीकरण को रद्द किए जाने की बात भी सामने आई. इन घटनाओं के बीच 19 अगस्त की ईडी कार्रवाई ने मामले को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया.
आजम खान के खिलाफ 43 केस!
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक आकाश करीब 43 मामलों में आजम खां के खिलाफ सीधे पक्षकार या शिकायतकर्ता रहे हैं. यही वजह है कि रामपुर की राजनीति में उन्हें आजम खां के खिलाफ सबसे मुखर कानूनी लड़ाई लड़ने वाले BJP नेताओं में गिना जाता है.
आकाश सक्सेना मूल रूप से कारोबारी हैं और उनके परिवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी मजबूत रही है. उनके पिता शिव बहादुर सक्सेना रामपुर की स्वार विधानसभा सीट से BJP के विधायक रहे और कल्याण सिंह सरकार में मंत्री भी रहे. वे लगातार चार बार विधायक रहे.
पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाते हुए आकाश सक्सेना सक्रिय राजनीति में आए. 2017 के विधानसभा चुनाव में उनके पिता शिव बहादुर सक्सेना ने रामपुर शहर सीट से आजम खां के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा.
इसके पांच साल बाद 2022 में BJP ने आकाश सक्सेना को आजम खां के खिलाफ मैदान में उतारा. हालांकि उस चुनाव में आकाश को करीब 55 हजार वोटों के अंतर से हार मिली लेकिन इसके बाद राजनीतिक परिस्थितियां तेजी से बदलीं.
आजम खां को हेट स्पीच मामले में सजा मिलने के बाद उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त हुई. इसके बाद रामपुर सदर सीट पर हुए उपचुनाव में BJP ने आकाश सक्सेना को मैदान में उतारा. आजम खां ने खुद चुनाव नहीं लड़ा, लेकिन उनके करीबी आसिम राजा सपा के उम्मीदवार बने.
यह चुनाव आजम खां के राजनीतिक प्रभाव की बड़ी परीक्षा माना गया. लंबे समय तक आजम के गढ़ रहे रामपुर शहर में आकाश सक्सेना ने जीत दर्ज कर पहली बार BJP को इस सीट पर बड़ी राजनीतिक बढ़त दिलाई. इस जीत का प्रतीकात्मक महत्व भी था. एक तरफ आजम खां के खिलाफ लगातार कानूनी लड़ाई लड़ने वाला नेता था और दूसरी तरफ उसी नेता ने उनके राजनीतिक गढ़ में चुनावी जीत हासिल की थी.
अब जांच की अगली कड़ी पर निगाह
19 अगस्त की ईडी कार्रवाई के बाद आकाश सक्सेना की पुरानी शिकायतों की अहमियत एक बार फिर बढ़ गई है. जौहर यूनिवर्सिटी परिसर में सुबह करीब सात बजे शुरू हुई कार्रवाई के दौरान जांच एजेंसी की टीम ने दस्तावेजों के साथ डिजिटल रिकॉर्ड भी खंगाले.
यूनिवर्सिटी और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई. इससे पहले ईडी की ओर से आजम खां के खिलाफ दर्ज मुकदमों का रिकॉर्ड पुलिस से मांगे जाने की जानकारी भी सामने आई थी. इसके बाद हुई कार्रवाई को जांच की अगली कड़ी माना जा रहा है.
जांच का दायरा यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय लेनदेन तक बढ़ता है या नहीं, यह आगे की कार्रवाई से स्पष्ट होगा. आकाश सक्सेना का आरोप है कि जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी धन के साथ कथित तौर पर काले धन का भी इस्तेमाल हुआ और ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों की गहराई से जांच होनी चाहिए.
वे समय-समय पर जांच एजेंसियों को यूनिवर्सिटी, ट्रस्ट और आजम खां से जुड़े मामलों की जानकारी देते रहे हैं. उन्होंने यूनिवर्सिटी की जमीन, ट्रस्ट की आय-व्यय, कथित नियमविरुद्ध निर्माण, सीवरेज सिस्टम और जल निगम भर्ती प्रकरण जैसे मामलों में भी जांच की मांग की थी.
रामपुर की राजनीति में आकाश सक्सेना की कहानी इसलिए अलग है क्योंकि उन्होंने आजम खां को केवल चुनावी मैदान में चुनौती नहीं दी. उन्होंने उनके खिलाफ कानूनी मोर्चा भी खोला और कई वर्षों तक उसे आगे बढ़ाया. 2018 में शुरू हुई यह लड़ाई अब जौहर यूनिवर्सिटी की वित्तीय गतिविधियों की जांच तक पहुंच चुकी है.

